CG Road Safety: भिलाई इस्पात संयंत्र की टाउनशिप के बाहर आवारा मवेशियों से होने वाले सड़क हादसों को कम करने के लिए मोहम्मद रफी ने अनोखी पहल शुरू की।
भिलाई इस्पात संयंत्र की टाउनशिप अपने सुव्यवस्थित प्रबंधन के लिए जानी जाती है, लेकिन इसके बाहर की सड़कों पर एक ऐसी समस्या लंबे समय से बनी हुई है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है—आवारा मवेशी। दिन में तो ये सामान्य लगते हैं, लेकिन रात होते ही यही मवेशी सड़क हादसों का बड़ा कारण बन जाते हैं, खासकर दोपहिया चालकों के लिए।
इसी चुनौती को समझते हुए मोहम्मद रफी ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो न केवल अनोखा है बल्कि बेहद प्रभावी भी साबित हो रहा है। उन्होंने सितंबर 2025 से मवेशियों को रिफ्लेक्टिव बेल्ट पहनाने का अभियान शुरू किया।
रात के समय जब किसी वाहन की हेडलाइट इन मवेशियों पर पड़ती है, तो बेल्ट चमक उठते हैं। यह चमक ड्राइवर को दूर से ही संकेत दे देती है कि आगे कोई जानवर मौजूद है। एक छोटा-सा उपाय, लेकिन इसका असर इतना बड़ा है कि कई संभावित हादसों को टाला जा सकता है।
मोहम्मद रफी का तरीका भी उतना ही दिलचस्प है जितनी उनकी सोच। वे मवेशियों को पकड़ने के लिए किसी तरह की जबरदस्ती नहीं करते। ब्रेड और हरी सब्जियों की मदद से उन्हें पास बुलाते हैं और फिर आराम से बेल्ट पहनाते हैं।
हालांकि, इस सकारात्मक पहल को कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। कई बार असामाजिक तत्व इन बेल्ट को हटा देते हैं, जिससे अभियान की गति प्रभावित होती है। इसके बावजूद रफी लगातार अपने मिशन में जुटे हुए हैं।
अब तक 100 से ज्यादा मवेशियों को रिफ्लेक्टिव बेल्ट पहनाए जा चुके हैं। यह संख्या भले ही पूरी समस्या के सामने छोटी लगे, लेकिन इसका संदेश बहुत बड़ा है—अगर पहल सच्ची हो, तो बदलाव संभव है।
यह पहल सिर्फ भिलाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। देश के कई शहरों में आवारा मवेशी सड़क हादसों का कारण बनते हैं। ऐसे में यह मॉडल एक सरल, सस्ता और प्रभावी समाधान बन सकता है। मोहम्मद रफी की यह पहल सिर्फ एक इंजीनियर का प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और इंसानियत की मिसाल है। यह दिखाती है कि बदलाव के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि एक मजबूत इरादे की जरूरत होती है।