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Asthma Attack : अस्थमा अटैक, हार्ट अटैक से कम नहीं! हर साल 2 लाख मौतें, भारत में 3.43 करोड़ मरीज, एक चीज से बचाव संभव

Asthma Death in India : जोधपुर पाल गांव के आरती नगर स्थित आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा की मौत (Sadhvi Prem Baisa Death) का कारण अस्थमा व कार्डियक अरेस्ट बताया जा रहा है। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि अस्थमा अटैक से साध्वी की जान बचाई जा सकती थी। पर, ऐसा हो […]

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Feb 16, 2026
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo - Gemini AI

Asthma Death in India : जोधपुर पाल गांव के आरती नगर स्थित आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा की मौत (Sadhvi Prem Baisa Death) का कारण अस्थमा व कार्डियक अरेस्ट बताया जा रहा है। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि अस्थमा अटैक से साध्वी की जान बचाई जा सकती थी। पर, ऐसा हो ना पाया। अगर आप अस्थमा मरीजों के आंकड़ों को देखें तो आपको ये बात समझ आएगी कि अस्थमा कितना खतरनाक है। अस्थमा से भारत में हर साल लाखों मौतें होती हैं। भारत में अस्थमा के रोगियों की संख्या दुनिया के कुल रोगियों का लगभग 13% है, लेकिन दुनिया भर में अस्थमा से होने वाली मौतों में भारत की हिस्सेदारी 42.4% है। भारत में अस्थमा से मौत का जोखिम वैश्विक औसत से 3 गुना अधिक है।

आइए, आंकड़ों के साथ-साथ डॉ. दीपक यदुवंशी, पल्मोनोलॉजिस्ट (Pulmonologist) , चेस्ट फिजिशियन से समझते हैं कि भारत के लिए अस्थमा साइलेंट किलर कैसे है, अस्थमा अटैक के लक्षण क्या हैं, इससे कैसे बच सकते हैं।

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डॉ. दीपक कहते हैं, अस्थमा मरीजों के आंकड़े भारत में इसलिए भी अधिक है क्योंकि, हमारी आबादी अधिक है। यहां पर अस्थमा को गंभीरता से नहीं लिया जाता है। इसको लेकर सोशल टैबू भी हैं। यही कारण है कि ये भारत में तेजी से फैलता जा रहा है। साथ ही इससे मरने वालों की संख्या भी अधिक है। जीबीडी- Global Burden of Disease (GBD) के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 2 लाख लोगों की मौत अस्थमा के कारण होती है।

सबसे डराने वाली बात ये है कि भारत में अस्थमा से मौत का जोखिम वैश्विक औसत से 3 गुना अधिक है। इसके बावजूद भी हम लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। बता दें, भारत में लगभग 3.43 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं।

वो आगे कहते हैं, ये आंकड़े हमारी लापरवाही को बता रहे हैं। अगर, अस्थमा को लेकर समय पर ध्यान रखा जाए तो मौत की संख्या को काफी हद तक कम हो सकती है।

अस्थमा अटैक से हार्ट अटैक का भी खतरा

मेडिकल जर्नल द लैंसेट (The Lancet) के मुताबिक, अस्थमा के रोगियों में हार्ट अटैक आने का खतरा सामान्य व्यक्ति की तुलना में 30% से 40% अधिक होता है, क्योंकि शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन (Inflammation) धमनियों को प्रभावित करती है। इसलिए, अस्थमा को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

अस्थमा अटैक क्या है?

वो कहते हैं, अस्थमा अटैक के कारण मरीज को सांस लेने में काफी दिक्कत होती है। इसके अलावा छाती का टाइट हो जाना, अधिक बलगम निकलना और ऐसा लगना कि सांस आ नहीं रही है। यही अस्थमा अटैक है। ये हार्ट अटैक की तरह दर्दनाक नहीं होता, पर जानलेवा हो सकता है।

क्यों आता है अस्थमा अटैक?

वो इस बात को समझाते हुए कहते हैं, जब अस्थमा को नजरअंदाज किया जाता है तब ये अटैक आता है। अगर अस्थमा के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से दिखाया जाए और बताए अनुसार इनहेलर का उपयोग करें तो अस्थमा अटैक को काफी हद तक टाला जा सकता है। ये कारण भी हैं-

  • इनहेलर का यूज ना करना
  • एलर्जी वाली चीजों के संपर्क में आना
  • बढ़ता वायु प्रदूषण

शुरुआती चेतावनी संकेत (Asthma Attack Early Warning Signs)

  • लगातार खांसी: विशेष रूप से रात में या सुबह के समय।
  • सांस की हल्की कमी: चलने या हल्की शारीरिक गतिविधि पर सांस फूलना।
  • थकान: बहुत जल्दी थक जाना या कमजोरी महसूस करना।
  • नींद में बाधा: खांसी या सांस की तकलीफ के कारण सो न पाना।

तीव्र अस्थमा अटैक के लक्षण (Acute Attack Symptoms)

  • घबराहट और बेचैनी: सांस न आने के कारण व्यक्ति बहुत घबरा जाता है।
  • सीटी जैसी आवाज: सांस छोड़ते समय छाती से सीटी बजने जैसी आवाज आना।
  • छाती में जकड़न: ऐसा महसूस होना जैसे किसी ने छाती को कसकर बांध दिया हो।
  • बोलने में कठिनाई: सांस की कमी के कारण एक पूरा वाक्य बोलने में भी असमर्थ।
  • तेज सांस लेना: सामान्य से कहीं अधिक तेजी से सांस लेना।

आपातकालीन लक्षण (Asthma Attack Emergency Symptoms)

  • नीलापन: नाखूनों या होठों का रंग नीला या ग्रे पड़ना (ऑक्सीजन की कमी का संकेत)।
  • गर्दन और पसलियों की मांसपेशियों में खिंचाव: सांस लेने के लिए शरीर का बहुत अधिक जोर लगाना।
  • इन्हेलर का असर न करना: 'रेस्क्यू इनहेलर' (जैसे Salbutamol) लेने के बाद भी सुधार न होना।
  • भ्रम या बेहोशी: ऑक्सीजन की कमी के कारण दिमाग का सुस्त पड़ना।

अस्थमा अटैक से मृत्यु का जोखिम कम करने के उपाय

इनहेलर का उपयोग करें

उन्होंने इनहेलर उपयोग पर जोर डालते हुए कहा, टैबलेट के मुकाबले इनहेलर सीधे फेफड़ों तक पहुंचता है और इसके साइड इफेक्ट्स बहुत कम होते हैं। इसलिए, अस्थमा की अधिकतर दवाईयां पंप के रूप में दी जाती हैं। कई इन्हेलर को लेकर कई तरह की धारणा बना रखे हैं जबकि, ये सबसे कारगर है। इसलिए, अस्थमा मरीज को हमेशा इनहेलर पास रखना चाहिए।

प्रदूषण से बचाव बेहद जरूरी

सल्फर डाइऑक्साइड (Sulphur Dioxide) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (Nitrogen Dioxide) जैसे प्रदूषक अस्थमा को जानलेवा बना देते हैं। अस्थमा वाले मरीज को प्रदूषण से बचकर रहना चाहिए। कई लोग इस बात को हल्के में लेते हैं।

  • सेंट से भी रहें दूर
  • फूल आदि के महक से बचें
  • अगरबत्ती या अन्य धुआं से बचें
  • मौसम बदलने पर रखें विशेष ध्यान

अगर अस्थमा के मरीजों का ख्याल रखा जाए। साथ ही इनहेलर का यूज किया जाए तो इससे होने वाली मौत को काफी हद तक टाला जा सकता है। हालांकि, इनहेलर का यूज भी आपको डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही करना है।

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