तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर करोड़ों रुपये के फिजूलखर्ची का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस राज्य के पास अपने सरकारी कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी पैसे नहीं हैं, वहां अखबारों में लाखों रुपये के सरकारी विज्ञापन में एक राज्यसभा सांसद की तस्वीर क्यों प्रकाशित की जा रही है?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार में नई एनडीए सरकार बनने के बाद 16 अप्रैल को राज्य सरकार द्वारा प्रमुख अखबारों में जारी किए गए एक 'फुल पेज' के विज्ञापन ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा फ्रंट पेज पर जारी इस विज्ञापन को लेकर तेजस्वी यादव ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। तेजस्वी ने इस विज्ञापन को जनता के पैसे की बर्बादी बताया है। साथ ही विज्ञापन में नीतीश कुमार की तस्वीर शामिल किए जाने को लेकर गंभीर संवैधानिक और कानूनी सवाल भी उठाए।
सरकारी विज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ नीतीश कुमार की बड़ी तस्वीर लगाई गई है। विज्ञापन में लिखा गया है कि पीएम नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में बिहार सरकार लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगी तथा बिहार प्रगति, समृद्धि और आत्मनिर्भरता के पथ पर तेजी से आगे बढ़ते हुये विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विज्ञापन की फोटो साझा करते हुए राज्य की दयनीय आर्थिक स्थिति का हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ राज्य के सरकारी कर्मचारी वेतन के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार अपनी छवि चमकाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है। तेजस्वी ने लिखा, 'यह वही बिहार है, जो देश का सबसे गरीब राज्य है जहां हर व्यक्ति पर औसतन 27,000 रुपये का कर्ज है। करीब 5 लाख सरकारी कर्मचारियों को अब तक वेतन नहीं मिला है, लेकिन सेलेक्टेड सीएम के राज में राजनीति चमकाने के उद्देश्य से लाखों रुपये का विज्ञापन छपवाया गया।'
तेजस्वी यादव ने विज्ञापन में नीतीश कुमार के तस्वीर को लेकर सबसे बड़ा प्रहार किया है। बता दें कि नीतीश कुमार बिहार के सीएम पद से इस्तीफा दे चुके हैं और वर्तमान में राज्य सभा सांसद हैं। तेजस्वी ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या कोई राज्य सरकार किसी राज्य सभा सांसद की तस्वीर को सरकारी विज्ञापन में प्रमुखता से दे सकती है?
तेजस्वी ने सरकार को घेरते हुए पूछा, 'बिहार सरकार किस हैसियत से एक राज्यसभा सांसद की तस्वीर छाप सकती है? क्या पहले ऐसा कभी हुआ? नहीं, तो फिर क्या यह कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं है?' गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक, सरकारी विज्ञापनों में केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की तस्वीरों के इस्तेमाल की ही इजाजत है।