Unique Ram Darbar Wood Art Bastar: बस्तर की समृद्ध काष्ठ कला एक बार फिर चर्चा में है, जहां एक अनोखा ‘राम दरबार’ वॉल पैनल अपनी बारीकी और जीवंतता के कारण लोगों को आकर्षित कर रहा है।
Bastar Wooden Ram Darbar Panel: कभी कागज पर उकेरी गई एक कल्पना आज लकड़ी पर जीवंत होकर श्रद्धा, कला और धैर्य की मिसाल बन चुकी है। 63 वर्षीय काष्ठ कलाकार प्रतीक बाजपेयी ने अपने 48 वर्षों के अनुभव और जुनून से ऐसा वॉल पैनल तैयार कराया है, जो सिर्फ एक कलाकृति नहीं, बल्कि एक जीवन यात्रा की कहानी कहता है।
प्रतीक बाजपेयी कहते हैं कि इस वॉल पैनल को कोई कॉपी नहीं कर सकता, क्योंकि इसमें छह अलग-अलग कारीगरों की आत्मा बसी है। हर छेनी की चोट, हर उकेरन अपने आप में अलग है। यही कारण है कि यह कृति अनोखी बन गई है।
करीब 5 से 6 महीने तक लगातार काम करने के बाद यह वॉल पैनल तैयार हुआ। हर दिन नई चुनौती थी। कहीं बारीक नक्काशी, तो कहीं भावों को जीवंत करना। लेकिन टीम ने धैर्य नहीं छोड़ा। 63 साल की उम्र में भी प्रतीक बाजपेयी जिस ऊर्जा और लगन से काम कर रहे हैं, वह युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनका मानना है कि अगर मन में कुछ नया करने की चाह हो, तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती।
इस वॉल पैनल की शुरुआत भी एक साधारण स्केच से हुई। भगवान राम के राजतिलक के ²श्य को पहले कागज पर उतारा गया, फिर 5 इंच मोटी लकड़ी पर उसे सावधानी से उकेरा गया। इसके बाद छह कारीगरों ने अपने-अपने हुनर से इसे आकार दिया। हर कारीगर की शैली अलग होने के कारण इस पैनल का हर हिस्सा अलग पहचान रखता है, यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है और इसी वजह से यह कला खास दिखती है।
प्रतीक बाजपेयी के लिए कला सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि साधना है। पिछले 48 वर्षों से वे कागज पर अपनी कल्पनाओं को उकेरते आए हैं और फिर उन्हें लकड़ी पर जीवंत रूप देते हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके हाथों की रेखाएं उतनी ही सधी हुई हैं, जितनी युवावस्था में थीं।
वे मानते हैं कि लकड़ी सिर्फ एक माध्यम नहीं, बल्कि उनके सपनों को आकार देने का जरिया है। पारंपरिक कला के साथ आधुनिक तकनीक जैसे कंप्यूटर और एआई का उपयोग कर वे नई-नई डिजाइन तैयार करते हैं, लेकिन आत्मा वही पुरानी बस्तर की कला की रहती है। यह वॉल पैनल सिर्फ एक कलाकृति नहीं, बल्कि बस्तर की समृद्ध काष्ठ कला का प्रतीक है। यह दिखाता है कि स्थानीय हुनर अगर सही दिशा मिले, तो ‘लोकल’ से ‘ग्लोबल’ तक अपनी पहचान बना सकता है।