पटना

लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका; लैंड फॉर जॉब केस में FIR रद्द करने से इनकार, लेकिन मिली यह खास राहत

Land For Job Case: सुप्रीम कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब मामले में RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने FIR रद्द करने की याचिका खारिज कर दी है। हालांकि कोर्ट ने उन्हें एक राहत भी दी है।
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Apr 13, 2026
land for job case
राबड़ी देवी, लालू यादव और तेजस्वी यादव (फोटो- लालू यादव फेसबुक)

Land For Job Case: सुप्रीम कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब मामले में राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ CBI द्वारा दर्ज FIR और चार्जशीट को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने साफ किया कि इस मामले में जांच और ट्रायल जारी रहेगा। हालांकि, लालू यादव की बढ़ती उम्र और बिगड़ती सेहत को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट देकर बड़ी राहत दी है।

सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस

सुनवाई के दौरान लालू यादव की तरफ से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और CBI की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी.राजू के बीच तीखी बहस हुई। CBI की तरफ से दलील देते हुए ASG ने कोर्ट में कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC एक्ट) की धारा 17A केवल उन मामलों में लागू होती है जहां संबंधित व्यक्ति निर्णय लेने वाला या सिफारिश करने वाला अधिकारी हो। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं था इसलिए किसी पूर्व मंज़ूरी की जरूरत नहीं थी, क्योंकि लालू यादव ने कथित तौर पर अपने आधिकारिक पद का नहीं, बल्कि अपने निजी प्रभाव का इस्तेमाल करके फायदे उठाए थे।

वहीं, लालू यादव की तरफ से पेश हुए कपिल सिब्बल ने दलील दी कि 25 फरवरी 2025 को आखिरी चार्जशीट दायर कि गई है। जिसमें कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था। उन्होंने मांग की कि चार्जशीट को ही रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि यह राजनीति से प्रेरित है।

लालू यादव को कोर्ट में नाहों होना होगा पेश

सुप्रीम कोर्ट ने भले ही मामले को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी, लेकिन कोर्ट ने लालू यादव को एक बड़ी रियायत भी दी है। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल के दौरान लालू यादव को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने की जरूरत नहीं होगी। उनकी तरफ से उनके वकील पेश हो सकते हैं। यह राहत लालू यादव के लिए एक जीवनरेखा की तरह है, जो किडनी ट्रांसप्लांट के बाद सेहत से जुड़ी गंभीर दिक्कतों से जूझ रहे हैं।

क्या है मामला

यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू यादव रेल मंत्री थे। सीबीआई का आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी के पदों पर नियुक्तियां करने के बदले में लालू यादव के परिवार और उनके करीबियों को बेहद कम कीमतों पर जमीनें गिफ्ट की गईं या बेची गईं। सीबीआई इस मामले में अब तक कई सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

Updated on:
13 Apr 2026 12:26 pm
Published on:
13 Apr 2026 12:25 pm
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