Flight Medical Emergency in Air India : एयर इंडिया एक्सप्रेस की जयपुर-बेंगलुरु फ्लाइट (Air India Express Flight) में एक साल के मासूम की मौत की खबर आ रही है। आइए, डॉक्टर्स से समझते हैं कि फ्लाइट में ट्रैवल करा बच्चों के लिए कितना सुरक्षित और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी।
Flight Medical Emergency in Air India : उड़ती फ्लाइट, चीखती-चिल्लाती, मदद मांगती मां… ताकि उसके बच्चे की जान बच जाए। मंगलवार को एयर इंडिया एक्सप्रेस की जयपुर-बेंगलुरु फ्लाइट (Air India Express Flight) में ऐसी घटना घटी। इस मिड एयर क्राइसिस के कारण इंदौर में इमरजेंसी लैंडिंग (Indore Airport Flight Emergency Landing) करानी पड़ी लेकिन, 1 साल के मासूम की जान बच ना पाई। आइए, इस घटना को लेकर अबतक सामने आई जानकारी को समझते हैं। साथ ही डॉ. रोहित गुप्ता (नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ) और डॉ. हिमांशु गुप्ता (सीनियर फिजिशियन) से जानते हैं कि बच्चे को फ्लाइट में ले जाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए-
मीडिया में सामने आई जानकारी के मुताबिक, एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट (IX1240) जयपुर से शाम 5:30 बजे उड़ान भरी थी। इस फ्लाइट में मोहम्मद अजलान और फिरोजा अपने एक साल के बच्चे मोहम्मद अबरार के साथ यात्रा कर रहे थे। इनका बड़ा बेटा भी साथ था। परिवार जयपुर से बेंगलुरु अपने घर जा रहा था। उड़ती फ्लाइट में अचानक बच्चे को सांस लेने में गंभीर दिक्कत होने लगी। बच्चे की बिगड़ती हालत देखकर माता-पिता ने तुरंत केबिन क्रू को सूचित किया।
पायलट ने सूचना मिलने पर तत्काल सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर से संपर्क किया। यहां पर शाम करीब 7:20 बजे इंदौर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने मेडिकल इमरजेंसी कराने की अनुमति दी। फ्लाइट शाम 7:50 बजे सुरक्षित रूप से इंदौर एयरपोर्ट पर उतरी। जहां एयरोब्रिज पर डॉक्टरों की टीम, एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक मेडिकल उपकरण के साथ तैनात थी।
हालांकि, फ्लाइट में सवार एक यात्री डॉक्टर पहले से ही बच्चे को सीपीआर दे रहे थे ताकि बच्चे की जान बच पाए। एयरपोर्ट के मेडिकल स्टाफ ने भी सीपीआर जारी रखा और फिर डॉल्फिन हॉस्पिटल रेफर किया गया। दुर्भाग्यवश, अस्पताल पहुंचने से पहले ही बच्चे की मौत हो चुकी थी।
हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने मीडिया को जानकारी दी, बच्चे की तबीयत फ्लाइट में चढ़ने से पहले ही थोड़ी खराब थी। ये बात परिवार ने भी बताई थी। इसके साथ ही ये भी आशंका है कि उड़ान के दौरान बच्चे को पानी या दूध पिलाने के समय यह गलत तरीके से सांस की नली में जाने से चॉक कर गया हो।
भारतीय विमानन क्षेत्र में मेडिकल इमरजेंसी की कई खबरें सामने आती रहती हैं। इंडियन जर्नल ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन (Indian Journal of Aerospace Medicine) के अनुसार, प्रति 10 लाख यात्रियों पर लगभग 3 से 30 मेडिकल इमरजेंसी दर्ज की जाती हैं। कुल मेडिकल इमरजेंसी में से केवल 1.7% से 2% मामले इतने गंभीर होते हैं कि विमान को किसी अन्य नजदीकी एयरपोर्ट पर 'इमरजेंसी लैंडिंग' (Divert) करनी पड़ती है।
भारत में 2020 से 2025 के बीच तकनीकी खराबी और मेडिकल इमरजेंसी को मिलाकर औसतन हर साल 15-20 बड़ी 'इमरजेंसी लैंडिंग' की खबरें आती हैं।
DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, हवाई यात्रा के लिए 7 दिन से अधिक के नवजात को लेकर जा सकते हैं। यदि शिशु की आयु 7 दिन से कम है, तो केवल 'मेडिकल इमरजेंसी' जैसी स्थिति में ही डॉक्टर के प्रमाण पत्र के साथ यात्रा की अनुमति मिल सकती है। इस हिसाब से 1 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चे को फ्लाइट में लेकर जाना सेफ है।
डॉ. हिमांशु गुप्ता कहते हैं, फ्लाइट सुरक्षित है। हां, अगर बच्चे को फेफड़े में कोई संक्रमण या बीमारी, दिल की कोई बीमारी, निमोनिया, अस्थमा या सांस संबंधित दिक्कत है तो फ्लाइट से बचना चाहिए। क्योंकि, उड़ान भरने के बाद ऑक्सीजन का लेवल घटता है। एयर प्रेशर बिल्ड होता है।
उन्होंने आगे कहा, बच्चे को फीडिंग (दूध पिलाना) कराना भी सुरक्षित है। पर मेरी सलाह है कि लैंडिंग करते वक्त या टेक ऑफ के समय ऐसा करने से बचें। इन दोनों परिस्थिति में फ्लाइट अधिक हिलती-डुलती है। हालांकि, कई लोग एयर प्रेशर से बचने के लिए खुद कुछ खाते-पीते हैं। जबकि, ये सुरक्षित तरीका नहीं है। इसकी जगह आप बच्चे की कान में रूई लगा दें या अन्य कोई सुरक्षित उपकरण का इस्तेमाल कर सकते हैं। बस या ट्रेन में भी ट्रैवल करते समय जब वाहन रूके तभी बच्चे को दूध पिलाना सही होता है।
डॉ. रोहित गुप्ता का कहना है, फ्लाइट में जाना सुरक्षित है। पर, उससे पहले बच्चे का स्वास्थ्य देख लें। अगर आपके बच्चे को नॉर्मल सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार है तो यात्रा करने से बचें। क्योंकि, ऐसे सामान्य हेल्थ इश्यू से भी बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होती है। संभावना है कि फ्लाइट में ऑक्सीजन कम होने के कारण ये दिक्कत और बढ़ जाए। इसलिए, बीमार बच्चे को लेकर कभी भी ट्रैवल ना करें।
इस पर उनका कहना है कि फ्लाइट में केबिन क्रू होती हैं। आप उनको तत्काल सूचित करें। साथ आपके बच्चे को कोई हेल्थ इश्यू है तो उसको छिपाए नहीं ताकि सही इलाज हो पाए। सांस लेने की दिक्कत होने पर ऑक्सजीन मास्क लगा सकते हैं। बेहोश होने पर सीपीआर दिया जा सकता है। इसी तरह ट्रेन में भी बच्चे की तबीयत खराब हो तो फौरन इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें या सोशल मीडिया के जरिए भी रेलवे को जानकारी दें ताकि समय पर मदद मिल पाए।