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क्या वेनेजुएला की संपत्ति को बचाने के लिए मादुरो ने क्रिप्टोकरेंसी को बनाई ढाल? समझिए पूरी रणनीति

वेनेजुएला संकट और अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने देश की सं​पत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का सहारा लिया था, ऐसा दावा सामने आया है। देश का सोना, तेल और अन्य संसाधनों को बेच कर बिटाकॉइन खरीदने की रणनीति पर अमेरिका जांच कर रहा है।

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Jan 11, 2026
मादुरो पर देश का सोना और तेल बेच कर बिटकॉइन खरीदने का दावा सामने आया है। (PC: IANS)

Venezuela Crisis: वेनेजुएला की राजनीति और वैश्विक क्रिप्टो इकोनॉमी को हिला देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद यह दावा तेज हो गया है कि उनकी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए अरबों डॉलर की संपत्ति को Bitcoin और Stablecoins में बदल दिया था। अनुमान है कि वेनेजुएला ने गुप्त रूप से करीब 6 लाख बिटकॉइन (600,000 BTC) जमा किए, जिनकी कीमत जनवरी 2026 तक 56 से 60 अरब डॉलर यानी लगभग 49 खरब रुपये आंकी जा रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ये आंकड़े अभी पूरी तरह प्रमाणित नहीं हैं और इन्हें लेकर वैश्विक स्तर पर बहस जारी है।

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अमेरिका के प्रतिबंध और क्रिप्टो की ओर झुकाव

2017 के बाद अमेरिका ने वेनेजुएला पर भ्रष्टाचार, विवादित चुनाव और मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। 2019 तक ये प्रतिबंध PDVSA (राज्य-स्वामित्व वाली तेल कंपनी) तक पहुंच गए, जिससे वेनेजुएला का ग्लोबल बैंकिंग सिस्टम से संपर्क टूट गया और अरबों डॉलर की संपत्तियां फ्रीज हो गईं। इसी के बाद वेनेजुएला ने पारंपरिक वित्तीय सिस्टम के विकल्प तलाशने शुरू किए, जहां क्रिप्टोकरेंसी को चुना गया।

Petro से लेकर Stablecoin तक का सफर

वेनेजुएला सरकार ने 2018 में Petro नाम का सरकारी डिजिटल टोकन लॉन्च किया, जिसे तेल भंडार से जोड़ा गया था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और भरोसे की कमी के चलते यह प्रोजेक्ट सफल नहीं हो पाया। इसके बाद PDVSA ने तेल व्यापार के भुगतान के लिए डॉलर से जुड़ी क्रिप्टो Stablecoins का इस्तेमाल शुरू किया, ताकि फ्रीज बैंकिंग चैनलों से बचा जा सके। इन डिजिटल माध्यमों ने पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से बाहर रहकर लेनदेन करने का रास्ता दिया।

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बिटकॉइन में सरकारी संपत्ति बदलने का दावा

सबसे बड़ा और विवादित दावा यह है कि मादुरो सरकार ने अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को चकमा देने के लिए राज्य की संपत्तियों को Bitcoin में बदल दिया। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि वेनेजुएला ने एक शैडो क्रिप्टो रिजर्व (Shadow Crypto Reserve) तैयार किया, जिसमें करीब 6 लाख BTC जमा हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि यह आंकड़ा ब्लॉकचेन पर पूरी तरह सत्यापित नहीं है और ये अनुमान इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स और एक्सट्रापोलेशन पर आधारित हैं।

49 खरब रुपये के बिटकॉइन में बदली गईं सरकारी संपत्तियां?

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए सोना, तेल राजस्व और अन्य संसाधनों से मिलने वाली आय को धीरे-धीरे बिटकॉइन में परिवर्तित किया। यहां तक कहा गया कि सरकार के पास करीब छह लाख बिटकॉइन का एक गुप्त भंडार हो सकता है, जिसकी कीमत लगभग 4.91 ट्रिलियन रुपये यानी 49 खरब रुपये आंकी जा रही है।

दावों पर उठते सवाल और विशेषज्ञों की राय

हालांकि, इन दावों को लेकर विशेषज्ञों के बीच मतभेद साफ नजर आते हैं। ब्लॉकचेन एनालिस्ट्स का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में बिटकॉइन होल्डिंग्स का कोई ठोस और सार्वजनिक सबूत अब तक सामने नहीं आया है। ब्लॉकचेन की पारदर्शिता को देखते हुए यदि इतनी बड़ी खरीद होती, तो उसके कुछ संकेत जरूर दिखाई देते। ज्यादातर आंकड़े खुफिया एजेंसियों के आकलन और अनुमान पर आधारित बताए गए हैं। इसी वजह से इन्हें पूरी तरह प्रमाणित मानने से विशेषज्ञ बचते नजर आ रहे हैं।

क्या सोना बेच कर खरीदा बिटकॉइन?

रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 से 2020 के बीच वेनेजुएला सरकार ने ओरिनोको माइनिंग आर्क क्षेत्र (Orinoco Mining Arc) से भारी मात्रा में सोना बेचा। विश्लेषकों का दावा है कि इस सोने की बिक्री से मिली रकम से बिटकॉइन खरीदा गया था और उस समय बिटकॉइन की कीमत अपेक्षाकृत कम थी। सोना बेचने के दस्तावेज तो मौजूद हैं, लेकिन अब तक कोई सीधा ऑन-चेन सबूत सामने नहीं आया है जो सोने की बिक्री को बिटकॉइन जमा करने से जोड़ सके।

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बिटकॉइन माइनिंग और बिजली संकट

वेनेजुएला में एक समय पर बिटकॉइन माइनिंग भी चर्चा का विषय रही थी। देश को गुरि डैम जैसे बड़े हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स से सस्ती बिजली मिलती थी, जिससे माइनिंग आकर्षक बन गई। शुरुआती दौर में सरकार ने इस गतिविधि को बढ़ावा दिया, लेकिन बाद में बिजली संकट, बार-बार पावर कट और ग्रिड की अस्थिरता के चलते सख्ती शुरू हो गई। 2024 तक हजारों माइनर्स के उपकरण जब्त किए जाने और कनेक्शन काटे जाने की खबरें सामने आईं, जिससे यह साफ हो गया कि माइनिंग के जरिए बड़े पैमाने पर स्थायी आय संभव नहीं हो सकी।

मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दावों की सच्चाई पर सवाल

मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी एजेंसियों ने कथित क्रिप्टो संपत्तियों को जब्त करने की संभावना पर जांच शुरू की है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिप्टो एसेट्स तक पहुंच उसकी प्राइवेट की (Private Keys) पर निर्भर करती है। बिना प्राइवेट की के संपत्ति जब्त करना लगभग असंभव है। यही वजह है कि इन कथित बिटकॉइन रिजर्व्स को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। बिना प्राइवेट की के दावा करना व्यावहारिक रूप से बेकार माना जाता है।

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Published on:
11 Jan 2026 07:00 pm
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