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परंपरा से प्रोफेशन तक! 8वीं पास महिला का कमाल, गांव की इस कला को देशभर में पहुंचाया

Self Employment Women: छत्तीसगढ़ के कोटानपानी गांव की सुखमिला पैकरा ने पारंपरिक कला को नवाचार के साथ नई पहचान दी है। 8वीं पास होने के बावजूद उन्होंने खजूर के पत्तों से बने उत्पादों को देशभर में पहुंचाया।
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परंपरा से नवाचार तक (photo source- Patrika)

परंपरा से नवाचार तक (photo source- Patrika)

छत्तीसगढ़ के छोटे से गांव कोटानपानी, जो विष्णुदेव साय के गृह क्षेत्र के पास स्थित है, आज अपनी पारंपरिक कला के कारण पूरे प्रदेश में पहचान बना चुका है। इस पहचान के केंद्र में हैं 51 वर्षीय सुखमिला पैकरा, जिन्होंने खजूर के पत्तों और कासी के पौधों से बनने वाली बॉस्केट, टोकनी और बैग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

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