पटना

RJD Crisis: बांकीपुर की हार के बाद आरजेडी में बढ़ी अंदरूनी कलह, भाई वीरेंद्र को मिला कई विधायकों का समर्थन

RJD Crisis: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली करारी हार ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के भीतर लंबे समय से सुलग रही नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लेकर लालू परिवार के सदस्यों तक अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं।
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Aug 06, 2026
tejashwi yadav RJD
राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव (फोटो-फेसबुक)

RJD Crisis आरजेडी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लेकर संगठन के कार्यकर्ताओं तक, सभी के निशाने पर तेजस्वी यादव के चार करीबी माने जाने वाले नेता हैं। उनसे हार के कारणों को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने से पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ती जा रही है। चर्चा यह भी है कि कई नेता अब अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर दूसरे विकल्पों पर भी विचार करने लगे हैं।

मनेर के विधायक भाई वीरेंद्र ने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्ति यादव का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधकर इस बहस को और हवा दे दी है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि भाई वीरेंद्र के रुख को कई विधायक और कार्यकर्ताओं का भी समर्थन मिल रहा है। सूत्रों के अनुसार, कुछ नेताओं ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि तेजस्वी यादव ने समय रहते संगठन और नेतृत्व शैली में बदलाव नहीं किया, तो भविष्य में दूसरे राजनीतिक विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।

परिवार में भी दिख रही है अलग-अलग लाइन

बांकीपुर उपचुनाव में आरजेडी की हार के बाद लालू परिवार के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आई है। परिवार के चार सक्रिय सदस्यों के बयान एक-दूसरे से मेल खाते नहीं दिखे। तेजस्वी यादव ने प्रशांत किशोर की जीत से अधिक भाजपा की हार को प्रमुख मुद्दा बताया। वहीं, तेज प्रताप यादव ने चुनाव परिणाम आने के बाद प्रशांत किशोर को जीत की बधाई देकर अलग संदेश दिया। दूसरी ओर, मीसा भारती ने जनसुराज को भाजपा की "लोमड़ी" करार दिया, जबकि रोहिणी आचार्य ने प्रशांत किशोर के संघर्ष और जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने की सराहना करते हुए ऐसा संदेश दिया, जिसे राजनीतिक हलकों में तेजस्वी यादव पर परोक्ष टिप्पणी माना गया।

इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, पार्टी और परिवार में हार के बाद जिस तरह अलग-अलग स्वर उभरकर सामने आए हैं, उसे आरजेडी के भीतर बड़े बदलाव या उथल-पुथल के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि स्थापना के तीन दशक बाद आरजेडी शायद अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है, लेकिन नेतृत्व इस स्थिति की गंभीरता को समझने के बजाय बेफिक्र नजर आ रहा है।

भाई वीरेंद्र के बयान से बढ़ी चर्चा

मृत्युंजय तिवारी के बाद अब भाई वीरेंद्र ने भी बिना नाम लिए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्ति यादव पर तंज कसा है। उनके बयान को लेकर पार्टी के भीतर सबसे अधिक चर्चा हो रही है। भाई वीरेंद्र ने संकेतों में "चमड़े के व्यवसायी" कहकर शक्ति यादव पर निशाना साधा। राजनीतिक जानकार इसे केवल शक्ति यादव ही नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव के अन्य करीबी नेताओं के लिए भी संदेश के रूप में देख रहे हैं। इससे यह संकेत भी मिल रहा है कि पार्टी के भीतर अब आर-पार की लड़ाई की तैयारी शुरू हो चुकी है। आगे की दिशा क्या होगी, इसका फैसला अब पार्टी नेतृत्व को करना है।

इसी बीच रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जीत उसी की होती है, जो लगातार संघर्ष करता है और जनता के बीच रहता है। राजनीतिक हलकों में उनके इस बयान को भी तेजस्वी यादव की कार्यशैली पर परोक्ष टिप्पणी के तौर पर देखा जा रहा है।

Updated on:
06 Aug 2026 11:47 am
Published on:
06 Aug 2026 11:32 am