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क्या आपका दिल भी तेज धड़कने लगता है? न करें इग्नोर… जानें ARRHYTHMIA की पूरी कहानी

Arrythmia Symptoms in Hindi: दिल की अनियमित धड़कन ऐक ऐसी स्थिति है, जब दिल बहुत तेज या फिर धीमा यानी अनियमित गति से धड़कने लगता है। यह सामान्य धड़कन की गड़बड़ी से लेकर अचानक कार्डियक अरेस्ट तक का कारण बन सकती है। patrika.com की इस खास रिपोर्ट में जानिए Arrhythmia क्या है? इसके कारण, लक्षण और जोखिम भी। जानिए कब जाएं डॉक्टर के पास
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Jul 22, 2026
Arrhythmia Symptoms in hindi
Arrhythmia Symptoms treatment causes in hindi: क्या होता है एरिथमिया? (AI Creative)

Arrythmia Symptoms in Hindi: क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ या होता है कि अचानक दिल की धड़कनें बहुत तेज महसूस होने लगी हों या फिर कुछ पल के लिए ऐसा लगे कि धड़कनें थम सी रही हैं। और कुछ ऐसा जैसे धड़कनें उलझ सी गई हैं? और आपको लगता है कि शायद अचानक घबराहट हुई या फिर आप इसे गैस या तनाव के कारण होने वाली परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह Arrhythmia (एरिथमिया) के कारण भी हो सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जो सामान्य हो तो कुछ ऐसा ही महसूस कराती है जैसा आप करते हैं। लेकिन गंभीर स्थिति में स्ट्रोक, हार्ट फेल्योर यानी दिल का कमजोर होना या अचानक कार्डियक डेथ तक का कारण बन सकती है। विश्वभर में करोड़ों लोग किसी न किसी प्रकार की एरिथमिया से प्रभावित हैं। पहले इसे आमतौर पर बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब डॉक्टरों के अनुसार युवा और कामकाजी आबादी में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। बदलती जीवनशैली, तनाव, नींद की कमी, मोटापा, मधुमेह और बढ़ती स्क्रीन-लाइफ इस बदलाव के बड़े कारण माने जा रहे हैं।

patrika.com ने AIIMS Bhopal के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग के असिस्टेंड प्रोफेसर डॉ. विक्रम वट्टी से की बात और जाना क्या है Arrhythmia? क्या हैं लक्षण और क्या है इसका इलाज?

क्या आप जानते हैं दिल का अपना इलेक्ट्रिक सिस्टम होता है?

आप अब तक दिल को केवल खून पंप करने वाली मांसपेशी समझते रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके भीतर एक नेचुरल रूप से एक इलेक्ट्रिक सिस्टम भी काम करता है। यही वो सिस्टम है जो दिल की हर धड़कन को नियंत्रित करते हुए उसे लयबद्ध बनाए रखता है। लब-डब-लब-डब की आवाज के साथ एक लय में चलते हुए दिल एक मिनट में 60-100 बार तक धड़कता है। और हर धड़कन एक छोटे-से विद्युत संकेत (Electrical Impulse) से शुरू होती है। यह संकेत दिल के दाहिने ऊपरी हिस्से में स्थित एक एसए नोड (Sinoatrial Node) से निकलता है। यही कारण है कि इसे दिल का प्राकृतिक पेसमेकर कहा जाता है।

Do not Ignore these symptoms: एरिथमिया के लक्षण, भूलकर भी न करें इग्नोर। (AI Creation)

यह संकेत पहले दोनों एट्रिया यानी ऊपरी कक्षों तक पहुंचता है। इसके बाद फिर AV Node से होकर विशेष विद्युत मार्गों के माध्यम से दोनों वेंट्रिकल यानी निचले कक्षों तक जाता है। इसी क्रमबद्ध प्रक्रिया से दिल लयबद्ध तरीके से सिकुड़ता है और फैलता है। इसी प्रक्रिया को दोहराता हुआ वह पूरे शरीर में रक्त पहुंचाता रहता है। लेकिन यदि इस विद्युत मार्ग में कहीं भी गड़बड़ी आ जाए, जैसे संकेत बहुत तेज, बहुत धीमे या अनियमित बनने लगें, तो दिल की सामान्य लय बिगड़ने लगती है। इसी स्थिति को चिकित्सा भाषा में एरिथमिया कहा जाता है।

जानें क्या है एरिथमिया (Arrhythmia) और यह कितने प्रकार की होती ह?

Arrhythmia का मतलब है कोई बीमारी नहीं है, बल्कि दिल की धड़कनों का सामान्य ताल से बाहर हो जाना है। इसमें तीन स्थितियां हो सकती हैं-

  1. एट्रियल फिब्रिलेशन
  2. ब्रैडीकार्डिया
  3. टेकीकार्डिया

दुनिया में कितनी बड़ी समस्या है Arrhythmia?

  • यह केवल एक बीमारी नहीं है, बल्कि बढ़ती वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती है।
  • यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी (ESC) के मुताबिक (Atrial Fibrillation) असामान्य धड़कन यानी धड़कनें तेज होना, दुनिया की सबसे सामान्य और लगातार बनी रहने वाली एरिथमिया है।
  • वैज्ञानिक शोधों के अनुसार दुनिया में करीब 4 से 6 करोड़ लोग Atrial Fibrillation से प्रभावित हैं और उम्र बढ़ने के साथ इसके मरीज लगातार बढ़ रहे हैं।
  • विश्व स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि 2050 तक वृद्ध आबादी बढ़ने के कारण Arrhythmia का बोझ कई देशों में दोगुना तक हो सकता है।
Arrhythmia in youth: भारत में बुजुर्गों समेत अब युवाओं में भी यह स्थिति तेजी से सामने आ रही है। (AI Creative)

भारत में स्थिति क्यों चिंताजनक है?

  • भारत में सही आंकड़े सीमित हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अब ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
  • इंडियन हार्ट रिद्म सोसायटी (IHRS) और भारतीय हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार भारत में लाखों लोग किसी न किसी प्रकार की Arrhythmia से प्रभावित हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मरीजों का कभी निदान ही नहीं हो पाता।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में ECG और Electrophysiology सुविधाओं की कमी के कारण ज्यादातर मरीज वर्षों तक बिना पहचान के ही रह जाते हैं।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में बढ़ते मधुमेह(डायबीटीज), उच्च रक्तचाप (बीपी), मोटापा और हृदय रोग से एरिथमिया के मामलों में तेजी आई है।

ऐतिहासिक और सत्यापित मामले जिन्होंने दुनिया का ध्यान खींचा

कुछ चर्चित मामलों ने दुनिया को यह समझाया कि Arrhythmia केवल बुजुर्गों की नहीं, बल्कि हर उम्र के लोगों की समस्या हो सकती है।

  • अमेरिकी अभिनेता जॉन रिटर (John Ritter) की अचानक मृत्यु ने हृदय रोगों को लेकर वैश्विक चर्चा तेज की। हालांकि उनकी मृत्यु का मुख्य कारण महाधमनी (Aortic Dissection) था, लेकिन इस घटना ने अचानक होने वाली हार्ट इमरजेंसी की स्थितियों के प्रति लोगों को जागरूक किया।
  • फुटबॉल खिलाड़ी क्रिस्टियन एरिक्सन (Christian Eriksen) यूरो 2020 मैच के दौरान मैदान पर अचानक गिर पड़े। उन्हें तत्काल CPR और Defibrillation दिया गया, जिससे उनकी जान बच गई। बाद में उनके शरीर में Implantable Cardioverter Defibrillator (ICD) लगाया गया। यह घटना दुनिया भर में यह संदेश देने वाली बनी कि समय पर CPR और डिफिब्रिलेशन जीवन बचा सकते हैं।
Arrhythmia who is at higher risk: एरिथमिया किनके लिए बड़ा खतरा। (AI Creative)

क्या Arrhythmia पूरी तरह ठीक हो सकती है?

इस सवाल के जवाब पर डॉ. विक्रम वट्टी का कहना है-

  • यह Arrhythmia के प्रकार पर निर्भर करता है।
  • कुछ मरीज केवल जीवनशैली में बदलाव और दवाओं से सामान्य जीवन जीते हैं।
  • कुछ मरीजों में Catheter Ablation स्थायी समाधान दे सकती है। यह एक मिनिमली इनवेसिव (कम चीर-फाड़ वाली) प्रोसीजर है, जिसका इस्तेमाल कुछ तरह के Arrhythmia (जैसे Atrial Fibrillation, SVT, Atrial Flutter, कुछ Ventricular Tachycardia) के इलाज के लिए किया जाता है।
  • गंभीर मामलों में Pacemaker या ICD जैसे उपकरण जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ऐसे समझें एरिथमिया के प्रकार

एट्रियल फिब्रिलेशन- Atrial Fibrillation (AF)

    • यह दुनिया में सबसे सामान्य गंभीर Arrhythmia है।
    • इसमें दिल के ऊपरी कक्ष बहुत तेजी से और अनियमित तरीके से कांपने लगते हैं।
    • परिणामस्वरूप रक्त पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाता और थक्का बनने का खतरा बढ़ जाता है।
    • यही थक्का मस्तिष्क तक पहुंचकर स्ट्रोक का कारण बन सकता है।

    ब्रैडीकार्डिया (Bradycardia)

      • इसमें दिल की धड़कन प्रति मिनट 60 से कम हो जाती है।
      • कुछ खिलाड़ियों में यह सामान्य हो सकती है, लेकिन यदि इसके साथ चक्कर, बेहोशी या कमजोरी हो तो यह बीमारी का संकेत हो सकता है।

      टेकीकार्डिया (Tachycardia)

        • जब दिल आराम की स्थिति में भी प्रति मिनट 100 से अधिक धड़कने लगे।
        • यह कई कारणों से हो सकती है—तनाव, बुखार, एनीमिया, हार्ट डिजीज या विद्युत प्रणाली की खराबी।

        सुप्रावेंट्रायकुलर टैकीकार्डिया Supraventricular Tachycardia (SVT)

          • इसमें दिल अचानक बहुत तेज धड़कने लगता है।
          • धड़कन 150 से 250 प्रति मिनट तक पहुंच सकती है।
          • कई मरीजों को अचानक धड़कन बढ़ने के बाद सब कुछ सामान्य हो जाता है।

          वेंटिकुलर टेकीकार्डिया Ventricular Tachycardia (VT)

            • यह अधिक गंभीर स्थिति है।
            • यदि समय पर इलाज न मिले तो यह वेंटिकुलर फिब्रिलेशन (Ventricular Fibrillation) में बदल सकती है।
            • धड़कनें कभी बढ़ी हुई या कभी तेज यानी अनियमित सी हो जाएं, इसे इर्रेग्युलर रिद्म (Irregular Rhythm) कहा जाता है।
            • ध्यान देना होगा कि हर Arrhythmia खतरनाक नहीं होती। कई लोगों में यह बिना किसी लक्षण के भी रहती है। लेकिन इसके कुछ प्रकार ऐसे भी हैं, जिनमें कुछ ही मिनटों में जान का खतरा पैदा हो सकता है।

            Arrhythmia है 100 साल से ज्यादा पुरानी खोज

            आज डॉक्टर मोबाइल से ECG देखकर Arrhythmia पकड़ लेते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस बीमारी की पहचान का सफर एक सदी से भी ज्यादा पुराना है। उन्नीसवीं सदी के अंत तक डॉक्टर केवल नाड़ी देखकर धड़कनों की गड़बड़ी का अनुमान लगाते थे। वर्ष 1903 में डच वैज्ञानिक विलेम आइंथोवन (Willem Einthoven) ने पहला व्यावहारिक Electrocardiogram (ECG) विकसित किया। इस खोज ने हृदय रोगों की पहचान में क्रांति ला दी। बाद में उन्हें इस कार्य के लिए 1924 का नोबेल पुरस्कार भी मिला। ECG आने के बाद पहली बार यह स्पष्ट हुआ कि कई लोगों की धड़कनें अलग-अलग कारणों से बिगड़ती हैं और सभी मरीजों की समस्या एक जैसी नहीं होती। इसके बाद 20वीं सदी में कार्डियोलॉजी तेजी से विकसित हुई। इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी (Electrophysiology) नाम की नई शाखा अस्तित्व में आई, जिसमें दिल की विद्युत प्रणाली का विस्तृत अध्ययन शुरू हुआ।

            Updated on:
            22 Jul 2026 04:10 pm
            Published on:
            22 Jul 2026 04:10 pm