Fitness Trends India : भारतीय सिर्फ क्रिकेट के दीवाने नहीं हैं, अब लोग जिम में भी जमकर पसीना बहा रहे हैं। जानिए भारत और अमेरिका के फिटनेस कल्चर का फर्क, जो आपकी लाइफस्टाइल भी बदल सकता है।
Fitness Trends India: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में 'फिटनेस' सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि जीने का तरीका बन गया है। अक्सर सुबह-सुबह पार्क में तेज कदमों से चलता हुआ, कोई योग करता हुआ तो कोई भागता हुआ नजर आ जाता है। देश में जिम में पसीना बहाने वाले भी बढ़ रहे हैं। भारत में खेल की बात शुरू होते ही क्रिकेट पर बात होने लगती है और खत्म भी वहीं पर हो जाती है। वहीं, इस मामले में अमेरिका के लोगों का अंदाज कुछ अलग ही है। चलिए जानते हैं कि अमेरिकी फिटनेस के लिए क्या अलग कर रहे हैं।
भारत की गलियों में अगर आप किसी बच्चे से पूछें कि बड़े होकर क्या बनोगे, तो उनके में जवाब अक्सर 'विराट कोहली' या 'रोहित शर्मा' बनना शामिल होता है। यहां खेल का मतलब ही क्रिकेट है। नीलसन रिपोर्ट के अनुसार करीब 66.1% भारतीय आबादी किसी न किसी रूप में क्रिकेट से जुड़ी है। चाहे वो प्लास्टिक की गेंद से गली में खेलना हो या फिर टीवी के सामने बैठकर मैच देखते हुए चीखना। मैक्स बूपा वॉक फॉर हेल्थ सर्वे के मुताबिक, 56% लोग चलना पसंद करते हैं, जबकि 44% लोग दौड़ना। इसमें न जिम की फीस लगती है और न ही किसी खास सामान की जरूरत होती है।
पिछले 5-6 सालों में भारत के शहरों का माहौल काफी बदल गया है। अब हर दूसरी गली में फिटनेस सेंटर या जिम नजर आने लगा है। 18 से 35 साल के युवाओं में जिम जाने का क्रेज तेजी से बढ़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, 15% से 18% शहरी युवा अब जिम, योग या एरोबिक्स को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बना चुके हैं। वहीं पीवी सिंधु और साइना नेहवाल जैसी खिलाड़ियों की कामयाबी ने बैडमिंटन (12%) को घरों से निकालकर बैडमिंटन कोर्ट तक पहुंचा दिया है। मध्यमवर्गीय परिवारों में बैडमिंटन सबसे पसंदीदा फैमिली गेम बन चुका है।
अमेरिका में फिटनेस का कल्चर भारत से काफी अलग है। वहां लोग फिट रहने के लिए कई तरह की एक्टिविटी करते हैं। स्टेटिस्टा कंज्यूमर इनसाइट्स (2025) रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में बास्केटबॉल सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है, जिसे करीब 33% लोग खेलते हैं। वहीं, अमेरिकी लोग सिर्फ जिम तक सीमित नहीं रहते। उन्हें खुली हवा और प्रकृति के बीच रहना ज्यादा पसंद है। वहां 27% लोग हाइकिंग करते हैं, इसका मतलब हर चौथा अमेरिकी पहाड़ों और जंगलों में पैदल चलना पसंद करता है।
योग भारत की सदियों पुरानी परंपरा है, लेकिन आज यह एक ग्लोबल ब्रांड बन चुका है। आयुष मंत्रालय की एक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 11.2% लोग नियमित योग करते हैं और 13.4% लोग कभी-कभी योग करते हैं। कुल मिलाकर करीब 24% लोग किसी न किसी रूप में योग करते हैं। अब योग सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आईटी सेक्टर में काम करने वाले युवा भी तनाव कम करने के लिए योग का सहारा ले रहे हैं। वहीं अमेरिका में भी योग और 'माइंडफुलनेस' का चलन तेजी से बढ़ा है।
भारत के आंकड़ों में पुरुष, महिलाओं के मुकाबले करीब 2.5 गुना ज्यादा हिस्सा लेते हैं। इसकी बड़ी वजह सामाजिक माहौल और सुरक्षा से जुड़ी परेशानियां हैं। शहरों में अब हालात बदल रहे हैं। महिलाएं जिम, जुम्बा, डांस और योग को ज्यादा पसंद कर रही हैं। वहीं अमेरिका में यह अंतर काफी कम है। वहां महिलाएं और पुरुष लगभग बराबर संख्या में खेल और एडवेंचर गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।
भारत के आंकड़ों में एक बड़ी खाई नजर आती है। हमारे यहाँ पुरुषों की भागीदारी महिलाओं के मुकाबले 2.5 गुना ज्यादा है। इसकी बड़ी वजह सामाजिक ढांचा और सुरक्षा है। हालांकि, शहरों में यह ट्रेंड बदल रहा है। महिलाएं अब जिम की जगह जुम्बा, डांस और योग को ज्यादा तरजीह दे रही हैं। अमेरिका में यह अंतर काफी कम है, वहाँ महिलाएं और पुरुष लगभग बराबर संख्या में स्पोर्ट्सऔर एडवेंचर गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।
भारत के लोग दो हिस्सों में बसे हैं। एक तरफ शहर वाले, जहां पेड जिम का बाजार हर साल करीब 10% की रफ्तार से बढ़ रहा है। दूसरी तरफ गांव वाले, जहां आज भी फिटनेस के लिए सुबह उठकर दंड- बैठक लगाना, कुश्ती और कबड्डी खेलना पसंद है। प्रो-कबड्डी लीग (Pro Kabaddi League) ने कबड्डी को फिर से नई पहचान दी है। अब शहरों में भी मिट्टी में खेले जाने वाले इस खेल में दिलचस्पी लेने लगे हैं।
अमेरिका में लोगों की पसंद भारत से काफी अलग है। वहां शिकार और मछली पकड़ना भी लोगों के पसंदीदा शौक में शामिल है। करीब 21% अमेरिकी वयस्क इन गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। भारत में वन्यजीव कानूनों की वजह से यह संभव नहीं है, लेकिन यहां लोग अब एडवेंचर स्पोर्ट्स की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। ट्रैकिंग और रिवर राफ्टिंग का क्रेज काफी बढ़ रहा है।
पिछले कुछ सालों में भारत में मैराथन का चलन तेजी से बढ़ा है। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में मैराथन के समय हजारों लोग सड़कों पर दौड़ते नजर आते हैं। वही अब रनिंग (7%) का ग्राफ धीरे-धीरे बढ़ रहा है। इसके साथ ही साइकिलिंग (8%), जो पहले सिर्फ आने- जाने का साधन मानी जाती थी, अब स्टेटस सिंबल बन गई है। सड़को पर दिखाई देने वाले साइकिलिंग क्लब अब आम बन चुके हैं।
भारत अभी फीफा वर्ल्ड कप ( FIFA World Cup) से दूर है, लेकिन यहां फुटबॉल चाहने वालों की कोई कमी नहीं है। करीब 10% लोग फुटबॉल को पसंद करते हैं। पश्चिम बंगाल और केरल पहले से ही फुटबॉल के बड़े केंद्र रहे हैं। वहीं उत्तर- पूर्व के राज्यों के साथ-साथ दिल्ली और मुंबई के स्कूलों में भी फुटबॉल, क्रिकेट को टक्कर दे रहा है। भारत अब सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं है।