‘वंदे मातरम्’ को लेकर बिहार में सियासी विवाद बढ़ गया है। मौलाना महमूद मदनी के विरोध पर भाजपा ने इसे देशविरोधी बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा ने वंदे मातरम् को स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा बताया।
राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर बिहार में सियासी माहौल गरमा गया है। जमीयत-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी द्वारा इसके विरोध किए जाने पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने वंदे मातरम के विरोध को देशविरोधी बताया है।
संजीव कुमार मिश्र ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ भारत का राष्ट्रीय गीत है और किसी भी भारतवासी को इसका विरोध नहीं करना चाहिए। गौरतलब है कि मौलाना मदनी ने वंदे मातरम को इस्लाम की धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ बताया था। इससे पहले बिहार AIMIM प्रमुख अख्तरुल ईमान भी इसका विरोध जता चुके हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने मौलाना मदनी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वंदे मातरम के खिलाफ बार-बार दिए जा रहे उनके बयान यह दर्शाते हैं कि वे मानसिक रूप से अस्वस्थ हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम’ आजादी की सबसे बुलंद आवाज थी। भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और अशफाक उल्ला खान जैसे वीरों ने ‘वंदे मातरम’ के नारों के साथ देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।
बिहार सरकार द्वारा सभी सरकारी कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों (स्कूल-कॉलेजों) में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य किए जाने के फैसले का AIMIM ने पहले ही कड़ा विरोध जताया था। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने पत्रकारों से बातचीत में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा था कि राज्य सरकार को कोई भी निर्णय लेने से पहले संवैधानिक पहलुओं का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का सम्मान करती है, लेकिन यह उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं है। इसी कारण AIMIM इस फैसले के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी।
अख्तरुल ईमान ने कहा कि “हम लोग एक ही ईश्वर को मानते हैं और मूर्ति पूजा नहीं करते। ऐसे में ‘वंदे मातरम्’ का गायन हमारी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है, इसलिए हम इसका विरोध करेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि यह फैसला सेकुलरिज्म की भावना के खिलाफ है और सरकार को सभी समुदायों की आस्था का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार अपने इस फैसले पर रोक लगाए। इसके लिए AIMIM मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संबंधित मंत्रालय को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्ति दर्ज कराएगी। अख्तरुल ईमान ने बिहार सरकार पर उर्दू भाषा की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया।