
परंपरा से नवाचार तक (photo source- Patrika)
छत्तीसगढ़ के छोटे से गांव कोटानपानी, जो विष्णुदेव साय के गृह क्षेत्र के पास स्थित है, आज अपनी पारंपरिक कला के कारण पूरे प्रदेश में पहचान बना चुका है। इस पहचान के केंद्र में हैं 51 वर्षीय सुखमिला पैकरा, जिन्होंने खजूर के पत्तों और कासी के पौधों से बनने वाली बॉस्केट, टोकनी और बैग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
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