
BPSC TRE 4 के लिए प्रदर्शन करते अभ्यर्थी (फोटो- X)
बिहार में शिक्षक बनने का सपना देखने वाले हजारों उम्मीदवारों ने आज पटना में एक बड़े आंदोलन का बिगुल बजा दिया। शिक्षक भर्ती के चौथे चरण (TRE-4) को लेकर लंबे समय से बनी अनिश्चितता के बीच, बुधवार को बड़ी संख्या में शिक्षक उम्मीदवार राजधानी पटना में जमा हुए और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यह विरोध मार्च पटना कॉलेज परिसर से शुरू हुआ और BPSC मुख्यालय की ओर बढ़ा, जिसमें बड़ी संख्या में महिला उम्मीदवारों ने भी हिस्सा लिया। हाथों में पोस्टर और तिरंगा थामे छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में, उम्मीदवारों ने आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
आंदोलन के दौरान, पोस्टर और बैनर थामे छात्रों को 'नीतीश कुमार के सम्मान में, बिहार के छात्र और युवा मैदान में', 'हमें हमारे अधिकार दो' और 'नीतीश के सम्मान में, बिहार की बेटियां मैदान में' जैसे नारे लगाते देखा गया। उम्मीदवारों ने BPSC कार्यालय तक मार्च करने की योजना बनाई थी ताकि वे अपनी मांग सीधे आयोग तक पहुंचा सकें। विरोध प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण लेकिन पूरी तरह से व्यवस्थित लग रहा था और छात्र अपने भविष्य को लेकर बेहद गंभीर दिखाई दे रहे थे।
मीडिया से बात करते हुए, छात्र नेता दिलीप ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा के दौरान सार्वजनिक मंचों से शिक्षक भर्ती के चौथे चरण के संबंध में बार-बार आश्वासन दे रहे हैं। शिक्षा विभाग ने भी रिक्तियों की सूची भेज दी है, लेकिन इसके बावजूद, BPSC के कुछ अधिकारी टालमटोल कर रहे हैं और आधिकारिक अधिसूचना जारी करने में देरी कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि यह सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना और उनका अपमान है। दिलीप ने आगे कहा कि इस देरी से मुख्यमंत्री की सार्वजनिक छवि भी धूमिल हो रही है और छात्रों का भरोसा टूट रहा है।
विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आयोग और सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं।
उम्मीदवारों ने आयोग को BPSC भर्ती के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी करने के लिए 17 मार्च की रात तक का समय दिया था। जब कल रात तक कोई जानकारी नहीं मिली, तो आज सुबह हजारों छात्र पटना कॉलेज में जमा हो गए। उम्मीदवारों का कहना है कि वे पिछले दो सालों से इस भर्ती अभियान का इंतजार कर रहे हैं और अब वे केवल कोरे आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे।
इस बार की शिक्षक बहाली में डोमिसाइल नीति (बिहार के स्थायी निवासियों को प्राथमिकता) को कड़ाई से लागू करने की मांग भी तेज है। छात्रों का तर्क है कि राज्य के भीतर नौकरियों पर बिहार के युवाओं का ही पहला हक होना चाहिए। इसके अलावा, इस भर्ती अभियान में कक्षा 1 से 12 तक के शिक्षकों के साथ-साथ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के तहत आने वाले स्कूलों के लिए भी बड़े पैमाने पर नियुक्तियां शामिल हैं।
जैसे ही उम्मीदवारों की भीड़ पटना कॉलेज से बाहर निकली, पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। इससे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं। हालांकि प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन छात्रों का रुख बिल्कुल साफ है। 'जब तक विज्ञापन नहीं आता, हम घर वापस नहीं जाएंगे।'
Published on:
18 Mar 2026 02:19 pm
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