शिवानंद तिवारी ने एक बार फिर से तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए कहा कि पटना एयरपोर्ट पर आरजेडी नेता के स्वागत के लिए कार्यकर्ताओं से ज़्यादा बाइट लेने के लिए कैमरे वालों की भीड़ थी।
लालू प्रसाद की पार्टी आरजेडी की बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से तेजस्वी यादव पर परिवार और पार्टी में हमले का सिलसिला जारी है। रोहिणी आचार्य के दो दिन पहले हमले के बाद आरजेडी के सीनियर नेता शिवानंद तिवारी ने एक बार फिर उनपर निशाना साधा है। शिवानंद तिवारी इससे पहले भी तेजस्वी यादव पर तंज कसते रहे हैं। तेजस्वी यादव के पटना पहुंचने के तत्काल बाद शिवानंद तिवारी ने कहा कि तेजस्वी के आगवानी में पटना एयरपोर्ट पर कोई विधायक नज़र नहीं आया। पटना पर उनके स्वागत के लिए कार्यकर्ताओं से ज़्यादा कैमरा मैन की भीड़ थी। इसके साथ ही विदेश दौरा से लौटने के बाद उनके पार्टी कार्यालय की जगह सीधे घर चले जाने पर भी शिवानंद तिवारी ने सवाल खड़े करते हुए कहा है कि यह सब कुछ अच्छा लक्षण नहीं है।
आरजेडी के सीनियर नेता इससे पहले भी कई बार तेजस्वी यादव पर निशाना साधते रहे हैं। इससे पहले उन्होंने तेजस्वी यादव ने के विधानसभा सत्र के दौरान विदेश यात्रा पर सवाल खड़ा करते हुए कहा था कि तेजस्वी यादव मैदान छोड़ दिया। उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि तेजस्वी यादव में अगले पांच सालों तक विरोधी दल के नेता की भूमिका निभाने की क्षमता नहीं है। उन्होंने अपने एक पोस्ट में बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी की करारी हार पर कहा था कि जय और पराजय सहज और सामान्य नियम हैं। अहम सवाल यह है कि हम इसको किस तरीके से लेते हैं। तेजस्वी यादव को बिहार लौटना चाहिए और नेता की तरह नहीं बल्कि कार्यकर्ता की तरह सभी से मिलना चाहिए।
तेजस्वी यादव रविवार को सपिरवार विदेश में अपनी छुट्टी मनाकर पटना लौटे। पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हम शुरू से ही सकारात्मक राजनीति करते आए हैं। इसलिए, 100 दिन तक नई सरकार की नीतियों, निर्णयों और कार्यक्रमों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। लेकिन,सरकार के कार्यों की विवेचना करते रहेंगे। उन्होंने आगे कहा कि पूरा देश कह रहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव में लोक हारा और तंत्र जीता। उन्होंने कहा कि सरकार अपने घोषणा पत्र पर अमल करे, जिसमें प्रदेश की ढाई करोड़ महिलाओं को दो-दो लाख रुपये देने का वादा किया गया था। उन्होंने डबल इंजन सरकार में अपराध, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, पलायन, शिक्षा, चिकित्सा और विधि व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़ा किया।