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Tobacco India Study: तंबाकू छोड़ते ही 2 करोड़ परिवारों की बदल सकती है किस्मत, कमाई का 6.4 फीसदी हो जाता है स्वाहा

Tobacco BMJ Global Health Study: बीएमजे ग्लोबल हेल्थ के ताजे अध्ययन में यह बताया गया है कि तंबाकू छोड़ देने से देश के दो करोड़ लोगों की आर्थिक उन्नति हो सकती है। तंबाकू से मुक्ति से जुड़े सवालों को लेकर डॉक्टरों से खास बातचीत पढ़िए।

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Apr 21, 2026
तंबाकू के सेवन से भारत में सालाना 13 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। (Photo: IANS)

Tobacco New Study: बीएमजे ग्लोबल हेल्थ (BMJ Global Health) में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, भारत की 10.6 फीसदी आबादी यानी 2 करोड़ 4 लाख 90 हजार से अधिक परिवार सिर्फ तंबाकू का सेवन करना छोड़ दे तो उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है। यह तथ्य भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (NICPR) और नोएडा और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई के रिसर्च के दौरान सामने आए हैं। यह देशभर में तंबाकू उपयोग करने वाले परिवारों का राष्ट्रीय स्तर पर आकलन करने वाला पहला अध्ययन है।

'तंबाकू सिर्फ स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि गरीबी उन्मूल की रणनीति भी'

अध्ययन के अनुसार, सबसे गरीब परिवार अपनी कुल मासिक आय का 6.4% तंबाकू पर खर्च करते हैं। ICMR-NICPR के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. प्रशांत कुमार सिंह ने मीडिया को बताया, 'तंबाकू सिर्फ स्वास्थ्य की बर्बादी नहीं है। यह गरीबी का जाल है। हमने राष्ट्रीय स्तर के सबसे विश्वसनीय आंकड़ों के साथ दिखाया है कि 2 करोड़ से ज्यादा परिवार सिर्फ तंबाकू छोड़कर आर्थिक रूप से ऊपर उठ सकते हैं। ग्रामीण परिवार, जो पहले ही अपनी आय का लगभग 7% तंबाकू पर खर्च करते हैं, उनके लिए यह गरीबी और सम्मानजनक जीवन जीने के बीच का अंतर है। तंबाकू छोड़ना केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि गरीबी उन्मूलन की रणनीति होना चाहिए।'

हालांकि इस बारे में डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव का कहना है कि सैद्धांतिक रूप से यह संभव है, लेकिन तंबाकू छोड़ने के बाद लोग नशे के लिए अन्य चीज़ों की ओर मुड़ सकते हैं, जो उनकी आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। तंबाकू और बीड़ी सस्ता नशा है।

वहीं शिशु रोग विशेषज्ञ और फैमिली फिजिशियन डॉ. चंद्रशेखर झा ने 'भारत में तंबाकू के उपभोग छोड़ देने से गरीबी से मुक्ति की संभावना' पर नए अध्ययन की सराहना करते हुए पत्रिका से बातचीत में कहा कि यह अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि गरीबी या गहरी आर्थिक विपन्नता की भी एक बड़ी तंबाकू सेवन को बताया गया है। भारत में 20.49 मिलियन परिवार केवल अपनी तंबाकू सेवन की आदत पर नियंत्रण लगाकर अपनी गरीबी मिटा सकते हैं। यह स्टडी यह भी बतलाता है कि तंबाकू पर नियंत्रण केवल स्वास्थ्य नीति तक ही नहीं गरीबी उन्मूल रणनीति के बतौर देखा जाना चाहिए। इस अध्ययन को स्वास्थ्य सुधार और गरीबी उन्मूलन के एकीकृत रूप में देखना चाहिए। इस अध्ययन के आधार पर काम किया जाए तो इसका सकारात्मक असर ग्रामीण और निम्न आय वर्ग पर पड़ेगा, जहां मासिक आय का 6-7 प्रतिशत केवल तंबाकू के सेवन पर खर्च हो जाता है।

भारत में तंबाकू के सेवन से हर साल 13 लाख से ज्यादा की मौत

यह तथ्य है कि भारत में तंबाकू का बोझ दुनिया में सबसे अधिक में से एक है। देश में 26.7 करोड़ से अधिक लोग तंबाकू का सेवन करते हैं, जो वयस्क आबादी का लगभग एक चौथाई है। तंबाकू देश में मौत और बीमारी का सबसे बड़ी वजह है। तंबाकू के सेवन से हर साल 13 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु होती है। यह मुंह, गले, फेफड़े और अन्नप्रणाली के कैंसर के साथ-साथ हृदय रोग और स्ट्रोक से भी जुड़ा हुआ है।

तंबाकू पर गरीब परिवार मासिक आय का 6.4%, अमीर 2% करता है खर्च

वर्ष 2022-23 के घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण के 2,61,746 परिवारों के आंकड़ों के आधार पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि गरीब परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। सबसे गरीब वर्ग का एक परिवार अपनी मासिक आय का 6.4% तंबाकू पर खर्च करता है, जबकि सबसे अमीर वर्ग केवल 2% खर्च करता है। अध्ययन के अनुसार, सबसे गरीब वर्ग के 12.4% यानी 56.2 लाख परिवार तंबाकू छोड़कर पूरी तरह अपनी आय श्रेणी से बाहर निकल सकते हैं।

तंबाकू का प्रभाव और नुकसान

  • भारत, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तंबाकू उपभोक्ता और उत्पादक देश है। तंबाकू से हर साल लगभग 13.5 लाख मौतें होती हैं।
  • भारत में तंबाकू सेवन के चलते रोजाना लगभग 3,700 मौतें होती हैं।
  • दुनिया में बिना धुएं वाले तंबाकू का सबसे ज्यादा भारत में ही होता है।
  • दुनिया में तंबाकू उपभोग करने वालों में से 70% भारतीय हैं।
  • देश में कुल कैंसर के मरीज में से 27% तंबाकू के सेवन से जुड़े पाए जाते हैं।
  • करीब 90% वयस्क तंबाकू सेवन करने वालों ने 18 वर्ष की उम्र से पहले ही इसकी शुरुआत कर चुके होते हैं।
  • ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे 2019 के अनुसार, 13-15 वर्ष के किशोरों में तंबाकू उपयोग की दर 8.5% थी।
  • भारत में 9.6% लड़के और 7.4% लड़कियां तंबाकू का उपयोग करती हैं।

बीएमजे ग्लोबल हेल्थ के शोधकर्ताओं के अनुसार, तंबाकू छोड़ने से 1.7 करोड़ ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से ऊपर उठ सकते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह संख्या 35 लाख है। ग्रामीण परिवार अपनी आय का अधिक हिस्सा तंबाकू पर खर्च करते हैं। गांवों में 6.6%, जबकि शहरों में 5.6% आबादी तंबाकू का सेवन करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सुधार की दर शहरी क्षेत्रों से 60% अधिक है। इसके अलावा, 71.2 लाख निम्न-मध्यम आय वर्ग के परिवार (16.8%) भी तंबाकू छोड़कर उच्च आय वर्ग में जा सकते हैं।

'तंबाकू छोड़ने के 20 मिनट बाद ही सकारात्मक असर दिखने लगता है'

शिशु रोग विशेषज्ञ और फैमिली फिजिशियन डॉ. चंद्रशेखर झा ने कहा कि तंबाकू छोड़ने का असर 20 मिनट बाद ही दिखने लग जाता है। रक्तचाप और हृदयगति सामान्य होने लगता है। 24 घंटे के बाद हृदयाघात के जोखिम कम होने लग जाता है। कुछ महीनों में फेफड़ों और रक्त संचार में सुधार साफ-साफ दिखने लग जाता है।

'पेरिफेरल आर्टरी डिजीज से भी करता है बचाव'

आप देखिए कि तंबाकू छोड़ना आपको कितनी बीमारियों से बचाता है। तंबाकू छोड़ देने से आपको पेरिफेरल आर्टरी डिजीज यानी पैरों में चलने पर दर्द, ऐंठन, सुन्नपन, या कमजोरी महसूस होने की समस्याओं से निजात मिलता है। इसके अलावा, पैरों का ठंडा पड़ना, त्वचा का रंग फीका/नीला होना, घाव का जल्दी न भरना, और बालों का झड़ना आदि में सुधार आ सकता है।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक तंबाकू का सेवन कर चुके भी यदि समय से इसे त्याग दें तो उन्हें कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों के खतरों से सिर्फ कहने के लिए नहीं बल्कि उल्लेखनीय रूप से खुद को बचा सकते हैं।

स्मोकलेस यानी खैनी, जर्दा, गुटखा आदि भी धूएं वाले तंबाकू के नशा जितना ही खतरनाक हैं। यह गले, मुंह का कैंसर, हृदय संबंधी रोगों का जोखिम पैदा करता है। बहुत से लोग तंबाकू को सुरक्षित विकल्प मानते हैं, यह सबसे बड़ा भ्रम है। यह सबसे बड़ी भूल है।

तंबाकू की आदत छोड़ने के लिए सबसे व्यवहारी उपायों में काउंसिलिंग है। इसे बिहेवियरल थेरेपी भी कहते हैं। निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी, जिसे हमलोग संक्षेप में एनआरडी भी कहते हैं। इसके साथ ही चिकित्सकों का परामर्श और परिवार का सहयोग बहुत जरूरी है। अंत में जो इसके लिए सबसे जरूरी बात है, वह है तंबाकू का सेवन करने वालों की इच्छाशक्ति।

तंबाकू मुक्ति को जनस्वास्थ्य के साथ सामाजिक, आर्थिक पुर्ननिर्माण का राष्ट्रीय आंदोलन बनाया जाना चाहिए। यह मेरी सोच है और नीति निर्धारकों के लिए सुझाव।

क्या वास्तव में तंबाकू छोड़ने से गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है?

सबसे गरीब परिवार अपनी कुल आय का लगभग 6.4% तंबाकू पर खर्च कर देते हैं। अगर यह खर्च बंद हो जाए, तो वही पैसा भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बचत में लगाया जा सकता है। अनुमान है कि करीब 10% भारतीय परिवार (20 मिलियन से ज्यादा) सिर्फ तंबाकू छोड़कर अपनी आर्थिक श्रेणी सुधार सकते हैं। अगर कोई परिवार न्यूनतम पहले से ही सीमित आय में जी रहा है, तो 6–7% अतिरिक्त पैसा उनके लिए बहुत मायने रखता है। यह पैसा बच्चों की फीस, दवाइयां या बेहतर पोषण जैसी जरूरतें पूरी कर सकता है।

तंबाकू पर गरीब परिवार कितना कर देता है खर्च?

इस सवाल का जवाब उदाहरण के जरिए समझ सकते हैं। हालांकि यह परिवार की आय और तंबाकू की आदत पर निर्भर करता है। मान लीजिए एक गरीब परिवार की मासिक आय 10,000 रुपये प्रति महीना है, तो यदि वह 6.4% तंबाकू पर खर्च करता है, तो मासिक खर्च 640 रुपये होगा। अगर हम सालाना देखें तो जेब पर करीब-करीब 7,500–8,000 रुपये तक बोझ बढ़ जाएगा। अगर आय 15,000–20,000 रुपये प्रति महीना है, तो यह खर्च आसानी से 10,000–15,000 रुपये सालाना तक जा सकता है।

तंबाकू छोड़ने के बाद शरीर में कितने समय में सुधार दिखने लगता है?

डॉक्टर चंद्रशेखर झा ने इस सवाल के जवाब में कहा कि तंबाकू छोड़ने का असर 20 मिनट बाद ही दिखने लग जाता है। रक्तचाप और हृदयगति सामान्य होने लगता है। 24 घंटे के बाद हृदयाघात के जोखिम कम होने लग जाता है। कुछ महीनों में फेफड़ों और रक्त संचार में सुधार साफ-साफ दिखने लग जाता है।

आप देखिए कि तंबाकू छोड़ना आपको कितनी बीमारियों से बचाता है। तंबाकू छोड़ देने से आपको पेरिफेरल आर्टरी डिजीज यानी पैरों में चलने पर दर्द, ऐंठन, सुन्नपन, या कमजोरी महसूस होने की समस्याओं से निजात मिलता है। इसके अलावा, पैरों का ठंडा पड़ना, त्वचा का रंग फीका/नीला होना, घाव का जल्दी न भरना, और बालों का झड़ना आदि में सुधार आ सकता है।

क्या लंबे समय तक तंबाकू इस्तेमाल करने वाले लोग भी पूरी तरह ठीक हो सकते हैं?

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि लंबे समय तक तंबाकू का सेवन कर चुके भी यदि समय से इसे त्याग दें तो उन्हें कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों के खतरों से सिर्फ कहने के लिए नहीं बल्कि उल्लेखनीय रूप से खुद को बचा सकते हैं। स्मोकलेस यानी खैनी, जर्दा, गुटखा आदि भी धूएं वाले तंबाकू के नशा जितना ही खतरनाक हैं। यह गले, मुंह का कैंसर, हृदय संबंधी रोगों का जोखिम पैदा करता है। बहुत से लोग तंबाकू को सुरक्षित विकल्प मानते हैं, यह सबसे बड़ा भ्रम है। यह सबसे बड़ी भूल है।

तंबाकू छोड़ने के सबसे प्रभावी तरीके क्या हैं?

डॉ. झा कहते हैं कि तंबाकू की आदत छोड़ने के लिए सबसे व्यवहारी उपायों में काउंसिलिंग है। इसे बिहेवियरल थेरेपी भी कहते हैं। निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी, जिसे हमलोग संक्षेप में एनआरडी भी कहते हैं। इसके साथ ही चिकित्सकों का परामर्श और परिवार का सहयोग बहुत जरूरी है। अंत में जो इसके लिए सबसे जरूरी बात है, वह है तंबाकू का सेवन करने वालों की इच्छाशक्ति।

लंबे समय तक नशा के आदी रह चुके लोग जब इनसे दूरी बनाते हैं तब क्या दिक्कत आती है?

इस सवाल पर के जवाब में डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव का कहना है कि दो से तीन सप्ताह तक विदड्रॉल सिम्पटम्स (withdrawal symptoms)आते हैं- चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, उदासी, वज़न बढ़ना, घबराहट और पसीने आना आदि।

क्या लंबे समय तक नशा करने वाले भी मुक्ति पा सकते हैं?

इसके जवाब में वह कहती हैं कि अगर इच्छाशक्ति तो कभी भी मुक्ति पाई जा सकती है। नशा छोड़ने के बाद सबसे पहले सांस की तकलीफ में राहत महसूस होती है और कफ की समस्या में बहुत आराम आ जाता है। एक साल के अन्दर हार्ट हेल्थ बेहतर हो जाती है। कुछ लोगों के लिए निकोटीन गम बहुद फ़ायदा करता है । विदेशों में निकोटीन पैचेस उपलब्ध कराए जाते हैं। नशा छोड़ने की इच्छा वालों के लिए पैचेज़ आते हैं। स्टिकर की तरह पैचेज को बांह पर चिपका लिया जाता है। इससे कुछ घंटे निकोटीन रिलीज़ होता रहता है और इसके चलते स्मोकिंग की ज़रूरत महसूस नहीं होती।

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