राजस्थान के रेगिस्तानी जिलों के लिए गुड न्यूज है। हेलीबोर्न जियोफिजिकल सर्वे में पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर जिले में जमीन के अंदर पानी का अथाह भंडार मिला है। पढ़ें स्पेशल रिपोर्ट-
राजस्थान में पानी की कमी एक बड़ी और पुरानी समस्या है। गर्मी के दिनों में तो स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि कई जिलों में ट्रेन के जरिए पानी भेजना पड़ता है।
प्रदेश के सर्वाधिक पानी की कमी वाले जिलों में जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, पाली, जालोर, भीलवाड़ा, फलोदी, बीकानेर, श्रीगंगानगर, चूरू, नागौर, सीकर और झुंझुनूं जिले का नाम है। यहां लंबे समय से लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
केन्द्रीय जलशक्ति मंत्रालय भारत सरकार की ओर से राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और पंजाब राज्य में सूखे स्थलों व भू-जल स्तर को देखने के लिए 2 चरणों में हेलीबोर्न जियोफिजिकल सर्वे करवाया गया था।
इसमें राजस्थान के बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर, जालोर, पाली, जैसलमेर, जोधपुर और सीकर जिले शामिल रहे। सर्वे का मकसद 65,500 स्क्वायर किलोमीटर क्षेत्र में भू-जल की स्थिति का पता लगाया जाना है।
पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर जिले में हुए हेलीबोर्न सर्वे से सूखे स्थलों में जमीन के अंदर कितना पानी है, इसकी जानकारी के साथ ही पुरानी जलधारा के नेटवर्क का पता लगाया जाना है। इसी के अंतर्गत 2021 में पोकरण कस्बे में भी सर्वे किया गया था।
हेलीबोर्न सर्वे से पानी की कमी वाले इलाकों, खासकर जैसलमेर जिले में राहत की उम्मीद जगी है। सर्वे में जिले में कई जगहों पर भूजल की उपलब्धता पाई गई, जहां पहले के अध्ययनों में इस्तेमाल लायक भूजल नहीं मिल पाया था।
सीएसआईआर-एनजीआरआई की ओर से राजस्थान राज्य भूजल बोर्ड और जैसलमेर जिला कलक्टर को भेजी गई एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार पोकरण विधानसभा क्षेत्र में 64 जगहों पर भूजल की संभावना पाई गई है। यह सर्वे केंद्रीय भूजल बोर्ड, एनजीआरआई हैदराबाद और राजस्थान सरकार के भूजल विभाग के सहयोग से किया गया था।
सर्वे में पोकरण के मुख्य इलाकों को शामिल किया गया था, जिसमें फलसूंड से छायण और धूसर से राजगढ़ तक का क्षेत्र शामिल है।
भूजल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास इणखिया ने पत्रिका डॉट कॉम से बातचीत में कहा कि भूजल के नजरिए से जैसलमेर जिले के अधिकांश हिस्से कम पानी वाले क्षेत्रों में आते हैं। यहां हमेशा पेयजल की समस्या बनी रहती है।
पोकरण के जिन इलाकों में सर्वे हुआ है वहां पेयजल का कोई स्रोत नहीं था, न ही यहां अब तक कभी पीने योग्य भूजल मिला था। सर्वे के परिणाम बहुत ही सकारात्मक हैं।
उम्मीद है कि वहां पानी मिलेगा और पेयजल की समस्या का समाधान होगा। यह खोज राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में पानी की समस्या का स्थाई समाधान दे सकती है। हेलीबोर्न सर्वे की रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है। अब राज्य सरकार आगे की योजना बनाएगी।
नारायण दास इणखिया ने कहा कि सर्वे में शामिल 64 जगहों में ऐसे गांव शामिल हैं, जहां अक्सर पीने के पानी की कमी होती है। सर्वे में भूजल रिचार्ज के लिए उपयुक्त जगहों की भी पहचान की गई है। इणखिया ने बताया कि जैसलमेर जिले में हेलीबोर्न सर्वे 15,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में किया गया था।
हेलीबोर्न जियोफिजिकल सर्वे में हेलिकॉप्टर में उच्च भू-भौतिकीय तकनीक के संयंत्र को लगाया जाता है, जो कि जमीन के नीचे 500 मीटर तक भूजल या एक्वीफर का स्पष्ट मानचित्र बना देता है।
इससे आगे भू-जल के आंकड़े बहुत कम समय में एकत्रित किए जाते हैं और भूजल संरक्षण पर काम भी किया जाता है। इसे ही हेलीबोर्न सर्वे कहा जाता है। यह तकनीक सीएसआईआर-एनजीआरआई हैदराबाद ने विकसित की है।
प्रदेश में घटते भूजल स्तर के बीच, जिन क्षेत्रों में अब तक मीठे पानी के स्रोत मौजूद थे, वहां भी भूगर्भ से निकलने वाले पानी में फ्लोराइड की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ रही है।
इसने भूगर्भ वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। पानी रिचार्ज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण जल में हानिकारक तत्वों की मौजूदगी खतरे की घंटी बनती जा रही है।
केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) की ताजा नेशनल कम्पाइलेशन ऑफ डायनामिक ग्राउंड वाटर रिसोर्सेज ऑफ इंडिया 2025 रिपोर्ट के अनुसार देश में सबसे अधिक भूजल दोहन पंजाब (156.36 प्रतिशत) में होता है। इसके बाद राजस्थान (147.11 प्रतिशत) और हरियाणा (136.75 प्रतिशत) का नंबर आता है। ये सभी राष्ट्रीय औसत 60.63 प्रतिशत से काफी अधिक है।
रिपोर्ट के नतीजों से पता चलता है कि भारत के कुल 6,762 ब्लॉकों में से 25 प्रतिशत को ओवर-एक्सप्लॉइटेड, क्रिटिकल या सेमी-क्रिटिकल कैटेगरी में रखा गया है। यह हालत 9 राज्यों पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पुडुचेरी में ज्यादा है। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर सालाना भूजल निकालने में मामूली कमी आई है।
राजस्थान को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि 302 ब्लॉकों में से 213 (70.53 प्रतिशत) ब्लॉकों में भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है।
इसके अलावा राज्य के 23 ब्लॉकों को (7.62 प्रतिशत) गंभीर और 27 अन्य ब्लॉकों को (8.94 प्रतिशत) अर्ध-गंभीर श्रेणी में रखा गया है। वर्तमान में राज्य में केवल 36 ब्लॉक (11.92 प्रतिशत) ऐसे हैं जहां भूजल की स्थिति सुरक्षित मानी जाती है। इसके अलावा तीन ब्लॉक (0.99 प्रतिशत) को 'सलाइन' कैटेगरी में रखा गया है।