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Patrika Exclusive: 2047 तक दोगुनी होगी जल भंडारण क्षमता, छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश टोप्पो ने बताया पूरा प्लान

Chhattisgarh Water Vision 2047: छत्तीसगढ़ में कम बारिश और एल-नीनो की आशंकाओं के बीच जल प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे समय में पत्रिका से खास बातचीत में जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो ने विभाग का दीर्घकालिक विजन साझा किया।
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Jul 02, 2026
Chhattisgarh Irrigation Projects
सचिव राजेश टोप्पो (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर@ अश्वनी कुमार प्रभात। Chhattisgarh Water Storage Capacity: छत्तीसगढ़ में मानसून को लेकर चिंता की लकीर दिख रही है। एल-नीनो का प्रभाव भी पड़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में जल संसाधन विभाग का महत्व बढ़ गया है। आने वाले दिनों में पेयजल की जरूरतें, बांधों की मरम्मत और सरकार के विजन को लेकर पत्रिका ने जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो से खास बातचीत की।

जिन्होंने कहा, जल संसाधन विभाग आने वाले वर्षों में केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल संरक्षण, स्मार्ट प्रबंधन, पर्यटन, औद्योगिक विकास और तकनीकी नवाचार के जरिए राज्य के विकास में बड़ी भूमिका निभाएगा। विभाग का फोकस स्पष्ट है हर स्थिति में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और संसाधनों का अधिकतम सदुपयोग करना। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश-

प्रश्न: जल संसाधन विभाग आम लोगों से सीधे जुड़ा विभाग है। इसे आप कितना चुनौतीपूर्ण मानते हैं?

जवाब: जल संसाधन विभाग बेहद महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण विभाग है, क्योंकि इसका प्रभाव प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों रूप से हर व्यक्ति पर पड़ता है। पहले इसे सिंचाई विभाग के नाम से जाना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसका नाम बदलकर जल संसाधन विभाग किया गया। इसका उद्देश्य केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि जल को एक संसाधन के रूप में देखना है। यदि पानी के उपयोग की प्राथमिकता देखें तो इसके चार प्रमुख उपयोग हैं। सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण उपयोग है पीने का पानी।

यह विभाग का सबसे बड़ा दायित्व है कि प्रदेश के लोगों के लिए पीने का पानी उपलब्ध कराया जाए। दूसरा है निस्तार, जिसमें पशुओं के लिए पानी, नहाने-धोने और अन्य घरेलू उपयोग शामिल हैं। तीसरा उपयोग है सिंचाई, अर्थात कृषि के लिए और चौथा प्रमुख उपयोग है उद्योगों के लिए जल उपलब्ध कराना। यही चार प्रमुख सेगमेंट हैं, जिनकी पूर्ति के लिए विभाग निरंतर कार्य करता है।

प्रश्न: इस वर्ष कम बारिश की आशंका जताई जा रही है। विभाग ने क्या तैयारी की है?

जवाब: यह वर्ष निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण है। मौसम विभाग ने वर्ष की शुरुआत से ही एल-नीनो के प्रभाव की चेतावनी दी थी। इसका असर सतही और भूमिगत जल दोनों पर पड़ सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने विशेष कार्ययोजना बनाई है। सबसे पहले हमने पीने के पानी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसी रणनीति के तहत रबी सीजन में जलाशयों से पानी छोड़ने को सीमित किया गया। इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है।

पिछले वर्षों में जून तक जलाशयों में सामान्यतः 20-25 फीसदी पानी बचता था, लेकिन इस वर्ष लगभग 55 फीसदी जल भंडारण है। आने वाले छह महीनों के लिए पीने और निस्तार के पानी को लेकर विभाग पूरी तरह तैयार है। आवश्यकता पड़ी तो सिंचाई और उद्योगों को जल आपूर्ति में कटौती की जा सकती है, लेकिन पीने के पानी में कमी नहीं होने दी जाएगी।

प्रश्न: महानदी जल विवाद के समाधान को लेकर क्या स्थिति है?

जवाब: महानदी जल विवाद छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चल रहा है। ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, लेकिन सबसे सकारात्मक बात यह है कि दोनों राज्य अब आपसी सहमति से समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हमारा मानना है कि न्यायालय के फैसले की बजाय आपसी सहमति से निकला समाधान अधिक टिकाऊ होगा। इससे दोनों राज्यों के हित सुरक्षित रहेंगे। हमें उम्मीद है कि इस वर्ष के अंत तक कोई सकारात्मक परिणाम सामने आएगा।

प्रश्न: जलाशयों में पर्यटन की संभावनाओं को कैसे देखते हैं?

जवाब:छत्तीसगढ़ में जलाशयों के आसपास पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। पिछले वर्षों में कई बड़े होटल और रिसॉर्ट जलाशयों के आसपास विकसित हुए हैं। पर्यटन विभाग नई नीति पर काम कर रहा है। हमारा प्रयास है कि हर जिले की प्रमुख जल संरचनाओं के आसपास पर्यटन सुविधाएं जैसे रिसॉर्ट, पिकनिक स्पॉट और मनोरंजन गतिविधियां विकसित हों। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन दोनों को लाभ होगा।

प्रश्न: सिंचाई परियोजनाओं में मुआवजा और भू-अर्जन से जुड़े मामले अक्सर सामने आते हैं। इसे लेकर क्या चुनौतियां हैं?

जवाब: आपने बिल्कुल सही मुद्दा उठाया। हमारे पास हाईकोर्ट में लंबित कई मामले मुआवजा और भू-अर्जन से जुड़े हैं। कई परियोजनाओं में किसानों की शिकायत रहती है कि उन्हें मुआवजा कम मिला, नहीं मिला, या समय पर नहीं मिला। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने नई व्यवस्था बनाई है। पहले भू-अर्जन के मामलों की निगरानी केवल परियोजना स्तर पर होती थी।

अब ईएनसी कार्यालय में अलग सेल बनाया गया है, जो विशेष रूप से भू-अर्जन मामलों की मॉनिटरिंग करता है। दूसरी बड़ी चुनौती यह है कि कई स्थानों पर किसान भूमि देना चाहते हैं, जबकि कई जगह भूमि अधिग्रहण का विरोध होता है। इसी कारण पाइपलाइन आधारित सिंचाई मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे बड़े स्तर पर भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता कम हो जाती है। हमें उम्मीद है कि इससे भविष्य में भू-अर्जन संबंधी समस्याओं का समाधान मिलेगा।

प्रश्न: 2030 और 2047 तक विभाग का विजन क्या है?

जवाब: हमारा दीर्घकालिक लक्ष्य बेहद स्पष्ट है। वर्तमान में राज्य की कुल जल भंडारण क्षमता लगभग 8000 एमसीएम है। हमारा लक्ष्य इसे 2027 से बढ़ाकर 16000 एमसीएम करना है। इसके साथ ही वर्तमान में राज्य के केवाल 32 फीसदी क्षेत्र तक सिंचाई सुविधा पहुंच पा रही है। इसे बढ़ाकर अगले दो दशकों में 54 से 55 फीसदी करने का लक्ष्य है। साथ ही उद्योगों विशेषकर स्टील और पावर सेक्टर की बढ़ती जल आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना बनाई जा रही है।

Published on:
02 Jul 2026 11:59 am