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BradyCardia: दिल की धड़कनें सुस्त पड़ रही हों तो हो जाएं अलर्ट, एक्सपर्ट्स से समझें इसके लक्षण, कारण और बचाव

BradyCardia Symptoms: क्या आप जानते हैं कि हृदय गति का 60 BPM से कम होना 'ब्रेडीकार्डिया' नामक बीमारी हो सकती है? डॉ. आरिफ खान से इसके लक्षण, कारण और उपाय के बारे में समझिए।

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Apr 22, 2026

Bradycardia : हम अक्सर सिरदर्द या थकान को टाल देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी-कभी ये मामूली से दिखने वाले लक्षण दिल की किसी गंभीर बीमारी के लक्षण हो सकते हैं? ऐसी ही एक स्थिति है 'ब्रेडीकार्डिया' (Bradycardia) जिसमें दिल की धड़कन सामान्य से धीमी हो जाती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह स्थिति होती क्या है और यह कब चिंता का विषय बन जाता है।

What is Bradycardia: ब्रेडीकार्डिया क्या है?

एक सामान्य स्वस्थ वयस्क का दिल आराम की स्थिति (Resting state) में एक मिनट में 60 से 100 बार धड़कता है। लेकिन यदि हृदय की यह गति 60 बीट प्रति मिनट (BPM) से कम हो जाए, तो इसे ब्रेडीकार्डिया माना जाता है। हृदय का मुख्य कार्य पूरे शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त पंप ( Blood Circulation) करना है। धड़कन जब बहुत धीमी हो जाती है, तो शरीर के अंगों, विशेषकर मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को चक्कर आना, बेहोशी या भारी थकान महसूस हो सकता है।

क्या 60 से कम धड़कन हमेशा खतरनाक है?

हर मामले में ब्रेडीकार्डिया खतरनाक नहीं होता। इसे उदाहरण से समझिए।

एथलीट: जो लोग नियमित रूप से भारी व्यायाम करते हैं, उनका हृदय बहुत सक्रिय होता है। उनका दिल एक बार में ही इतना रक्त पंप कर देता है कि उन्हें तेज धड़कन की जरूरत नहीं पड़ती। एथलीट्स का हार्ट रेट 40-50 BPM तक भी हो सकता है।

गहरी नींद: जब हम गहरी नींद में होते हैं, तो शरीर की ऑक्सीजन की जरूरत कम हो जाती है, जिससे हृदय गति 60 से नीचे जा सकती है।

ब्रेडीकार्डिया के प्रकार (Types of Bradycardia)

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, ब्रेडीकार्डिया को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है।

  • साइनस नोड की समस्या (Sinus Node Dysfunction) : हृदय के दाहिने हिस्से (Right Side of the Heart) में एक 'प्राकृतिक पेसमेकर' होता है जिसे साइनस नोड कहते हैं। यह विद्युत संकेत (electrical signals) भेजता है जो दिल को धड़कने का निर्देश देते हैं। यदि यह नोड सही ढंग से संकेत नहीं भेजता, तो धड़कन धीमी हो जाती है।
  • हार्ट ब्लॉक (Heart Block) : दिल के ऊपरी कक्षों (Atria) से निचले कक्षों (Ventricles) तक जाने वाले विद्युत संकेत जब बाधित हो जाते हैं, तो इसे हार्ट ब्लॉक कहा जाता है। इसमें संकेत या तो धीमी गति से पहुंचते हैं या पूरी तरह रुक जाते हैं।

Symptoms of Bradycardia: इसके मुख्य लक्षण क्या हैं?

ब्रेडीकार्डिया के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपके अंगों को कितनी ऑक्सीजन मिल रही है। मुख्य लक्षण जैसे

  • चक्कर आना या हल्कापन: मस्तिष्क को कम रक्त मिलने पर सिर घूमना सामान्य है।
  • थकान: बिना किसी खास मेहनत के हर समय थकान महसूस करना।
  • सांस फूलना: थोड़ी दूर चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर ही सांस लेने में कठिनाई।
  • सीने में दर्द (Angina): हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलना।
  • याददाश्त में भ्रम: ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई या अचानक कुछ भूल जाना।
  • बेहोशी (Syncope): यह सबसे गंभीर लक्षण है और तुरंत डॉक्टर से मिलने का संकेत है।

Causes of Bradycardia: क्या हैं इसके कारण?

दिल की धड़कन धीमी होने के कई कारण हो सकते हैं, जिन्हें हम दो हिस्सों में बांट सकते हैं।
चिकित्सा संबंधी कारण (Medical Causes)

  • उम्र बढ़ना: उम्र के साथ हृदय के ऊतकों में टूट-फूट होती है, जिससे इलेक्ट्रिकल सिस्टम कमजोर हो जाता है।
  • हृदय रोग: हार्ट अटैक के बाद होने वाली क्षति या कोरोनरी आर्टरी डिजीज।
  • हाइपोथायरायडिज्म: जब थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बनाती, तो मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और हृदय गति भी गिर जाती है।
  • इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन: खून में पोटेशियम या कैल्शियम जैसे खनिजों का स्तर सही न होना।
  • संक्रमण: मायोकार्डिटिस (दिल की मांसपेशियों की सूजन) जैसी स्थितियां।

जीवनशैली और अन्य कारण

  • दवाएं: ब्लड प्रेशर के लिए ली जाने वाली बीटा-ब्लॉकर्स या कुछ मानसिक रोगों की दवाएं हार्ट रेट कम कर सकती हैं।
  • स्लीप एपनिया: नींद के दौरान सांस का बार-बार रुकना और शुरू होना।
  • तनाव और धूम्रपान: लंबे समय तक धूम्रपान दिल की नसों को सख्त कर देता है।

जांच और निदान

यदि आपको लक्षण महसूस होते हैं, तो डॉक्टर निम्नलिखित टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।

  • ईसीजी (ECG/EKG): यह दिल की विद्युत गतिविधि को मापने का सबसे आसान तरीका है।
  • हॉल्टर मॉनिटर (Holter Monitor): एक पोर्टेबल ईसीजी जिसे मरीज 24 से 48 घंटे तक पहनता है ताकि धड़कनों का उतार-चढ़ाव रिकॉर्ड हो सके।
  • स्ट्रेस टेस्ट: एक्सरसाइज के दौरान हृदय की प्रतिक्रिया की जांच।
  • ब्लड टेस्ट: थायराइड या इलेक्ट्रोलाइट्स की जांच के लिए।

उपचार के विकल्प (Treatment Options)

इलाज पूरी तरह से ब्रेडीकार्डिया के कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है।

दवाओं में बदलाव: यदि कोई विशेष दवा हार्ट रेट कम कर रही है, तो डॉक्टर उसकी खुराक बदल सकते हैं।

अंतर्निहित बीमारियों का इलाज: यदि कारण थायराइड है, तो थायराइड का इलाज करने से धड़कन सामान्य हो जाती है।

पेसमेकर (Pacemaker): यदि समस्या गंभीर है और इलेक्ट्रिकल सिस्टम स्थायी रूप से खराब हो गया है, तो त्वचा के नीचे एक छोटा डिवाइस 'पेसमेकर' लगाया जाता है। यह जरूरत पड़ने पर दिल को विद्युत संकेत भेजकर धड़कन को नियंत्रित रखता है।

बचाव और सावधानियां (Prevention and Self-care)

स्वस्थ आहार: ताजी सब्जियां, फल और ओमेगा-3 से भरपूर आहार लें। नमक और चीनी का सेवन कम करें।

नियमित व्यायाम: दिन में कम से कम 30 मिनट पैदल चलें या योग करें (डॉक्टर की सलाह पर)।

वजन पर नियंत्रण: मोटापा हृदय संबंधी जटिलताओं को बढ़ाता है।

धूम्रपान और शराब से दूरी: ये दोनों दिल की लय को बिगाड़ते हैं।

तनाव प्रबंधन: मेडिटेशन और पर्याप्त नींद लें।

भारत में व्यापकता (Prevalence in India)

भारत में होने वाली कुल मौतों में हृदय रोग (Cardiovascular Diseases CVD) का हिस्सा 28% से 30% हैं। ब्रेडीकार्डिया के संदर्भ में आंकड़े निम्नलिखित हैं।

सामान्य जनसंख्या: वैश्विक स्तर पर और भारत में यह स्थिति कुल जनसंख्या के 0.5% से 2% लोगों को प्रभावित करती है।

वृद्ध वयस्क: 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में इसकी दर अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, इस आयु वर्ग के प्रत्येक 600 में से 1 व्यक्ति को ब्रेडीकार्डिया के लक्षणों का अनुभव होता है।

अस्पष्टीकृत मामले: प्रति 100,000 व्यक्तियों में लगभग 400 मामले 'साइनस ब्रेडीकार्डिया' (बिना किसी स्पष्ट बाहरी कारण के धीमी धड़कन) के पाए जाते हैं।

युवाओं में बढ़ता जोखिम

2026 की हालिया रिपोर्टों (जैसे Medtronic India और ICMR के डेटा) के अनुसार, हृदय गति की अनियमितता (Arrhythmia) अब युवाओं में भी देखी जा रही है।

जल्दी शुरुआत: भारतीयों में हृदय रोग पश्चिमी देशों की तुलना में 10 से 15 साल पहले (अक्सर 30-40 की उम्र में) विकसित हो रहे हैं। इसका कारण स्पष्ट आया 20% से अधिक युवा मामले खराब जीवनशैली, तनाव और पोस्ट-कोविड जटिलताओं (Long COVID) के कारण रिपोर्ट किए जा रहे हैं, जो हृदय के इलेक्ट्रिकल सिस्टम को प्रभावित करते हैं।

डॉ. आरिफ खान के साथ पत्रिका की खास बातचीत

अक्सर लोग कम हार्ट रेट को अच्छी फिटनेस का संकेत मानते हैं। एक सामान्य व्यक्ति को कैसे पता चलेगा कि उसकी धीमी धड़कन 'एथलेटिक फिटनेस' है या 'ब्रेडीकार्डिया' की बीमारी? डॉ. आरिफ ने बताया, यह वाकई एक बहुत ही बारीक रेखा है और अक्सर लोग यहां गलती कर बैठते हैं। देखिए, इसे समझने के कुछ आसान तरीके है।

  • एथलेटिक हार्ट (The Fit Heart): जो लोग प्रोफेशनल एथलीट हैं या रोजाना भारी कार्डियो एक्सरसाइज करते हैं, उनका हृदय एक बहुत ही कुशल मशीन की तरह होता है। उनका दिल एक बार में ही इतना रक्त पंप कर देता है कि शरीर को आराम की स्थिति में 70-80 बार धड़कने की जरूरत ही नहीं पड़ती। ऐसे लोगों का हार्ट रेट अगर 45 या 50 भी है, तो भी वे अत्यधिक ऊर्जावान महसूस करते हैं। उन्हें सीढ़ियां चढ़ने या दौड़ने में कोई दिक्कत नहीं होती।
  • ब्रेडीकार्डिया (The Ailing Heart): इसके उलट, एक सामान्य व्यक्ति जिसका लाइफस्टाइल बहुत सक्रिय नहीं है, अगर उसकी धड़कन 60 से कम है, तो यह दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम की कमजोरी हो सकती है।

पहचानने का सरल तरीका (The Test): एक आम आदमी खुद को इन तीन पैमानों पर परख सकता है

  • लक्षणों की मौजूदगी: अगर धड़कन कम होने के साथ-साथ आपको बार-बार चक्कर आ रहे हैं, बेहोशी जैसा महसूस हो रहा है, या आप हर समय थका हुआ महसूस करते हैं, तो यह फिटनेस नहीं, बल्कि ब्रेडीकार्डिया है।
  • एक्सरसाइज पर प्रतिक्रिया: एक फिट एथलीट जब दौड़ता है, तो उसका हार्ट रेट तुरंत 45 से बढ़कर 120-150 तक पहुँच जाता है। लेकिन ब्रेडीकार्डिया के मरीज का दिल शरीर की मांग के हिसाब से अपनी गति नहीं बढ़ा पाता। अगर थोड़ा चलने पर ही आपकी सांस फूलने लगे, तो यह खतरे का संकेत है।
  • रिकवरी रेट: एथलीट का शरीर लो हार्ट रेट के बावजूद रिकवर जल्दी करता है, जबकि मरीज को सामान्य काम करने के बाद भी घंटों थकान रहती है।

क्या ब्रेडीकार्डिया केवल बुढ़ापे की बीमारी है, या आजकल युवाओं में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं?

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा यह सोचना गलत है कि ब्रेडीकार्डिया केवल बुजुर्गों को होता है। अब 30-40 की उम्र के युवाओं में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसके तीन मुख्य कारण हैं। पहला, पोस्ट-कोविड , जहां वायरस ने युवाओं के हृदय के इलेक्ट्रिकल सिस्टम को प्रभावित किया है। दूसरा, स्लीप एपनिया और तनाव, जो खराब लाइफस्टाइल के कारण दिल की धड़कन को बाधित कर रहे हैं। तीसरा, बिना डॉक्टरी सलाह के जिम सप्लीमेंट्स या दवाओं का सेवन। बुजुर्गों में यह अक्सर उम्र के साथ दिल के ऊतकों के घिसने से होता है, लेकिन युवाओं में यह चेतावनी है कि उनका दिल समय से पहले कमजोर हो रहा है। अगर किसी युवा को बार-बार चक्कर आते हैं या अकारण थकान महसूस होती है, तो उसे 'स्ट्रेस' मानकर टालें नहीं। यह आपके दिल के प्राकृतिक पेसमेकर में खराबी का संकेत हो सकता है, जिसे समय पर पकड़ना जरूरी है।

थकान और चक्कर आना बहुत सामान्य लक्षण हैं जो कई बीमारियों में होते हैं। ब्रेडीकार्डिया से जुड़ी थकान बाकी समस्याओं से अलग कैसे होती है?
इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, थकान एक बहुत ही 'General' लक्षण है। लेकिन ब्रेडीकार्डिया यानी धीमी हृदय गति से जुड़ी थकान की अपनी एक विशिष्ट पहचान होती है। इसे हम 'Exertional Fatigue' कहते हैं। इसे समझने के लिए इस अंतर को देखिए।

  • सामान्य थकान (General Fatigue): अगर आप तनाव में हैं या आपकी नींद पूरी नहीं हुई है, तो आप सुबह उठते ही थकान महसूस करेंगे। यह थकान आराम करने या कॉफी पीने से थोड़ी कम हो सकती है।
  • ब्रेडीकार्डिया वाली थकान (The 'Power-Cut' Fatigue): यह थकान ऐसी होती है जैसे किसी मशीन की 'बैटरी लो' हो गई हो। जब आपका दिल धीरे धड़कता है, तो आराम करते समय तो आप ठीक महसूस कर सकते हैं, लेकिन जैसे ही आप कोई शारीरिक गतिविधि (जैसे सीढ़ियां चढ़ना, तेज चलना या बाल्टी उठाना) शुरू करते हैं, आपका शरीर अचानक जवाब दे जाता है।

मुख्य फर्क कैसे पहचानें?

ब्रेडीकार्डिया की थकान के साथ अक्सर ये तीन चीजें जुड़ी होती हैं जो इसे दूसरी बीमारियों से अलग करती हैं।

  • Brain Fog (मानसिक धुंधलापन): चूंकि मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही होती, मरीज को थकान के साथ-साथ ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है। उसे लगता है जैसे उसका दिमाग सुस्त पड़ गया है।
  • अचानक आने वाले चक्कर (Near-Fainting): सामान्य थकान में आपको कमजोरी लगती है, लेकिन ब्रेडीकार्डिया में आपको अचानक ऐसा महसूस होगा जैसे आप अभी बेहोश होकर गिर जाएंगे (Pre-syncope)। यह अहसास कुछ सेकंड के लिए आता है और फिर चला जाता है।
  • सांस फूलना: अगर आप थोड़ा सा भी चलते हैं और आपकी सांस फूलने लगती है, जबकि पहले आप वही काम आसानी से कर लेते थे, तो यह संकेत है कि आपका दिल शरीर की मांग के अनुसार अपनी रफ्तार नहीं बढ़ा पा रहा है।

लाइफस्टाइल से जुड़ी कौन सी गलतियां (जैसे डाइट, सप्लीमेंट्स या स्ट्रेस) हमारे दिल के 'नेचुरल पेसमेकर' (Sinus Node) को नुकसान पहुंचाती हैं?

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा साइनस नोड बहुत ही संवेदनशील हिस्सा है। लाइफस्टाइल से जुड़ी हमारी कुछ आदतें इसे सीधे तौर पर 'शॉर्ट सर्किट' या 'कमजोर' कर सकती हैं। यहां 4 मुख्य गलतियां हैं, जो हम अक्सर करते हैं।

  • जिम सप्लीमेंट्स और 'प्री-वर्कआउट' ड्रिंक्स का अंधाधुंध इस्तेमाल: आजकल युवाओं में बिना डॉक्टरी सलाह के हाई-कैफीन सप्लीमेंट्स या स्टेरॉयड लेने का चलन बढ़ा है। ये सप्लीमेंट्स साइनस नोड पर अत्यधिक दबाव डालते हैं। शुरुआत में ये दिल की धड़कन को बहुत तेज (Tachycardia) कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक इनका इस्तेमाल साइनस नोड को थका देता है, जिससे वह समय से पहले 'एग्जॉस्ट' होकर धड़कन को बहुत धीमा कर देता है।
  • क्रोनिक स्ट्रेस और अधूरी नींद (The Silent Damage): जब हम लगातार तनाव में रहते हैं, तो हमारा शरीर 'कोर्टिसोल' और 'एड्रेनालिन' जैसे हार्मोन लगातार छोड़ता रहता है। यह हमारे ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम के संतुलन को बिगाड़ देता है। विशेषकर 'स्लीप एपनिया' (नींद में सांस रुकना) साइनस नोड का सबसे बड़ा दुश्मन है। रात में बार-बार ऑक्सीजन लेवल गिरने से साइनस नोड की कोशिकाएं डैमेज होने लगती हैं, जिससे भविष्य में ब्रेडीकार्डिया का खतरा बढ़ जाता है।
  • इलेक्ट्रोलाइट्स की अनदेखी (डाइट की गलती): हमारा दिल बिजली पर चलता है, और वह बिजली सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स से पैदा होती है। जो लोग बहुत ज्यादा 'क्रैश डाइट' करते हैं या बहुत अधिक प्रोसेस्ड फूड (अधिक नमक) खाते हैं, उनके शरीर में इनका संतुलन बिगड़ जाता है। पोटेशियम की कमी या अधिकता सीधे साइनस नोड की सिग्नल भेजने की क्षमता को ब्लॉक कर सकती है।
  • अत्यधिक नशा (धूम्रपान और शराब): निकोटिन दिल की नसों को सख्त (Hardening of arteries) बनाता है। जब साइनस नोड तक रक्त पहुंचाने वाली छोटी नसें प्रभावित होती हैं, तो उसे पर्याप्त पोषण नहीं मिलता और वह धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है। वहीं, अत्यधिक शराब दिल की मांसपेशियों के साथ-साथ उसके इलेक्ट्रिकल मार्ग को भी कमजोर कर देती है।

अगर किसी व्यक्ति को अचानक बहुत कम हार्ट रेट के कारण चक्कर आने लगें, तो घर पर मौजूद लोग प्राथमिक उपचार (First Aid) के तौर पर क्या कर सकते हैं?

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा किसी व्यक्ति की हृदय गति अचानक गिर जाए और उसे चक्कर आने लगें, तो घर पर मौजूद लोगों को बिना घबराए निम्नलिखित प्राथमिक उपचार करने चाहिए।

  • मरीज को तुरंत लिटा दें: मरीज को फर्श या बिस्तर पर सपाट लिटा दें। उनके पैरों के नीचे 2-3 तकिए रखकर उन्हें सिर के स्तर से थोड़ा ऊंचा उठा दें (Trendelenburg position)। इससे पैरों का रक्त प्रवाह मस्तिष्क की ओर तेजी से होता है, जिससे बेहोशी का खतरा कम हो जाता है।
  • कपड़ों को ढीला करें: गर्दन, छाती और कमर के आसपास के तंग कपड़ों को ढीला कर दें ताकि श्वसन मार्ग में कोई बाधा न हो।
  • ताजी हवा सुनिश्चित करें: खिड़कियां खोल दें और मरीज के आसपास भीड़ न लगाएं।
  • होश में लाएं: यदि मरीज बेहोश हो रहा हो, तो उसे कुछ भी खाने या पीने को न दें (इससे फेफड़ों में खाना फंस सकता है)।
  • मेडिकल सहायता लें: तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या नजदीकी अस्पताल ले जाएं। यदि मरीज की धड़कन या सांस पूरी तरह रुक जाए, तो तुरंत CPR शुरू करें।

साइलेंट ब्रेडीकार्डिया क्या है? क्या यह बिना किसी लक्षण के भी जानलेवा हो सकता है?

साइलेंट ब्रेडीकार्डिया (Silent Bradycardia) वह स्थिति है जिसमें हृदय की गति 60 बीट प्रति मिनट से कम तो होती है, लेकिन मरीज को इसके कोई स्पष्ट बाहरी लक्षण (जैसे चक्कर आना या थकान) महसूस नहीं होते। अक्सर लोग इसे अपनी 'अच्छी फिटनेस' समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ स्थितियों में यह बेहद खतरनाक हो सकता है। यदि धड़कन की यह कमी दिल के 'इलेक्ट्रिकल ब्लॉक' या साइनस नोड की गंभीर खराबी के कारण है, तो यह बिना चेतावनी दिए 'सडन कार्डियक अरेस्ट' का कारण बन सकता है। लंबे समय तक साइलेंट ब्रेडीकार्डिया रहने से शरीर के महत्वपूर्ण अंगों, विशेषकर मस्तिष्क और किडनी को धीरे-धीरे ऑक्सीजन की कमी होने लगती है, जिससे ऑर्गन फेलियर का जोखिम बढ़ जाता है।

क्या योग और प्राणायाम ब्रेडीकार्डिया के मरीजों के लिए सुरक्षित हैं, या कुछ खास आसनों से बचना चाहिए?

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा योग और प्राणायाम ब्रेडीकार्डिया के मरीजों के लिए सीमित तौर पर सुरक्षित और फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन इन्हें विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए। अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे शांत प्राणायाम हृदय की लय को सुधारने और तनाव कम करने में मदद करते हैं।

हालांकि, कुछ खास स्थितियों से बचना अनिवार्य है।

  • कुंभक (सांस रोकना): सांस को लंबे समय तक रोककर रखने वाले प्राणायाम से बचें, क्योंकि यह हृदय की धड़कन को और अधिक धीमा कर सकता है।
  • कपालभाति: बहुत तेजी से किया जाने वाला कपालभाति हृदय पर दबाव डाल सकता है, इसलिए इसे केवल बहुत धीमी गति से करें।
  • शीर्षासन और सर्वांगासन: ऐसे आसन जिनमें सिर नीचे और पैर ऊपर होते हैं, उनसे बचना चाहिए क्योंकि ये अचानक रक्तचाप और हृदय की गति को प्रभावित कर सकते हैं।
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