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US Tariff on India: क्या भारत पर 500% टैरिफ लगाने की तैयारी में हैं ट्रंप? लाना चाहते हैं यह बिल

अमेरिका में रूस प्रतिबंध बिल का प्रस्ताव लाया गया है, जिसके तहत 500 प्रतिशत टैरिफ की योजना भारत, चीन और ब्राजील पर दबाव बढ़ा सकती है। यह कदम यूक्रेन युद्ध और वैश्विक ऊर्जा बाजार की मौजूदा स्थिति में अहम माना जा रहा है।
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भारत

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Thalaz Sharma

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Updated: 8 Jan 2026, 10:45 AM IST

अमेरिका में लाए रूस प्रतिबंध बिल के प्रस्ताव को ट्रंप ने सहमति दे दी है। (PC: AI)

Trump 500% Tariff Bill: अमेरिका में रूस को लेकर एक नया राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरीकी सेनेटर लिण्डसे ने एक्स पर ट्वीट करते हुए बताया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंधों का समर्थन किया है। प्रस्तावित कानून में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कम से कम 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की बात कही गई है। इस कदम का असर भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर पड़ सकता है, जो रूस से कच्चा तेल खरीद रहे हैं। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन युद्ध को लेकर वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज बनी हुई हैं और ऊर्जा बाजार पहले से अस्थिर दौर से गुजर रहा है।

रूस प्रतिबंध बिल

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट करते हुए यह जानकारी दी है कि इस द्विदलीय रूस प्रतिबंध बिल को डोनाल्ड ट्रंप की सहमति मिल चुकी है। इस कानून का उद्देश्य उन देशों पर आर्थिक दबाव बनाना है, जो रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर यूक्रेन के खिलाफ रूस की जंग लड़ने की ताकत को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, रूस से अमेरिका आने वाले सभी सामान और सेवाओं पर उनकी मौजूदा कीमत से 500 फीसदी अधिक टैरिफ लगाया जा सकता है। इसे यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में रूस की सैन्य गतिविधियों को सीमित करने के एक आर्थिक हथियार के रूप में देखा जा रहा है।

भारत और अन्य देशों पर संभावित असर

लिंडसे ने ट्वीट में इस प्रस्तावित कानून के तहत भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों का नाम प्रमुख रूप से लिया है। ये देश बीते कुछ समय में रूस से तेल आयात बढ़ाने वाले प्रमुख खरीदारों में रहे हैं। अमेरिका का मानना है कि सस्ते रूसी तेल की खरीद से रूस को आर्थिक मजबूती मिलती है। इस बिल के लागू होने की स्थिति में इन देशों से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर अतिरिक्त टैरिफ का खतरा बढ़ सकता है। इससे व्यापारिक संबंधों और वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है, खासकर उन सेक्टरों में जो अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं।

कूटनीतिक दबाव

रूस प्रतिबंध बिल ऐसे समय में चर्चा में आया है, जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले ही कीमतों की अस्थिरता से जूझ रहा है। यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व तनाव और आपूर्ति सीमाओं ने तेल बाजार को संवेदनशील बना रखा है। अमेरिका इस कानून को एक कूटनीतिक दबाव के तौर पर देख रहा है, जिससे रूस पर बातचीत के लिए दबाव बढ़ाया जा सके। आने वाले दिनों में इस बिल पर मतदान और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया वैश्विक स्तर पर कई देशों को प्रभावित कर सकती है।