
सांकेतिक तस्वीर (AI Generated)
बिहार के सारण जिले के डेरनी में 11 मार्च को 10वीं कक्षा की एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब एक हाई-प्रोफाइल केस बन गया है। पुलिस की शुरुआती थ्योरी और पीड़ित परिवार के गैंगरेप और हत्या के आरोपों के बीच गहरे मतभेद को देखते हुए, इस मामले की जांच अब CID (अपराध जांच विभाग) को सौंप दी जाएगी। स्थानीय सांसद राजीव प्रताप रूडी की पहल पर, बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने CID जांच के लिए अपनी सहमति दे दी है।
इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए, सांसद राजीव प्रताप रूडी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन (11 मार्च) उनके कंट्रोल रूम को इस घटना की सूचना मिली थी, जिसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस प्रशासन को सूचित किया।
रूडी ने कहा, 'पुलिस की अब तक की जांच में यह पुष्टि नहीं हुई है कि रेप हुआ था, हालांकि, पीड़ित परिवार के सदस्यों का कहना है कि रेप हुआ था। इन परिस्थितियों में, न्याय और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए, यह अत्यंत आवश्यक है कि इस जांच को पूरी गहनता और बारीकी से किया जाए। सच का पता लगाने के लिए, मैंने गृह मंत्री सम्राट चौधरी से बात की और उन्होंने इस मामले में CID जांच को अपनी मंजूरी दे दी है। हम न्याय और पीड़ित परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं, चाहे कुछ भी हो जाए।'
यह पूरी घटना छपरा के डेरनी थाना क्षेत्र से जुड़ी है, जहां 11 मार्च, 2026 की दोपहर लगभग 2:30 बजे, एक नाबालिग छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटना की सूचना मिलने पर, पुलिस शाम 4:45 बजे शीतलपट्टी गांव पहुंची, जहां छात्रा का शव उसके घर से महज 50 मीटर दूर स्थित एक कुएं के पास मिला।
घटना के 24 घंटे बाद पुलिस को दी गई लिखित शिकायत में परिजनों ने गैंगरेप और हत्या के सनसनीखेज आरोप लगाए। परिवार का दावा है कि पांच युवकों ने छात्रा का अपहरण किया, उसके साथ बेरहमी से यौन उत्पीड़न किया और फिर उसे घसीटते हुए ले जाकर कुएं में फेंक दिया। हालांकि, सोनपुर के ASP प्रितेश कुमार के अनुसार, अब तक मिली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं हुई है,और मौत की वजह कुएं में डूबना बताई गई है। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी और मृतक पहले से एक-दूसरे को जानते थे और इंस्टाग्राम के जरिए संपर्क में थे।
इस मामले में, CID कई पहलुओं की जांच करेगी। उदाहरण के लिए, फोरेंसिक सबूतों (FSL) का इस्तेमाल यह पता लगाने के लिए किया जाएगा कि क्या छात्रा के शरीर पर या घटनास्थल पर किसी तरह की हाथापाई के निशान थे। DNA सैंपल की गहन जांच की जाएगी। आरोपी और छात्रा, दोनों के मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का मिलान किया जाएगा ताकि घटना के समय घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी की पुष्टि हो सके। CID इस बात की भी जांच करेगी कि क्या स्थानीय पुलिस की जांच में कोई लापरवाही हुई थी या क्या सबूतों को दबाने की कोई कोशिश की गई थी।
Updated on:
17 Mar 2026 07:00 pm
Published on:
17 Mar 2026 07:00 pm
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