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Makar Sankranti 2026: बिहार में दही-चूड़ा पॉलिटिक्स, जब भोज की मेज पर टूट गई थी कांग्रेस, अशोक चौधरी ने छोड़ा था हाथ का साथ

Makar Sankranti 2026 बिहार में मकर संक्रांति का दही-चूड़ा भोज सियासी संवाद, मेल-मिलाप और शक्ति प्रदर्शन का बड़ा मंच है। चूड़ा दही और गुड़ की मिठास के साथ बड़े राजनीतिक बदलाव भी होते रहे हैं।
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पटना

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Rajesh Kumar Ojha

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Updated: 11 Jan 2026, 9:36 AM IST

Ashok Choudhary

बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी फोटो-Dr. Ashok Choudhary FB

Makar Sankranti 2026 मकर संक्रांति पर प्रत्येक वर्ष की तरह इसबार भी बिहार का सियासी चूड़ा-दही भोज चर्चा में है। मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा का दायरा बिहार से बढ़कर दिल्ली तक बढ़ गया है। बिहार के नेता दिल्ली में भी अब मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा के भोज का आयोजन करने लगे हैं। बिहार के इस खास भोज पर पूरे देश की नजर होती है, क्योंकि भोज के बाद बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। वर्ष 2018 में जदयू के मकर संक्रांति पर आयोजित दही चूड़ा के भोज के बाद कांग्रेस में बड़ी टूट हुई थी। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अपने कई विधायकों के साथ जदयू में शामिल हो गए थे।

जेडीयू के भोज से कांग्रेस को लगा था झटका

वर्ष 2018 में मंकर संक्रांति पर JDU नेता वशिष्ठ नारायण सिंह के घर पर दही चूड़ा भोज का आयोजन किया गया था। नीतीश कुमार वर्ष 2017 में महागठबंधन छोड़कर एक बार एनडीए गठबंधन में शामिल हो गए थे। इसके एक वर्ष बाद जदयू के प्रदेश वशिष्ठ नारायण सिंह की ओर से मकर संक्रांति पर चूड़ा दही का भोज दिया गया था। इस भोज में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी भी अपने कुछ विधायकों के साथ शामिल हुए थे। इस भोज में ही कांग्रेस में एक बड़ी टूट के पहली बार संकेत मिले थे। भोज के डेढ़ महीने बाद अशोक चौधरी कांग्रेस के कई और विधायकों के साथ JDU में शामिल हो गए थे। तब से अशोक चौधरी नीतीश कुमार के साथ ही हैं।

भोज का दायरा दिल्ली तक बढ़ा

मकर सांक्रांति पर दही चूड़ा के भोज का दायरा बिहार से बढ़कर दिल्ली तक पहुंच चुका है। दिल्ली में भी इसकी शुरुआत बिहार के ही नेताओं ने किया। दिल्ली में यूनाईटेड फ्रंट की सरकार बनी थी तब से यह परंपरा दिल्ली में शुरू हुआ। रामविलास पासवान ने दिल्ली में पत्रकारों को दही चूड़ा खिलाने के लिए बुलाना शुरू किया था। रामविलास पासवान के दही-चूड़ा भोज में 2015 में पीएम मोदी समेत बीजेपी के कई सीनियर नेता भी शामिल हुए थे। लेकिन, दिल्ली के पत्रकारों को दही चूड़ा का असली स्वाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह के भोज में मिला करता था।

चिरगा दे रहे भोज

रघुवंश प्रसाद सिंह के घर पर मकर संक्रांति के दिन दही चूड़ा के भोज पर भागलपुर से कतरनी चूड़ा, गया का तिलकुट के साथ साथ पूड़ी सब्जी और जलेबी की भी व्यवस्था रहती थी। पिछले वर्ष जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी दिल्ली में दही चूड़ा के भोज का आयोजन किया था। इस वर्ष राम विलास पासवान की पंरपरा को आगे बढ़ाते हुए चिराग पासवान पटना और दिल्ली में चूड़ा दही भोज दे रहे हैं।

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