Iran-Israel Water Crises: ईरान सबसे अधिक जल संकट वाले देशों में पहले ही 11वें स्थान पर है। ऐसे में युद्ध के दौरान जल संयंत्रों पर हो रहे हमले वहां की समस्या को और गहरा कर देंगे। आइए जानते हैं कि ईरान की तरह जलवायु वाले देश इजराइल ने कैसे पानी के संकट से निजात पाई।
Iran-Israel War Water Crisis: अमेरिका और इजराइल के साथ युद्ध में डटे रहने में ईरान की कई कमजोरियां सामने आ रही हैं। उन सब में से सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक उसका 'जल तंत्र' हो सकता है। पहले से ही कई वर्षों के सूखे से जूझ रहे देश के लिए अगर जल अवसंरचना को नुकसान पहुंचता है, तो यह विनाशकारी साबित हो सकता है। ईरान के 19 बांधों में पानी लगभग खत्म हो चुका है। आइए जानते हैं कि ईरान में जल संकट इतना गंभीर कैसे हो गया है? वहीं इजरायल में पानी की कोई कमी नहीं होने वाली है। आइए जानते हैं।
पिछले सप्ताह पूर्व तेहरान की एक सड़क पर एक चमकदार आग का गोला तेज़ी से आगे बढ़ता हुआ दिखाई दिया। शुरुआत में लोगों को लगा कि यह ड्रोन हमला है। लेकिन वीडियो में कोई विस्फोट नहीं दिखाई दिया। इसके बजाय वहां आग की लंबी-लंबी लपटें दिखाई दे रही थी, जहां कभी एक पानी की नहर हुआ करती थी।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए कई पोस्टों में दिखाया गया कि तेहरान के बाहरी इलाकों में तेल डिपो पर इज़राइली हवाई हमलों के बाद ड्रेनेज चैनल जलते हुए दिखाई दे रहे हैं।
ये तस्वीरें ईरान की जल प्रणाली की भयावह स्थिति को दर्शाती हैं, जो युद्ध से पहले ही बेहद खराब हालत में थी। पिछले साल के अंत तक तेहरान तथाकथित “डे ज़ीरो” (जब शहर में पानी लगभग खत्म हो जाता है) के करीब पहुंच गया था। लगभग 90 लाख आबादी वाले इस शहर को पानी देने वाले जलाशय सूखने लगे थे।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने अमेरिका पर यह आरोप लगाया है कि उसने क़ेश्म द्वीप (फारस की खाड़ी का सबसे बड़ा द्वीप) पर स्थित एक समुद्री जल शुद्धिकरण संयंत्र पर बमबारी की। देश पहले ही गंभीर जल संकट से जूझ रहा था। इस हमले के चलते प्लांट के आसपास के 30 गांवों को पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है।” हालांकि United States सरकार ने इस हमले में अपनी किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है।
ईरान ने इसके जवाब में बहरीन में एक डिसेलिनेशन प्लांट पर बमबारी कर दी। अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध खाड़ी क्षेत्र में महत्वपूर्ण जल अवसंरचना पर बड़े पैमाने पर हमलों का रूप ले सकता है। ऐसा होने पर लाखों लोगों की पानी की आपूर्ति खतरे में पड़ सकती है। बहरीन दुनिया के सबसे अधिक जल संकट वाले देशों में सबसे टॉप पर है। वर्ल्ड रिसोर्ज इंस्टिट्यूट के अनुसार दुनिया में 20 सबसे अधिक जल संकट वाले देशों में ईरान 11वें स्थान पर आता है।
पिछले साल नवंबर में देश के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान (Masoud Pezeshkian) ने एक वीडियो जारी कर चेतावनी दी थी कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई, तो पानी की राशनिंग के बावजूद लोगों को तेहरान छोड़ना पड़ सकता है।
ईरान पहले से ही जलवायु परिवर्तन के कारण पानी से जुड़े परिणामों से निपटने में समक्ष नहीं था। ऐसे में युद्ध जैसी विभीषिका जल समस्या को और गंभीर बनाएगी। वर्ष 2020 के बाद से देश ने अपने इतिहास का सबसे गंभीर सूखा देखा है। वैज्ञानिक समूह वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (World Weather Attribution) के अनुसार, बहुत कम बारिश वाले साल अब औद्योगिकीकरण के चलते पहले की तुलना में 10 गुना अधिक संभावित हो गए हैं।
वैश्विक तापमान में वृद्धि के प्रभाव, ईरानी सरकार की दशकों की गलत नीतियों, ज्यादा पानी की खपत वाली कृषि नीतियों (जैसे चावल और गन्ना उत्पादन) और प्रतिबंधों के साथ मिलकर संकट को और गहरा कर रहे हैं। इन प्रतिबंधों के कारण जल अवसंरचना के रखरखाव के लिए जरूरी सामानों का आयात भी मुश्किल हो गया।
ईरान और मध्य-पूर्व के अन्य हिस्सों में तापमान वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी तेजी से बढ़ रहा है। वर्ल्ड रिर्सोस इंस्टिट्यूट (World Resources Institute) के अनुसार, ईरान दुनिया का 11वां सबसे अधिक जल-संकटग्रस्त देश है और उसके 93 मिलियन से अधिक लोगों में से 80% से ज्यादा अत्यधिक जल संकट का सामना कर रहे हैं।
आधुनिक समय में ईरान और खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों ने जल कमी से निपटने के लिए बड़े बांधों और समुद्री जल को मीठा बनाने वाले संयंत्रों जैसी बड़ी अवसंरचनाओं पर आधारित केंद्रीकृत जल प्रणालियां बनाई हैं।
ईरान से इतर इजराइल जलवायु के मामले में लगभग एक जैसे ही हैं, लेकिन उसने तकनीक और बेहतर प्रबंधन के जरिए पानी की कमी को काफी हद तक नियंत्रित किया है। इजरायल ने अपने देश में पानी की कमी को पूरा करने के लिए कई उपाय किए हैं। उसने समुद्र के पानी को मीठा बनाने वाले कई बड़े संयंत्रों के जरिए अपनी पीने के पानी की बड़ी जरूरत पूरी करता है। वह दुनिया में सबसे अधिक अपशिष्ट जल को रिसाइकिल करके कृषि में इस्तेमाल करने वाले देशों में इजरायल अग्रणी है। इजरायल ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक सिंचाई तकनीक ड्रिप इरिगेशन विकसित की है, जिससे पानी की बचत होती है।
हालांकि अगर डीसैलिनेशन प्लांट या बिजली संयंत्रों पर हमला होता है तो इससे इजरायल के शहरों में पानी की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। युद्ध की स्थिति में पानी और बिजली का मुद्दा शत्रु राष्ट्र के लिए रणनीतिक हथियार बन सकता है। क्षेत्रीय तनाव से साझा जल स्रोतों और पाइपलाइन नेटवर्क पर भी खतरा बढ़ सकता है।