पटना

Bihar politics: RLM में खटपट खत्म? उपेंद्र कुशवाहा ने नाराज राजपूत विधायक को सौंपी बिहार की कमान

Bihar Politics: राष्ट्रीय लोक मोर्चा में नाराजगी की खबरों के बीच उपेन्द्र कुशवाहा ने बड़ा फैसला लिया है। कुशवाहा ने विधायक आलोक कुमार सिंह को बिहार का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। 

2 min read
Jan 30, 2026
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा। (Photo-IANS)

Bihar Politics: राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में नाराज विधायकों और पदाधिकारियों के बारे में चल रही चर्चाओं के बीच, उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी की बिहार इकाई का पुनर्गठन किया है और दिनारा के विधायक आलोक कुमार सिंह को बिहार का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस कदम को RLM में फूट को रोकने और संगठन में नई जान फूंकने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

ये भी पढ़ें

दरवाजे पर पिता लगाता था ताला, अंदर बेटा करता था रेप… किशोरी को अगवा कर 6 दिनों तक की दरिंदगी

बड़ा संगठनात्मक फेरबदल

शुक्रवार को पटना में उपेंद्र कुशवाहा ने नई प्रदेश टीम की घोषणा की। आलोक कुमार सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के साथ-साथ प्रशांत पंकज और सुभाष चंद्रवंशी को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। हिमांशु पटेल को प्रधान महासचिव बनाया गया है। मदन चौधरी, जो पहले प्रदेश अध्यक्ष थे, उन्हें संगठन का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है।

पार्टी में असंतोष की खबरों पर भी दिया जवाब

इस दौरान पार्टी विधायकों में कथित असंतोष के बारे में पूछे जाने पर, उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी में किसी भी तरह की नाराजगी से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी खबरों के बारे में सिर्फ मीडिया से पता चलता है। वहीं, विधायक रामेश्वर महतो की गैरमौजूदगी के बारे में कुशवाहा ने कहा कि यह कोई विधायक दल की बैठक नहीं थी, इसलिए सभी विधायकों की मौजूदगी जरूरी नहीं थी।

नए प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार सिंह ने भी असंतोष की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी पूरी तरह से एकजुट है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि नई संगठनात्मक संरचना के साथ, RLM बिहार की राजनीति में खुद को मज़बूती से फिर से स्थापित कर पाएगा।

आलोक सिंह की नाराजगी की थी चर्चा

गौरतलब है कि आलोक सिंह उन विधायकों में से थे जिनके बारे में पार्टी नेतृत्व से नाराजगी की चर्चा चल रही थी। नवंबर में बिहार में नई NDA सरकार बनने के बाद RLM में असंतोष बढ़ गया था, खासकर उपेंद्र कुशवाहा के बेटे को मंत्री बनाए जाने के बाद। इसके बाद, कई पदाधिकारियों ने पार्टी छोड़ दी और संगठनात्मक संकट गहरा गया।

RLM में चल रही खटपट की चर्चा के बीच पार्टी के तीन विधायक आलोक सिंह, माधव आनंद और रामेश्वर महतो की भाजपा नेताओं के साथ मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आईं थी। इससे राजनीतिक गलियारों में RLM में संभावित फूट को लेकर अटकलें तेज हो गईं थी।

जाति संतुलन बनाने की कोशिश

माना जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा का आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का फैसला न केवल संगठनात्मक है, बल्कि इसका मकसद जाति संतुलन साधना भी है। उपेंद्र कुशवाहा खुद कुशवाहा समुदाय से आते हैं और उनकी राजनीति लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) समीकरण पर केंद्रित रही है, जबकि आलोक सिंह राजपूत समुदाय से हैं। इसलिए, इसे शाहाबाद क्षेत्र में और ऊंची जाति के वोट बैंक के बीच समर्थन को मजबूत करने की एक रणनीतिक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

ये भी पढ़ें

ट्रेन में यात्रा करते हुए जीतन राम मांझी ने देखी बिहारियों की दुर्दशा! बजट से पहले कर दी बड़ी मांग

Updated on:
30 Jan 2026 03:32 pm
Published on:
30 Jan 2026 03:15 pm
Also Read
View All

अगली खबर