राज्यसभा के लिए 26 फरवरी से नामांकन शुरू होगा। इससे पहले एनडीए घटक के दावे से बिहार में सियासी तापमान बढ़ गया है। सूत्रों का कहना है कि इससे पहले 25 फरवरी को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बिहार दौरा काफी अहम माना जा रहा है।
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर एनडीए में तकरार बढ़ गया है। उपेंद्र कुशवाहा के बाद केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी एक सीट को लेकर दावा किया है। पटना में पत्रकारों से बात करते हुए जीतन राम मांझी ने कहा कि राज्यसभा की एक सीट के लिए उनसे वादा किया गया था। इससे पहले उपेंद्र कुशवाहा ने भी दावा किया है कि बीजेपी की ओर से उनको एक सीट देने का वादा किया गया था। इसके साथ ही बिहार में सियासी तापमान बढ़ गया है। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि 25 फरवरी को अमित शाह इसपर एनडीए गठबंधन के घटक दलों के साथ बातचीत कर अन्तिम मुहर लगा सकते हैं। 25 फरवरी को अमित शाह बिहार आ रहे हैं। 26 फरवरी से राज्यसभा के लिए नामांकन शुरू हो रहा है।
9 अप्रैल को राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही है। पांच में से चार सीट पर एनडीए का कब्जा पक्का माना जा रहा है। एक सीट पर महागठबंधन और एनडीए के बीच चुनाव होने की संभावना है। एनडीए को पांचवा सीट पर अपना कब्जा के लिए तीन विधायकों की जरूरत है। वहीं महागठबंधन को 6 विधायकों की जरूरत है। महागठबंधन की ओर से प्रत्याशी खाड़ा होने पर चुनाव की संभावना बन सकती है। इस बीच बिहार एनडीए में इसको लेकर खुलकर बयानबाजी शुरू हो गई है। एनडीए में शामिल घटक दल इसको लेकर अपने- अपने स्तर से दावा ठोंक रहे हैं।
जीतन राम मांझी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हम गठबंधन से अपने लिए मांगे नहीं हैं। "हमें कहा गया था कि आपको दो लोकसभा और एक राज्यसभा की सीट दी जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि मुझे नहीं लगता कि हमारा नेतृत्व अपनी बात से मुकर जाएगा। मैं अपने नेतृत्व की बात पर अंतिम समय तक प्रतिक्षा करेंगे। लेकिन अपने लिए मांग नहीं करेंगे, देखते हैं कि वे देते हैं या नहीं..."
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी (एआईएमआईएम) के राज्यसभा चुनाव में एंट्री से पांचवीं सीट पर चुनाव रोचक हो गया है। दरअसल, एआईएमआईएम पांचवा सीट पर अपना उम्मीदवार देना चाहती है। एआईएमआईएम का कहना है कि महागठबंधन उसका समर्थन करें। इधर, आरजेडी हिना शहाब (शहाबुद्दीन की पत्नी) के नाम एआईएमआईएम से समर्थन मांग रही है। लेकिन, इसके लिए एआईएमआईएम तैयार नहीं दिख रहा। इसकी वजह से मुकाबला रोचक हो गया है। महागठबंधन को एक सीट जीतने के लिए एआईएमआईएम के पांच और बसपा के एक विधायकों के समर्थन की जरूरत है। लेकिन,एआईएमआईएम के इंकार के बाद यह मामला फंस गया है।