Road Accident Deaths: सड़क पर दुघर्टनाओं में गंभीर रूप से जोखिम व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाने वाले को गुड समैरिटन (अब राह-वीर योजना) के तहत सम्मानित किया जाता है। हाल ही में एक सूची प्रकाशित की गई जिसमें यह बताया गया है कि अलग-अलग राज्यों में लोग गुड समैरिटन के […]
Road Accident Deaths: सड़क पर दुघर्टनाओं में गंभीर रूप से जोखिम व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाने वाले को गुड समैरिटन (अब राह-वीर योजना) के तहत सम्मानित किया जाता है। हाल ही में एक सूची प्रकाशित की गई जिसमें यह बताया गया है कि अलग-अलग राज्यों में लोग गुड समैरिटन के तहत कितने लोग सम्मानित किए गए हैं। आइए गुड समरैटियन से जानते हैं कि इस योजना की क्या जमीनी हकीकत क्या है?
पहले गुड समैरिटन को केवल 5,000 रुपये मिलते थे, लेकिन जनवरी 2025 में इस राशि को बढ़ा दिया गया। केंद्र सरकार वर्तमान में लाभार्थियों को 25,000 रुपये प्रदान करती है। हालांकि कुछ लोगों का दावा है कि प्रमाण पत्र तो मिल जाता है पर राशि नहीं मिलती है।
उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के निवासी प्रमोद ओझा को 2024 और 2025 में गुड समैरिटन के तौर पर नाम आया है। दावा करते हैं कि उन्होंने अबतक 1,000 से ज्यादा घायलों को अस्पताल पहुंचाया है। यही वजह है कि पूर्वांचल के लोग उन्हें 'हाईवे देवदूत' कहकर बुलाते हैं।
इस सवाल के जवाब में उन्होंने पत्रिका से बातचीत में कहा कि 1990 में मेरे बाबा की मौत सड़क दुघर्टना में चिकित्सा के अभाव में हो गई। इस घटना ने मुझे झकझोर रख दिया और मैंने संकल्प लिया कि अब मैं सड़क दुघर्टना में हुए घायलों की जान बचाऊंगा। मैंने कॉलेज में बी.ए. और एम. ए. करने के दौरान भी घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने का काम किया लेकिन वर्ष 2026 से इस काम को मैंने मिशन के तौर पर लिया। अब आलम यह है कि सड़क दुघर्टना के बाद लोग पुलिस और एम्बुलेंस से पहले मुझे फोन करने लगे हैं। मैंने कई राहवीर तैयार किए हैं और अब कॉल आने के बाद कुछ ही मिनटों में घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया जाता है। उन्होंने बताया कि घायलों को पहुंचाने के लिए वह खुद की कार को इस्तेमाल में लाते हैं।
उन्होंने बताया कि गुड समैरिटन की लिस्ट में नाम आता है तो अच्छा लगता है। यह एक सम्मान है। पहले इसकी राशि 5 हजार रुपये थी लेकिन अब इसकी राशि बढ़ाकर 25 हजार कर दी गई है। मेरा नाम दो बार गुड समैरिटन में आ चुका है लेकिन अभी तक कोई राशि नहीं मिली है। अबतक राशि नहीं मिलने के पीछे क्या वजह रही? इस सवाल के जवाब में प्रमोद कहते हैं कि शायद अभी तक किसी गुड समरैटियन को राशि नहीं मिली है। पूर्वांचल में पांच जनपद से गुड समैरिटन का नाम सूची में आया है, लेकिन राशि किसी को नहीं मिली है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालयके अनुसार, गुड समैरिटन योजना अब राह-वीर योजना के तहत अब तक 468 गुड समैरिटन को सम्मानित किया गया है।
हेलमेटमैन के नाम से देशभर में मशहूर राघवेंद्र ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि गुड समैरिटन में जो राज्य शीर्ष पर है, उसे भी केंद्र सरकार को अवॉर्ड देना चाहिए। मैं उत्तराखंड का रोड सेफ्टी के मामले में ब्रांड एम्बेस्डर रहा। वैसे मैं बिहार के कैमूर जिले से आता हूं। बिहार दूसरे नंबर पर रहा। इस सूची में मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात भी शामिल है। मुझे गुड समैरिटन की लिस्ट में राज्यों की सूची देखकर बहुत अच्छा लग रहा है। इस सूची में उन राज्यों को भी शामिल होना चाहिए, जो रोड सेफ्टी को लेकर बड़े-बड़े दावे करते हैं।
वह चिंता जताते हुए कहते हैं कि दुर्भाग्य से देश के कई राज्य हैं, जहां अस्पताल में गुड समैरिटन के आवेदन फॉर्म तक नहीं होते हैं। यहां तक कि उन राज्यों को गुड समैरिटन के बारे में जानकारियां तक नहीं हैं। जिलों के अधिकारी गुड समरैटिन पर कम फोकस रखते हैं। गुड समरैटिन की सूची मीडिया में प्रकाशित होने के बाद जिला के स्तर पर अधिकारी जागरूकता का काम फैलाने में अपनी भूमिका जरूर बढ़ाएंगे।
उन्होंने कहा, 'केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली 25 हजार रुपये की राशि गुड समैरिटन को मिलना सुनिश्चत हो और उसका प्रचार सोशल मीडिया के जरिये हो तो इससे गुड समरैटिन की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होगी। गुड समैरिटन की संख्या बढ़ाने में राज्य और जिले स्तर पर जोर देना होगा तभी लोग सड़कों पर देवदूत बनकर सामने आएंगे और सड़कों पर होने वाले हादसों में ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाने में मदद मिलेगी।'
राघवेंद्र ने कहा कि गुड समैरिटन को पहले पांच हजार रुपये की राशि देने की बात तय थी। वह राशि गुड समैरिटन को नहीं मिल पाती थी। अब इसे बढ़ाकर 25 हजार कर दिया गया है। यह बहुत अच्छी बात है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गुड समैरिटन को सर्टिफिकेट के साथ तय राशि 25 हजार रुपये मिले। यह राशि मिलना शुरू हो जाएगी तो गुड समैरिटन की फौज बढ़ती जाएगी।
उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि गुड समैरिटन के पोस्टर स्कूल, कॉलेज के बाहर लगाए जाएं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों में जागरूकता पैदा हो और इनकी संख्या में बढ़ोतरी हो। इससे सड़क सुरक्षा को लेकर लोगों के बीच समन्वय बनने में मदद मिलेगी। केंद्र और राज्य सरकार की गुड समरैटिन की योजना भी सफलता के नए मुकाम हासिल कर पाएगी। इससे ज्यादा से ज्यादा घायल और गंभीर घायलों को तत्काल चिकित्सकीय सुविधा मिल पाएगी और उनकी जान बचाने में सहायता मिल पाएगी।