
Nuclear Project : अडानी पावर अपने न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के लिए मध्यप्रदेश में संभावनाएं तलाश रहा है। कंपनी ने हाल ही जेपी एसोसिएट्स को टेकओवर किया है। इसकी होल्डिंग कंपनी जेपी थर्मल पर न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के लिए गौर किया जा रहा है। इसमें बीना (सागर) और निगरी (सिंगरौली) के प्रोजेक्ट हैं।
दरअसल कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता को 2035 तक बढ़ाकर तीन गुना करना चाहती है। इस तरह वह निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी पावर जेनरेटिंग कंपनी हो जाएगी। बीना और निगरी इन दोनों स्थानों पर व्यवहार्यता अध्ययन (फिजिबिलिटी स्टडी) तीव्रता से चल रहे हैं।
अडानी पावर के सीइओ की तरफ से इस संबंध में संकेत दिए गए हैं। कॉरपोरेट मीटिंग के दौरान उन्होंने अडानी पावर कंपनी के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट और इसके लिए मध्यप्रदेश के बीना व निगरी पर गौर करने की बात कही है। कंपनी अभी अपने पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए ओडिशा और मध्य प्रदेश में दो संभावित स्थानों का मूल्यांकन कर रही है। अडानी पॉवर के सीइओ शेरसिंह खयाली की तरफ से जो बात सामने आई है, उसपर कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बहरहाल, कंपनी ने इतना जरूर स्पष्ट किया है कि संभावनाओं पर गौर किया जा रहा है।
फिलहाल सार्वजनिक क्षेत्र की दो कंपनी परमाणु ऊर्जा उत्पादन कर रही हैं। इसमें न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) वर्तमान में देश का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संचालक कंपनी है। इस कंपनी ने अकेले 30 गीगावाॅट बिजली उत्पादन की क्षमता विकसित करने की योजना बनाई है। इसी तरह, एनटीपीसी भी 30 गीगावॉट क्षमता के विकास की तैयारी में है। निजी क्षेत्र में अडानी पावर भी शामिल है, जिसकी कुल 3.2 गीगावॉट से अधिक परिचालन क्षमता का मूल्यांकन किया जा रहा है।
अडानी पावर ने वर्ष 2035 तक 10 GW (गीगावाट) परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने की महत्त्वाकांक्षी योजना बनाई है। इस तरह मौजूदा उत्पादन क्षमता को तीन गुना बढ़ाना है। ऐसे में न्यूक्लियर प्रोजेक्ट का अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए नियामक ढांचे को अंतिम रूप दिए जाने पर निर्भर करेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विश्वसनीय और स्वच्छ ऊर्जा स्रोत पर निर्भर रह सके।
भारत सरकार ने वर्ष 2035 तक देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 50 गीगावॉट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही 2047 तक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए सरकार का 100 गीगावॉट का लक्ष्य है। इस बड़े लक्ष्य को साकार करने में सार्वजनिक क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भी अहम भूमिका होगी। सार्वजनिक क्षेत्र की दो कंपनियों के साथ इसमें निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी भी आवश्यक हो जाती है।
भारत की तीसरी सबसे बड़ी पावर कंपनी के तौर पर अडानी भी परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अपनी क्षमताएं बढ़ाने की तैयारी में है। हालांकि अभी अडानी पावर कंपनी इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार की निजी क्षेत्र की भागीदारी पर नीतिगत स्पष्टता का इंतजार कर रही है। यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और सस्ती, कम कार्बन वाली बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण है।
बीना के सिरचौंपी गांव में करीब 1700 एकड़ क्षेत्र में आदित्य बिड़ला समूह (ग्रासिम) 1000 मेगावाट का ताप विद्युत संयंत्र स्थापित करने आया था। लेकिन यह परियोजना पूरी नहीं हुई। 2008 में जयप्रकाश पावर वेंचर्स ने जमीन का अधिग्रहण आदित्य बिड़ला समूह से कर लिया था। जेपी थर्मल पावर प्लांट की पहली यूनिट 250 मेगावाट 2012 में शुरू हुई थी, दूसरी यूनिट 250 मेगावाट 2013 में शुरू हुई। अभी कुल 500 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। प्लांट के शुरूआत के कुछ साल बाद बिजली के दाम सही न मिलने पर प्लांट कई माह बंद रहने से घाटा हुआ था।
सिंगरौली जिले के देवसर तहसील के निगरी गांव में स्थित जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड का कोयला आधारित बिजली संयंत्र है। इसकी दो यूनिट हैं जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 1320 मेगावाट है। पहली इकाई सितंबर 2014 और दूसरी इकाई फरवरी 2015 में चालू हुई। यह संयंत्र आधुनिक सुपरक्रिटिकल बॉयलर तकनीक पर आधारित है। यह तकनीक कम कोयले की खपत में अधिक बिजली पैदा करती है और पर्यावरण प्रदूषण (कार्बन उत्सर्जन) को कम करने में मदद करती है।