UGC New Rules: मनीष कश्यप ने नए UGC नियमों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इन नियमों को 'काला कानून' बताया और दावा किया है कि इनसे यूनिवर्सिटी कैंपस में भेदभाव बढ़ेगा और ऊंची जाति की छात्राओं को झूठे कानूनी मामलों में फंसाया जा सकता है।
UGC New Rules: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए समानता नियमों (Equity Rules 2026) का देश भर में विरोध हो रहा है। खासकर सवर्ण वर्ग के लोग इस नियम का विरोध कर रहे हैं। इसे लेकर बिहार की सियासत और शैक्षणिक माहौल में भी बहस तेज हो गई है। जनसुराज नेता और चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप ने भी इन नियमों को लेकर केंद्र सरकार और यूजीसी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे खुलकर 'काला कानून' बताते हुए दावा किया कि यह नियम छात्रों के बीच भेदभाव बढ़ाएगा और खासतौर पर सवर्ण वर्ग की छात्राओं के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
मनीष कश्यप ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि यूजीसी का नया नियम बेहद खतरनाक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “मान लीजिए कोई सवर्ण की लड़की है। किसी लड़के ने उसे प्रपोज किया और उसने ‘ना’ बोल दिया। अगर वही लड़का जाकर केस कर दे, तो लड़की का एकेडमिक करियर तो खत्म होगा ही, साथ ही उसे 3 से 10 साल तक जेल भी जाना पड़ सकता है।” उन्होंने दावा किया कि इस तरह का कानून शिक्षा संस्थानों को डर और असुरक्षा के माहौल में धकेल देगा।
मनीष कश्यप ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जो नया कानून लाया गया है, वह छात्रों को जोड़ने की बजाय उन्हें आपस में बांटने का काम करेगा। उन्होंने कहा, “एक काला कानून लाया गया है। अगर आपको इसके बारे में पता नहीं है तो आप छात्र ही नहीं हैं। यूनिवर्सिटी में अब बच्चों को बांटा जाएगा, भेदभाव किया जाएगा।” उनका आरोप है कि यह नियम शिक्षा के मूल उद्देश्य के खिलाफ है और इससे कैंपस में आपसी अविश्वास और टकराव बढ़ेगा।
जनसुराज नेता ने जोर देकर कहा कि इस कानून का सबसे बड़ा नुकसान छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को होगा।
उनके मुताबिक, “हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि भारत की कम से कम 100 यूनिवर्सिटीज दुनिया की टॉप 500 यूनिवर्सिटीज में आएं। लेकिन अगर हमारी यूनिवर्सिटीज को सबसे ज्यादा भेदभाव वाली यूनिवर्सिटी के रूप में जाना गया, तो यह देश के लिए शर्मनाक होगा।” उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने एकेडमिक करियर पर फोकस करें, लेकिन जहां जरूरत हो वहां इस कानून का विरोध भी करें।
मनीष कश्यप ने साफ कहा कि यह कानून सही है या गलत, इसका फैसला छात्रों और समाज को करना है। उन्होंने कहा, “मेरी नजर में यह कानून गलत है। अगर आपकी नजर में भी गलत है, तो इसका विरोध कीजिए।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि एकजुटता का मतलब किसी पर अत्याचार करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने छात्रों से एकजुट रहने की अपील की, लेकिन शांति और संवैधानिक दायरे में।
अंत में मनीष कश्यप ने NEET छात्रा मामले का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि उसमें लीपापोती की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा, “जहानाबाद की बेटी को इंसाफ भी दिलाना है। तैयार रहिएगा, क्योंकि केस को रफा-दफा करने की पूरी तैयारी हो रही है।” मनीष कश्यप ने छात्रों से सीधे संपर्क करने की अपील करते हुए कहा कि अगर कहीं भी अन्याय महसूस हो, तो वे उनसे संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनका कार्यालय पाटलिपुत्र कॉलोनी में है और वहां हमेशा मदद के लिए लोग मौजूद रहेंगे।