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BJP review meeting: प्रशांत किशोर के नैरेटिव के आगे बेबस दिखी बीजेपी, समीक्षा बैठक में हार की वजहों का खुलासा

BJP review meeting बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में 30 साल पुराने गढ़ के ढहने के बाद भाजपा ने अपनी हार का पोस्टमार्टम शुरू कर दिया है। पार्टी की समीक्षा बैठक में माना गया कि वह जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के नैरेटिव का प्रभावी जवाब देने में विफल रही।
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BJP review meeting

बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री

BJP review meeting भाजपा बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के नैरेटिव का प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं कर सकी। यही वजह रही कि पार्टी को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा। बांकीपुर उपचुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद आयोजित भाजपा की समीक्षा बैठक में यह बात प्रमुखता से सामने आई। बैठक में यह भी माना गया कि हाल के वर्षों में यह पार्टी की सबसे बड़ी चुनावी हारों में से एक है। समीक्षा के दौरान यह भी स्वीकार किया गया कि स्थानीय मतदाताओं की नाराजगी और उनके रुझान को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया, जो हार का एक बड़ा कारण बना। इसके साथ ही समीक्षा बैठक में यह भी बात सामने आया कि 50 से अधिक विधायक जिनको ग्राउंड पर लगाया गया था वो नहीं निकले। हालांकि, बैठक में किसी नेता या पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का फैसला नहीं लिया गया, लेकिन समीक्षा रिपोर्ट तैयार कर पार्टी नेतृत्व के पास दिल्ली भेज दी गई है।

PK के नैरेटिव का जवाब नहीं दे सकी बीजेपी

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत पार्टी के सभी वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक के आधार पर तैयार समीक्षा रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट में माना गया कि पार्टी ने अपने पारंपरिक गढ़ बांकीपुर में मतदाताओं और कार्यकर्ताओं के रुझान को गंभीरता से नहीं लिया। वहीं, जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपेक्षाकृत कमजोर संगठन होने के बावजूद अपनी टीम के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया और भाजपा के खिलाफ प्रभावी नैरेटिव खड़ा करने में सफल रहे। समीक्षा में यह भी स्वीकार किया गया कि पार्टी उस नैरेटिव का समय रहते प्रभावी जवाब नहीं दे सकी।

'कुत्ता-बिल्ली' विवाद पर भारी पड़ी चुप्पी

बैठक में विशेष रूप से 'कुत्ता-बिल्ली' वाले बयान का मुद्दा भी उठा। नेताओं का कहना था कि भाजपा के किसी भी नेता ने ऐसा बयान नहीं दिया था, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी इस आरोप का उतनी मजबूती और आक्रामकता से खंडन नहीं कर सकी, जितना किया जाना चाहिए था। नेताओं ने माना कि जिस तरह हार के बाद पार्टी ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष मजबूती से रखा, वैसा रुख चुनाव के दौरान अपनाया जाता तो स्थिति अलग हो सकती थी। हालांकि, पटना साहिब के सांसद रविशंकर प्रसाद समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान इस आरोप का खंडन किया था, लेकिन समीक्षा बैठक में यह राय सामने आई कि पार्टी का जवाब अधिक आक्रामक और व्यापक होना चाहिए था। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि बांकीपुर से भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का पूरा समर्थन प्राप्त था। ऐसे में राज्य इकाई प्रचार के दौरान इस मुद्दे को अपेक्षित आक्रामकता के साथ उठाने से कुछ हद तक बचती रही।

नामांकन के बाद उम्मीदवार बदलना

बीजेपी ने पहले अभिषेक 'बंटी' को उम्मीदवार बनाया। उन्होंने नामांकन भी दाखिल कर दिया और उनके नामांकन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। लेकिन अगले ही दिन अभिषेक बंटी ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए नाम वापस ले लिया। इसके बाद पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंतिम समय में उम्मीदवार बदलने से मतदाताओं के बीच गलत संदेश गया और इससे पार्टी की चुनावी रणनीति पर भी सवाल उठे।

उल्लेखनीय है कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 19,324 मतों से पराजित किया। यह वही सीट है, जहां से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लगातार पांच बार विधायक रह चुके हैं।