
Bihar Tender Scam: बिहार के टेंडर घोटाले को लेकर राजद सांसद सुधाकर सिंह ने सीनियर IAS ऑफिसर आनंद किशोर को इस पूरे घोटाले का असली 'किंगपिन' और 'सबसे बड़ा माफिया' बताया है। सांसद ने कहा कि आनंद किशोर ऐसे अधिकारी हैं कि जहां-जहां साहब के चरण पड़े, वहां-वहां उन्होंने बंटाधार किया। उन्होंने राज्य सरकार की जांच एजेंसियों और प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस के दबाव में आकर 24 तारीख को जो चार्जशीट दाखिल की गई, वह केवल एक दिखावा है, जिसमें असली गुनाहगारों और बड़े चेहरों को साफ बचा लिया गया है।
सुधाकर सिंह ने आर्थिक अपराध अनुसंधान द्वारा कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जांच में जिन आईएएस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप थे, उनका नाम चार्जशीट में नहीं है। सांसद ने पूछा कि अगर ये अधिकारी गुनहगार नहीं हैं, तो सरकार ने इनमें से दो आईएएस अधिकारियों (योगेश सागर और अभिलाषा शर्मा) को किस आधार पर निलंबित किया था? जब चार्जशीट में नाम ही नहीं देना था, तो निलंबन का ढोंग क्यों रचा? जांच एजेंसी बहाना बना रही है कि वे फरार हैं। चलिए मान लिया कि वे फरार हैं, लेकिन आनंद किशोर तो फरार नहीं हैं, वे तो सबके सामने घूम रहे हैं, फिर उनसे पूछताछ के लिए नोटिस क्यों नहीं जारी हुआ?
सांसद ने आरोप लगते हुए कहा कि सवा साल पहले लोकेश कुमार सिंह को बिहार का वित्त सचिव नियुक्त किया गया था। लेकिन 3 दिन के भीतर उन्हें हटाकर आनंद किशोर को वित्त सचिव की कमान सौंप दी गई थी। ऐसा इसलिए किया गया ताकि आनंद किशोर की बेटी ईशा वर्मा को 25 करोड़ रुपये का सरकारी ठेका दिया जा सके। इस आरोप के बाद भी सरकार ने कोई जांच नहीं कराई। जेल में बंद आरोपी मुमुक्षु चौधरी के बयानों का हवाला देकर सुधाकर सिंह ने कहा कि अधिकारियों की मनचाही पोस्टिंग के लिए बकायदा 25 लाख से 40 लाख रुपये तक की वसूली की गई, जिसका मुख्य किंगपिन कोई और नहीं बल्कि आनंद किशोर ही थे।
सांसद सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि टेंडर घोटाले में आरोपी अधिकारियों को राज्य सरकार द्वारा न सिर्फ बचाया जा रहा है, बल्कि उन्हें बाकायदा प्राइम पोस्टिंग दी जा रही है। सांसद ने कहा कि जिन अभियुक्तों पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिन्हें सलाखों के पीछे होना चाहिए, उनके साथ खुद मुख्यमंत्री देवघर के पास इको पार्क निर्माण के सिलसिले में साथ घूम रहे थे। सुधाकर सिंह ने पूछा कि जब सूबे के मुखिया खुद ऐसे विवादित और गुनहगार चेहरों के साथ सार्वजनिक रूप से विचरण कर रहे हों, तो राज्य की जनता और व्यवस्था उन पर कैसे भरोसा कर सकती है।
चारा घोटाले का जिक्र करते हुए सुधाकर सिंह ने कहा कि लालू प्रसाद पर उस मामले में पैसे लेने का कोई सीधा आरोप नहीं था। उन पर मुख्य आरोप यह था कि उन्होंने घोटाले के मुख्य आरोपी को सर्विस एक्सटेंशन दिया था और इसी आधार पर अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था। इस टेंडर घोटाले के आरोपी तारणी प्रसाद को भी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सर्विस एक्सटेंशन दिया था। अगर लालू प्रसाद को सर्विस एक्सटेंशन देने के लिए दोषी ठहराया जा सकता है, तो इस घोटाले के आरोपी को एक्सटेंशन देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सवाल क्यों नहीं पूछा जाना चाहिए? क्या वह कानून से ऊपर हैं?