
बीजापुर@मो. इरशाद खान। Chhattisgarh Tourism News: कभी बंदूक की धमक और बारूद की गंध से दहलने वाले बीजापुर के घने जंगल अब बदलाव की नई गाथा लिखने को तैयार हैं। बस्तर के दिल कहे जाने वाले इंद्रावती टाइगर रिजर्व में मानसून के ठीक बाद ‘जंगल सफारी’ की अहम शुरुआत होने जा रही है। इस पहल की सबसे अनूठी और मानवीय तस्वीर यह होगी कि जिन हाथों ने कभी जंगलों में हथियार थामे थे, अब वही पूर्व नक्सली और स्थानीय ग्रामीण पर्यटकों के ‘गाइड’ बनकर बस्तर का प्राकृतिक सौंदर्य दिखाएंगे।
इसी बदलाव को करीब से परखने के लिए ‘पत्रिका’ आज से शुरू कर रहा है, यह विशेष अभियान ‘बस्तर का बदलता सच’ है। अब जंगल में संघर्ष का पुराना अध्याय बीते दिनों की बात बनेगा और स्थानीय लोगों को गाइड, परिवहन, होम-स्टे व हस्तशिल्प के जरिए आजीविका के नए रास्ते मिलेंगे।
करीब 2200 वर्ग किलोमीटर में फैला इंद्रावती टाइगर रिजर्व केवल घने पेड़ों का विस्तार नहीं, बल्कि जैव विविधता का अनमोल खजाना है। वन विभाग इको-डेवलपमेंट योजना के तहत पूर्व माओवादियों और ग्रामीणों को प्रशिक्षित कर रहा है। प्रशिक्षण में वन्यजीवों की पहचान, संवाद कौशल और सुरक्षा मानक सिखाए जा रहे हैं। पर्यटकों के लिए दो प्रवेश द्वार तैयार किए जा रहे हैं। बंदूक छोड़कर मुख्यधारा में लौटे युवाओं के लिए यह कदम सम्मानजनक जिंदगी की नई शुरुआत है।
इस नई शुरुआत के साथ ही प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। रिजर्व में छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु वन भैंसे का झुंड स्वच्छंद विचरण करता दिखा है। इसके साथ ही दुर्लभ हिमालयी गिद्ध की मौजूदगी ने भी वन्यजीव विशेषज्ञों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।कैमरा ट्रैप और लगातार गश्त के जरिए वन विभाग गौर, चीतल, सांभर और भालू जैसे वन्यजीवों की सुरक्षा में जुटा है। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि सफारी के दौरान वन्यजीवों के प्राकृतिक वातावरण में बाधा न पहुंचे, इसके लिए सख्त नियम लागू किए जाएंगे।
इंद्रावती के तटीय गांव सैंड्रा की प्राकृतिक खूबसूरती इस बात का प्रमाण है कि इस क्षेत्र में पर्यटन की कितनी अपार संभावनाएं हैं। भोपालपटनम से 80 किमी दूर बसा यह गांव तीन पहाड़ियों और इंद्रावती नदी के अप्रतिम संगम पर स्थित है, जिसके पार महाराष्ट्र का गढ़चिरौली जिला है। हालांकि, इस प्राकृतिक खूबसूरती को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए पक्की सड़कों, स्वास्थ्य सुविधाओं और मजबूत संचार व्यवस्था की दरकार है। जब स्थानीय ग्राम सभाओं की भागीदारी के साथ विकास के कदम आगे बढ़ेंगे, तब खौफ के साय से बाहर निकलकर बीजापुर देश-दुनिया के पर्यटकों का स्वागत करेगा।