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अमेरिका में भी मिलता है भारत की तरह मिड डे मील, जानिए क्या है Donald Trump की नई पॉलिसी

Nutrition: डोनाल्ड ट्रंप ने 'होल मिल्क फॉर हेल्दी किड्स एक्ट' पर हस्ताक्षर किए। स्कूलों में अब फैट-फ्री दूध की जगह मलाईदार दूध और हाई-प्रोटीन डाइट मिलेगी।

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Jan 18, 2026
अमेरिका की नई डाइट पॉलिसी के अनुसार अब स्कूलों में मलाईदार दूध मिलेगा। (फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)

Donald Trump new school lunch policy : भारत की तर्ज पर अमेरिका में भी स्कूली बच्चों के पोषण के लिए एक विशाल सरकारी तंत्र काम करता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump new school lunch policy) ने इस तंत्र में एक बड़ा बदलाव करते हुए 'होल मिल्क' (US School Lunch Program) को स्कूलों में वापस लाने के कानून पर मुहर लगा दी है। यह फैसला 'मेक अमेरिका हेल्दी अगेन' (MAHA) अभियान का हिस्सा है, जिसे स्वास्थ्य सचिव रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर के पोषण संबंधित सिद्धांतों पर तैयार किया गया है। पिछले एक दशक से अधिक समय से अमेरिकी स्कूलों में संघीय कानून के तहत केवल फैट-फ्री या कम वसा वाला दूध ही दिया जा सकता था। ट्रंप की नई नीति ने इस प्रतिबंध को खत्म कर दिया है। अब सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को बच्चों के लिए फ्लेवर्ड और अनफ्लेवर्ड होल मिल्क (मलाईदार दूध) रखना अनिवार्य होगा। प्रशासन का मानना है कि मलाईदार दूध बच्चों (Trump Whole Milk Act) के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए जरूरी है।

'मेक अमेरिका हेल्दी अगेन' अभियान के तहत अब स्कूलों में मलाईदार दूध मिलेगा।(फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)

RFK जूनियर का नया 'फूड पिरामिड'

ट्रंप सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए पुराने 'फूड पिरामिड' को पूरी तरह से उलट दिया है। इस नए पिरामिड में अनाज (कार्बोहाइड्रेट) को सबसे नीचे और पशु-आधारित प्रोटीन, डेयरी (जैसे पनीर और दूध), और ताजा सब्जियों को सबसे ऊपर रखा गया है। यह नई गाइडलाइन करीब 3 करोड़ बच्चों के स्कूल लंच और करोड़ों अन्य लोगों के सरकारी राशन कार्ड (SNAP) पर सीधे असर डालेगी।

भारत के 'मिड डे मील' से समानता

भारत का 'मिड डे मील' (अब पीएम-पोषण) दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल फीडिंग प्रोग्राम है। अमेरिका का नेशनल स्कूल लंच प्रोग्राम भी कुछ इसी तरह काम करता है, जहां कम आय वाले परिवारों के बच्चों को मुफ्त या रियायती दरों पर खाना दिया जाता है। जिस तरह भारत में क्षेत्रीय स्वाद और पोषण के आधार पर मेनू तय होता है, अब अमेरिका में भी 'प्रोटीन और फैट' आधारित संतुलित डाइट पर जोर दिया जा रहा है।

क्या है जनता और विशेषज्ञों की राय ?

डेयरी उद्योग: अमेरिकी किसानों ने इस फैसले को 'ऐतिहासिक' बताया है। उनका कहना है कि इससे दूध की खपत बढ़ेगी और बच्चों को बेहतर पोषण मिलेगा।

विपक्ष और कुछ एक्सपर्ट्स: कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अधिक 'सैचुरेटेड फैट' (Saturated Fat) और रेड मीट के सेवन से भविष्य में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

व्हाइट हाउस ने की आगे की तैयारी

व्हाइट हाउस के अनुसार, अगले चरण में स्कूलों के भोजन से फूड डाइज (Food Dyes) और अत्यधिक चीनी को हटाने के लिए कड़े नियम बनाए जाएंगे। कृषि विभाग (USDA) अब नए दिशा-निर्देशों के आधार पर स्कूलों के लिए नए मेनू कार्ड तैयार कर रहा है, जो 2026 के शैक्षणिक सत्र से पूरी तरह प्रभावी होंगे।

कूटनीति और घरेलू राजनीति

बहरहाल, इस नीति का एक सिरा राजनीति से भी जुड़ा है। मलाईदार दूध की वापसी से ट्रंप ने अपने सबसे बड़े समर्थक वर्ग 'डेयरी किसानों' को खुश किया है। वहीं, रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर के साथ मिल कर उन्होंने एक ऐसा 'हेल्थ मूवमेंट' शुरू किया है, जो अमेरिका की पुरानी फार्मास्युटिकल और प्रोसेस्ड फूड लॉबी को सीधे चुनौती दे रहा है।

(वॉशिंगटन पोस्ट समूह से संबधित ब्लूमगबर्ग का यह आलेख patrika.com पर दोनों समूहों के बीच विशेष अनुबंध के तहत पोस्ट किया गया है।)

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