US Vs Cuba News: डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने बुधवार को क्यूबा के 94 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो (Raúl Castro) और 5 अन्य क्यूबाई नागरिकों पर अमेरिकी नागरिकों की हत्या और हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया। यह मामला 30 साल पहले क्यूबा के तट के पास दो विमानों को मार गिराए जाने से जुड़ा है। उसमें चार अमेरिकी नागरिकों की मौत हुई थी। आरोप नया है और मामला तीन दशक पुराना। आइए समझते हैं कि क्यों अमेरिका और क्यूबा के बीच अक्सर लड़ाई ठन जाती है।
US Vs Cuba Struggle reason: क्यूबा के 94 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो (Raúl Castro) पर डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने चार अमेरिका नागरिकों की हत्या का आरोप लगाया है। यह अभियोग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के प्रशासन ने तब सार्वजनिक रूप से लगाया है, जब वह क्यूबा अपना स्वतंत्रता दिवस के जश्न में डूबा हुआ है। ट्रंप प्रशासन लंबे समय से यहां की कम्युनिस्ट सरकार पर लगातार दबाव बढ़ाने में जुटा हुआ है और उसे कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
US made Murder allegation on Raúl Castro: यह आरोपपत्र ऐसे समय सार्वजनिक किया गया जब क्यूबा अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा था। क्यूबा पर इस तरह के दबाव सिर्फ ट्रंप के सरकार में आने के बाद ही नहीं लगाए जा रहे हैं, बल्कि इसका इतिहास बहुत लंबा रहा है। दरअसल, अमेरिका, क्यूबा से बार-बार उलझने की फिराक में रहता है। ऐसा क्यों है, इसको समझने से पहले यह जानते हैं कि 94 वर्षीय राउल कास्त्रो के साथ पांच लड़ाकू पायलटों पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
मियामी की संघीय अदालत में डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दायर आरोपपत्र में राउल कास्त्रो के साथ पांच लड़ाकू पायलटों को भी आरोपी बनाया गया है। उनपर 24 फरवरी 1996 को 'ब्रदर्स टू द रेस्क्यू' (Brother's to the Rescue) नामक क्यूबाई निर्वासित संगठन के दो विमानों को मार गिराने का आरोप लगाया गया है। यह संगठन समुद्र में भाग रहे क्यूबाई शरणार्थियों की मदद करता था।
इस मामले में नया मोड़ तब आया जब अभियोग में शामिल एक पूर्व क्यूबाई पायलट लुइस राउल गोंजालेज़-पार्डो रोड्रिगेज (Luis Raul Gonzalez-Pardo Rodriguez) फ्लोरिडा में रह रहा पाया गया। उसे नवंबर में इमिग्रेशन धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। हालांकि इस घटना के तुरंत बाद क्यूबा के क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो (Fidel Castro) ने विमानों को गिराने की जिम्मेदारी ली थी। उनका कहना था कि यह संगठन हवाना के ऊपर सरकार विरोधी पर्चे गिरा रहा था। नए अभियोग में कहा गया है कि राउल कास्त्रो भी जिम्मेदार थे क्योंकि वे और उनके भाई क्यूबा की सैन्य कमान में अंतिम निर्णय लेने वाले थे।
संयुक्त राष्ट्र में क्यूबा के राजदूत एर्नेस्टो सोबेरोन गुज़मान (Ernesto Soberón Guzmán) ने आरोप लगाया कि अमेरिका इस मुकदमे का इस्तेमाल क्यूबा के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का बहाना बनाने के लिए कर रहा है। उन्होंने कहा कि 'ब्रदर्स टू द रेस्क्यू' ने 25 बार क्यूबा के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया था और क्यूबा सरकार ने कई बार अमेरिका से इन उड़ानों को रोकने की मांग की थी। क्यूबा सरकार ने अमेरिकी सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए अमेरिका पर पाखंड का आरोप लगाया। क्यूबा ने कहा कि वही अमेरिका, जिसने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई कर सैकड़ों लोगों की जान ली, अब क्यूबा पर आरोप लगा रहा है।
वर्ष 2015 में राउल कास्त्रो के शासन के दौरान ही अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने क्यूबा से दशकों पुरानी दुश्मनी को भुलाकर राजनयिक संबंध फिर से बहाल करने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद से अमेरिका और क्यूबा के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ने लगा है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने क्यूबा पर ईंधन आपूर्ति को लेकर भी कड़ा दबाव बनाया है, जिससे वहां ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस निमित्ज़ (USS Nimitz - CVN 68) दक्षिणी कैरेबियन सागर में पहुंच चुका है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हाल ही में सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) के निदेशक जॉन रैटक्लिफ (John Ratcliffe) ने क्यूबा का दौरा किया था। उन्होंने क्यूबा सरकार से आर्थिक सुधार करने और रूस और चीन को खुफिया गतिविधियों के लिए क्यूबा की जमीन इस्तेमाल करने से रोकने की मांग की थी। जॉन अमेरिका के एक प्रमुख राजनेता और पूर्व राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने CIA के निदेशक के रूप में नियुक्त किया है।
अमेरिका के कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच (Todd Blanche) ने मियामी में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह कदम क्यूबा सरकार के नेताओं को उनके पुराने अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराने की दिशा में ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा, 'संयुक्त राज्य अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप अपने नागरिकों को कभी नहीं भूलेंगे।' टॉड ब्लैंच से जब पूछा गया कि क्या यह अभियोग क्यूबा के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की भूमिका तैयार कर रहा है, तो उन्होंने कहा कि इसका फैसला राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी विदेश नीति टीम करेगी। वहीं ट्रंप ने भी यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या अमेरिका सैन्य बल का इस्तेमाल कर राउल कास्त्रो को गिरफ्तार करेगा। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि राउल कास्त्रो के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया है, लेकिन संभावना कम है कि क्यूबा सरकार उन्हें अमेरिका को सौंपेगी। इसके बावजूद अधिकारियों का कहना है कि वे किसी न किसी तरह अमेरिका लाए जाएंगे।
फिदेल ने दुनिया भर के युवाओं के आइकन बन चुके क्रांतिकारी चे ग्वेरा क्यूबा के साथ मिलकर देश में तानाशाही शासन को खत्म किया। फिदेल के छोटे भाई राउल कास्त्रो ने इस क्रांति में अहम भूमिका निभाई। फिदेल ने 31 जुलाई 2006 को अपनी गंभीर बीमारी के चलते राउल को सत्ता सौंप दी थी। हालांकि 24 फरवरी 2008 को फिदेल ने आधिकारिक तौर पर पद छोड़ दिया और राउल कास्त्रो पूर्ण रूप से क्यूबा के राष्ट्रपति बने।
क्यूबा 19वीं सदी के अंत तक स्पेन का उपनिवेश था। वर्ष 1898 में हुए स्पेन और अमेरिका के बीच युद्ध में स्पेन हार गया। अमेरिका का क्यूबा पर दखल बढ़ गया। हालांकि 1902 में क्यूबा को औपचारिक तौर पर स्वतंत्रता तो मिल गई, लेकिन अमेरिका वहां ने राजनीतिक और आर्थिक हस्तक्षेप जारी रखा। अमेरिकी कंपनियों ने 'चीनी का कटोरा' कहे जाने वाले के चीनी उद्योग पर कब्जा जमा लिया। इतना ही नहीं इन अमेरिकी कंपनियों ने वहां जमीन और व्यापार पर कब्जा जमा लिया। क्यूबा की राजनीति में भी अमेरिकी दखल बना रहा। इसके चलते क्यूबा के लोगों में अमेरिका के प्रति धीरे-धीरे रोष बढ़ता चला गया।
1950 के दशक में क्यूबा पर तानाशाह फुलगेनसियो बतिस्ता (Fulgencio Batista) का शासन था, जिसे अमेरिका का समर्थन प्राप्त था। बतिस्ता 1940 से 1944 तक क्यूबा के निर्वाचित राष्ट्रपति थे, लेकिन 1952 से 1959 तक उन्होंने अमेरिका के समर्थन से तानाशाही शैली में सरकार चलाई। बतिस्ता की तानाशाही के खिलाफ 1959 में फिदेल कास्त्रो और चे ग्वेरा (Che Guevara) के नेतृत्व में क्यूबा की क्रांति हुई। बतिस्ता की सरकार गिरा दी गई थी।
फिदेल कास्त्रो ने क्रांति के बाद क्यूबा की सत्ता संभाली और शासन में आते ही अमेरिकी कंपनियों की संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण शुरू कर दिया। उन्होंने क्यूबा को समाजवादी और बाद में साम्यवादी रास्ते पर ले जाने का फैसला किया। फिदेल कास्त्रो ने जल्द ही सोवियत संघ (Soviet Union) से करीबी संबंध बना लिए। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यह शीत युद्ध का समय था। अमेरिका और सोवियत संघ विश्व दोनों महाशक्तियों के इर्द-गिर्द बंट चुका था। सोवियत संघ ने क्यूबा को आर्थिक और सैन्य मदद देना शुरू कर दिया। अमेरिका को डर था कि उसके बेहद करीब एक साम्यवादी सरकार मजबूत हो रही है। अमेरिका ने इसके जवाब में 1960 से क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने शुरू किए। दोनों देशों के बीच यही सबसे बड़ी मानी जाती है। अमेरिका पर फिदेल की सरकार गिराने से लेकर उसकी हत्या के प्रयासों के आरोप लगते रहे।
सोवियत संघ ने क्यूबा में 1962 में परमाणु मिसाइलें तैनात कर रहा था। अमेरिका को इसकी खबर लगी। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी (John F. Kennedy) ने क्यूबा की समुद्री नाकेबंदी कर दी और रूस के जहाजों को रोकने की धमकी भी दी। उस समय लगभग 13 दिनों की बयानबाजी से दुनिया को लगने लगा कि अब परमाणु युद्ध होकर रहेगा। इस घटना को क्यूबाई मिसाइल क्राइसिस (Cuban Missile Crisis) कहा जाता है। आखिरकार अमेरिका के साथ समझौता हुआ और सोवियत संघ ने मिसाइलें हटा लीं। यह घटना अमेरिका और क्यूबा के रिश्तों में स्थायी अविश्वास की नींव बन गई।