Dineshwari Netam Life Story: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से अक्सर हिंसा, मुठभेड़ और डर की खबरें सामने आती रही हैं, लेकिन इन्हीं इलाकों से बदलाव और उम्मीद की कहानियां भी निकलती हैं।
Former Woman Naxalite Dineshwari Netam: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से अक्सर हिंसा, मुठभेड़ और डर की खबरें सामने आती रही हैं, लेकिन इन्हीं इलाकों से बदलाव और उम्मीद की कहानियां भी निकलती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी धमतरी जिले की पूर्व महिला नक्सली दिनेश्वरी नेताम की है, जिन्होंने बंदूक का रास्ता छोड़कर शिक्षा और समाज सेवा का मार्ग चुना और आज नई पीढ़ी के भविष्य को संवारने में अपना योगदान दे रही हैं।
कभी नक्सली संगठन की सक्रिय सदस्य रहीं दिनेश्वरी नेताम ने वर्ष 2014-15 में अपने पति कैलाश कोरसा के साथ आत्मसमर्पण किया था। उस समय दिनेश्वरी की शिक्षा केवल छठवीं कक्षा तक ही सीमित थी, लेकिन उन्होंने हालात के आगे हार मानने के बजाय खुद को बदलने का संकल्प लिया। आत्मसमर्पण के बाद उन्होंने ओपन स्कूल के माध्यम से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी की। यह कदम उनके जीवन का बड़ा मोड़ साबित हुआ। नक्सल पुनर्वास नीति के तहत उन्हें सरकारी नौकरी का अवसर मिला और आज वे कुरूद ब्लॉक के एक सरकारी छात्रावास में प्यून (चपरासी) के पद पर कार्यरत हैं।
आज दिनेश्वरी का जीवन पूरी तरह बदल चुका है। जिस व्यवस्था से कभी दूरी थी, उसी सरकारी व्यवस्था का हिस्सा बनकर वे छात्रावास में रह रहे बच्चों की देखभाल और व्यवस्था में सहयोग कर रही हैं। उनका कहना है कि हथियार छोड़ने के बाद अब वे खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं और सुकून भरा जीवन जी रही हैं।
दो बेटियों की मां दिनेश्वरी अपने परिवार के साथ सामान्य और खुशहाल जीवन जी रही हैं। उनकी बड़ी बेटी तीन साल की है, जबकि छोटी बेटी अभी तीन महीने की है। वे चाहती हैं कि उनकी बेटियां अच्छी शिक्षा प्राप्त कर समाज में सम्मान के साथ आगे बढ़ें।
जानकारी के अनुसार, दिनेश्वरी नेताम धरमबांधा एरिया कमेटी की सदस्य थीं, जबकि उनके पति कैलाश कोरसा इसी कमेटी में कमांडर के पद पर सक्रिय थे। लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों में शामिल रहने के बाद दोनों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित नक्सली दंपत्ति में से किसी एक को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान है। इसी के तहत दिनेश्वरी को नौकरी मिली और उन्होंने अपने जीवन की नई शुरुआत की।
धमतरी जिले में पिछले कुछ वर्षों में नक्सल गतिविधियों में काफी कमी आई है। वर्ष 2009 से 2026 के बीच जिले में कुल 24 नक्सली घटनाएं दर्ज की गईं। इन घटनाओं में 11 नक्सली मारे गए, जबकि कई बड़े कमांडर और लीडरों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना।
एक समय ऐसा भी था जब एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली बालकृष्ण उर्फ माडेम, गणेश और जलपति जैसे बड़े नक्सली नेता इस इलाके में सक्रिय रहते थे। हालांकि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के चलते वर्ष 2025 के एक एनकाउंटर में जलपति को मार गिराया गया। वहीं लंबे समय तक जिले में दहशत फैलाने वाला कुख्यात नक्सली सत्यम गावड़े भी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारा गया।
जुलाई 2011 से 2026 के बीच धमतरी जिले में कुल 17 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें से कई लोग अब सामान्य जीवन जी रहे हैं। इनमें से दो पूर्व नक्सली वर्तमान में प्यून की नौकरी कर रहे हैं, जबकि एक आत्मसमर्पित नक्सली के बेटे को भी प्यून की नौकरी मिली है।
ये आंकड़े बताते हैं कि सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के प्रयासों से नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में धीरे-धीरे बदलाव की हवा बह रही है। आज दिनेश्वरी छात्रावास में बच्चों के बीच रहकर न केवल अपने परिवार का भविष्य संवार रही हैं, बल्कि यह संदेश भी दे रही हैं कि हथियार नहीं, बल्कि शिक्षा और सकारात्मक सोच ही समाज को आगे बढ़ाने का रास्ता दिखाती है।