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Cheetah Project India : कूनो में पल रहे रिश्ते… ज्वाला चीता नानी और आशा दादी की पीढ़ियां गढ़ रही सफलता की नई कहानी

Cheetah Project India : भारत में कभी 1 लाख से ज्यादा चीते थे लेकिन कई दशकों से चीते देश में विलुप्तप्राय हो गए। प्रोजेक्ट चीता के अन्तर्गत कूनो नेशनल पार्क में 4 साल पहले 4 देशों से कुछ चीते अफ्रीकी देशों से लाकर छोड़े गए। सुखद बात यह है कि अब यहां 3-3 पीढ़ियां सर्वाइव कर रही हैं। अवधेश श्रीवास्तव से चीतों के बढ़ते वंश की कहानी विस्तार से जानिए।
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Aug 31, 2026
Kuno Cheetah
पढ़िए प्रोजेक्ट चीता की सफलता की कहानी (Photo: Rajasthan Patrika)

Cheetah Project India : मध्यप्रदेश में श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में आमतौर पर देखने पर प्रोजेक्ट चीता सफलता की राह पर बढ़ रहा है, लेकिन इस प्रोजेक्ट में अब चीतों के रिश्तों की भावनाएं भी पल-बढ़ रही हैं। वर्तमान में कूनो में 4 देशों के चीते मौजूद हैं, लेकिन यहां चीतों की तीन पीढ़ियां भी अब आगे बढ़ रही हैं। 4 साल में यहां 10 से ज्यादा प्रजनन होने के चलते अब मादा चीताएं दादी-नानी भी बन रही हैं। यही वजह है कि कूनो में प्रजनन की नींव रखने वाली मादा चीता ज्वाला जहां नानी बन चुकी है, वहीं मादा चीता आशा दादी का दर्जा पा चुकी है।

शावकों की मौत बड़ी समस्या, फिर भी बढ़ रहा वंश

कूनो में सबसे पहले प्रोजेक्ट में नामीबियाई मादा चीता ज्वाला ने 29 मार्च 2023 को 4 शावकों को जन्म दिया, लेकिन उसमें से 3 की मौत हो गई और एक शावक बची, जो अब मादा चीता मुखी नाम से जानी जाती है। इसी मुखी ने 20 नवंबर 2025 को 5 शावकों को जन्म दिया। यही वजह है कि ज्वाला नानी बन गई। वहीं मुखी का जिस नर चीते से संपर्क हुआ, वो आशा का बेटा था। लिहाजा आशा चीता दादी बन गई। यही नहीं चीतों के रिश्तों में मादा चीता गामिनी भी नानी बन गई थी और उसकी शावक केजीपी-12 ने 11 अप्रेल 2026 को 4 शावकों केा जन्म दिया था, लेकिन एक माह बाद ही चारों शावक मृत मिले।

कूनो में 4 देशों के चीते बढ़ा रहे कुनबा

भारत में 70 साल बाद फिर से बसाए गए चीतों के इस प्रोजेक्ट चीता में बीते 4 सालों में यहां 4 देशों के चीते बेहतर तरीके से सर्वाइव करते नजर आ रहे हैं। यानी प्रोजेक्ट में भारत, नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना देशों के चीते भारत में चीतों की एक नई पीढ़ी-प्रजाति तैयार कर रहे हैं। विशेष बात ये है कि प्रोजेक्ट के अंतर्गत कूनो में विदेशी चीतों से डेढ़ गुना संख्या भारतीय चीतों की है और ये भारतीय चीते अब अपना नया कुनबा भी बढ़ा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 17 सितंबर 2022 को प्रोजेक्ट चीता प्रारंभ हुआ और करीब 4 साल का समय हो गया है और प्रोजेक्ट सफलता की ओर बढ़ रहा है।

4 वर्ष में 40 शावकों का हुआ जन्म, 32 जीवित

कूनो नेशनल पार्क में 4 साल में कुल 40 से अधिक शावकों का जन्म हुआ है, जिसमें वर्तमान में 32 शावक जीवित हैं। विशेष बात ये है कि ये भारतीय चीते भी अब अपना कुनबा बढ़ा रहे हैं। यही वजह कि भारत में जन्मी पहली मादा चीता मुखी ने भी पिछले साल 4 शावकों को जन्म दिया और अब उसके शावक बेहतर तरीके से सर्वाइव कर रहे हैं।

कूनो में चार देशों के चीतों ने बढ़ाई वंशबेल

नामीबिया:- चीता प्रोजेक्ट 17 सितंबर 2022 को शुरू हुआ और इस दिन नामीबिया से 8 चीते लाए गए। जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं कूनो के बाड़ों में छोड़ा। इन 8 चीतों में से वर्तमान में 3 जीवित हैं।

दक्षिण अफ्रीका:- चीता प्रोजेक्ट में 18 फरवरी 2023 को प्रोजेक्ट का दूसरा अध्याय तब शुरू हुआ, जब दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए, जिन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बाड़ों में रिलीज किया। इन 12 चीतों से वर्तमान में 8 जीवित हैं, जिनमें 3 गांधीसागर में और 5 कूनो में मौजूद हैं।

भारत:- प्रोजेक्ट में तीसरा अध्याय शुरू हुआ 29 मार्च 2023 को जब नामीबियाई मादा ज्वाला ने 4 शावकों को जन्म दिया। इसके साथ ही कूनो में भारतीय चीतों की पीढ़ी तैयार होने लगी। 29 मार्च 2023 से 11 अप्रेल 2026 तक 44 भारतीय शावकों का जन्म हुआ, जिसमें वर्तमान में 32 जीवित हैं।

बोत्सवाना:-चीता प्रोजेक्ट में चौथा अध्याय 28 फरवरी 2026 से शुरु हुआ, जब बोत्सवाना से 9 चीते लाए गए। ये बोत्सवाना के सभी चीते जीवित हैं और इनमें से 5 खुले जंगल में घूम रहे हैं।

Updated on:
31 Aug 2026 12:18 pm
Published on:
31 Aug 2026 12:18 pm