बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने पहले महीने में कई बड़े फैसले लिए हैं। इसमें 10 जिलों में 11 सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने, महिला सुरक्षा के लिए “पुलिस दीदी योजना” और प्रशासनिक जवाबदेही के लिए “सहयोग की त्रिवेणी” योजना शुरू करने जैसे कदम शामिल हैं।
बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के एक महीने पूरे हो गए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल को शपथ ली थी। पद संभालने के बाद पहले 30 दिनों में सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इस दौरान राज्य में अपराध नियंत्रण, शहरी विकास, महिला सुरक्षा, शिक्षा, प्रशासनिक सुधार और भ्रष्टाचार पर अंकुश जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया है।
सरकार के पहले 100 दिनों के एजेंडे में सबसे चर्चित फैसला 10 जिलों में 11 सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही अपराध पर नियंत्रण के लिए पुलिस को अधिक सख्ती और कार्रवाई की छूट देने की नीति भी चर्चा में रही है।
सरकार का दावा है कि सैटेलाइट टाउनशिप को पूरी योजना के साथ विकसित किया जाएगा, जिनमें चौड़ी सड़कें, बाजार, पार्क, हरियाली और आधुनिक आवासीय सुविधाएं शामिल होंगी। इसका उद्देश्य तेजी से बढ़ते शहरों पर दबाव को कम करना और लोगों को बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री की इस योजना को उनका ड्रीम प्रोजेक्ट माना जा रहा है। इन टाउनशिप के नाम ऐतिहासिक आधार पर रखने की भी योजना है, ताकि स्थानीय पहचान और इतिहास को संरक्षित किया जा सके।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी महिला सुरक्षा को लेकर काफी सतर्क हैं। अपनी सभाओं में वे कई बार कह चुके हैं कि जो लोग बेटियों के साथ कुकृत्य करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश की बेटियों और महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने “पुलिस दीदी योजना” शुरू की है। इसके तहत महिला पुलिसकर्मियों को स्कूटी उपलब्ध कराकर स्कूलों और कॉलेजों के आसपास तैनात किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे छात्राओं में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी और छेड़खानी जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
सम्राट सरकार ने प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से “सहयोग की त्रिवेणी” योजना शुरू की है। इसके तहत हेल्पलाइन 1100, ऑनलाइन पोर्टल और पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में लोगों की समस्याएं सुनकर उनका निराकरण तय समयसीमा में किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि शिकायतों का समय पर निपटारा नहीं होता है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।