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‘नीतीश को विश करें या किस करें?’ जब होली पर लालू की बात से लोटपोट हो गए थे लोग; तब CM आवास पर फटते थे कुर्ते और बजता था ढोल

Lalu Yadav Holi: लालू यादव के आवास पर आज भले ही शोर शराबा कम हो गया हो, लेकिन उनके कुर्ता फाड़ होली की कहानियां आज भी बिहार में गूंजती हैं। एक बार एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार को विश करें या किस करें। 

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पटना

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Anand Shekhar

Mar 03, 2026

lalu yadav holi

होली पर नीतीश कुमार को तिलक लगाते लालू यादव (फोटो- PTI)

Lalu Yadav Holi: बिहार की राजनीति और होली का जिक्र हो, तो लालू प्रसाद यादव का नाम आना लाजिमी है। एक दौर था जब पटना का 1 अणे मार्ग (मुख्यमंत्री आवास) केवल सत्ता का केंद्र नहीं, बल्कि लोक संस्कृति, फगुआ और देसीपन का सबसे बड़ा अखाड़ा बन जाता था। लालू यादव की होली ऐसी थी, जिसकी चर्चा सात समंदर पार तक होती थी। आज भले ही लालू यादव अस्वस्थ हों, लेकिन उनकी कुर्ता फाड़ होली के किस्से आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं।

नीतीश को विश करें या किस?

लालू यादव की होली में कोई औपचारिकता नहीं होती थी। आम कार्यकर्ता से लेकर नेता-अफसर और पत्रकारों तक का उनकी होली पार्टी में जमावाड़ा होता था। एक बार होली के मौके पर पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वे नीतीश कुमार को होली की बधाई देंगे?

लालू ने अपने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज में ठहाका लगाया और बोले, "अरे! नीतीश को विश करें कि किस (Kiss) करें? आज विश करने का दिन है कि किस करने का? चलिए… जोगिरा सारा रारा!" यह सुनते ही वहां मौजूद लोग लोटपोट हो गए। हालांकि, जब लालू और नीतीश साथ होली खेलते थे, तो एक-दूसरे को तिलक लगाकर पूरी मर्यादा भी निभाते थे। लालू पत्रकारों को भी नहीं छोड़ते थे और उन्हें रंग-गुलाल से सराबोर कर देते थे। उनके हर बयान और अंदाज में गांव की वो सोंधी खुशबू और मिट्टी की असलियत नजर आती थी।

लालू की फेमस कुर्ता फाड़ होली

लालू यादव की होली का मतलब था, सब बराबर। न कोई मंत्री, न कोई संतरी। 1990 से 1997 के बीच जब वे मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने 'कुर्ताफाड़' होली की परंपरा को शिखर पर पहुंचा दिया था। सुबह 7 बजे से ही समर्थकों का हुजूम जुटने लगता था। दोपहर होते-होते नजारा ऐसा होता था कि नंगा बदन, गले में फटा हुआ कुर्ता, कमर में ढोल और जुबां पर 'जोगिरा सारा रारा'।

इस हुड़दंग में वहां मौजूद हर शख्स एक-दूसरे का कुर्ता फाड़ देता था। यहां तक कि खुद लालू प्रसाद यादव का कुर्ता भी सुरक्षित नहीं रहता था। यह परंपरा इस बात का प्रतीक थी कि होली के दिन नेता और कार्यकर्ता के बीच की सारी दीवारें गिर चुकी हैं।

राबड़ी देवी का जोश और ढोल की थाप

उस वक्त लालू यादव के आवास पर शाम के वक्त माहौल थोड़ा बदलता था। अबीर-गुलाल उड़ता और लालू खुद ढोल बजाकर फगुआ गाते थे। सबसे खास बात यह थी कि लालू गाते थे और राबड़ी देवी उन पर रंग डालती थीं। राबड़ी देवी भी कार्यकर्ताओं के साथ बड़े उत्साह से होली खेलती थीं और सबको पुआ-पकवान खिलाती थीं।

तेज प्रताप यादव आगे बढ़ाएंगे विरासत?

समय बदला, लालू बीमार हुए और किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अब वे पहले जैसी होली नहीं खेल सकते। लेकिन इस बार उनके बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने उस पुरानी विरासत को फिर से जिंदा करने का फैसला किया है। 42 A, हार्डिंग रोड स्थित अपने आवास पर उन्होंने भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन किया है, जिसमें वृंदावन की रासलीला टीम को बुलाया गया है। तेज प्रताप यादव ने इस पहले अपनी पिता लालू यादव के नक्शे कदम पर चलते हुए मकर संक्रांति के दिन भव्य दही-चूड़ा भोज की भी दावत दी थी।