बिहार में महागठबंधन का हिस्सा कांग्रेस और RJD केरल में एक-दूसरे के आमने-सामने होंगे। RJD ने केरल विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है। दिलचस्प बात यह है कि तेजस्वी की पार्टी वहां कांग्रेस के खिलाफ चुनावी मैदान में होगी।
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि उनकी पार्टी केरल विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। तेजस्वी ने पटना में RJD विधायकों के साथ हुई एक अहम बैठक के बाद यह घोषणा की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जहां उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में चुनाव नहीं लड़ेगी, वहीं केरल में वह पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी।
मीडिया से बात करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, 'पांच राज्यों के लिए चुनाव अधिसूचना जारी हो चुकी है। केरल में हमने LDF के साथ गठबंधन किया है और RJD वहां तीन सीटों पर चुनाव लड़ेगी। अतीत में भी केरल में हमारे विधायक रहे हैं। हमें पूरा भरोसा है कि वहां की मौजूदा सरकार ही दोबारा सत्ता में लौटेगी।' उन्होंने यह भी साफ किया कि RJD पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी।
दिलचस्प बात यह है कि जहां बिहार में महागठबंधन के भीतर RJD और कांग्रेस सहयोगी हैं, वहीं केरल में ये दोनों पार्टियां सीधे आमने-सामने होंगी। बिहार में RJD, कांग्रेस और वामपंथी दल (CPI-M, CPI-ML) महागठबंधन का हिस्सा हैं और बीजेपी-जदयू वाली गठबंधन एनडीए के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हैं। इसके विपरीत, केरल में राजद ने LDF (वाम मोर्चा) के साथ हाथ मिलाया है, जो UDF (कांग्रेस के नेतृत्व वाला मोर्चा) के खिलाफ सीधे चुनावी मुकाबले में है। इसका मतलब है कि केरल में तेजस्वी यादव अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को कांग्रेस के खिलाफ मैदान में उतारेंगे और उनके खिलाफ प्रचार करेंगे।
तेजस्वी यादव ने कहा कि उनकी पार्टी की पहले भी केरल विधानसभा में मौजूदगी रही है। इसलिए, पार्टी को उम्मीद है कि LDF के साथ गठबंधन में, वह राज्य की राजनीति में एक अहम भूमिका निभा सकती है। उन्होंने आगे कहा कि RJD, LDF को सत्ता में बने रहने में मदद करेगी।
चुनाव आयोग ने केरल की 140 विधानसभा सीटों के लिए चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इसके लिए वोटिंग 9 अप्रैल को होगी और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। 2021 में हुए पिछले विधानसभा चुनावों में, लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 99 सीटों पर जीत हासिल की थी। इसके मुकाबले, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने 41 सीटें जीती थीं। उस चुनाव में BJP एक भी सीट जीतने में नाकाम रही थी।