
IBPS Exam CIBIL Score: देश में सरकारी नौकरी को अब तक केवल परीक्षा और मेरिट के आधार पर मिलने वाली बड़ी उपलब्धि माना जाता रहा है। लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है। सिर्फ सरकारी ही नहीं कई प्राइवेट नौकरियों में भी एचआर कैंडिडेट का सिबिल स्कोर चेक कर रहा है। अगर आपने लोन लिया है और आप डिफॉल्टर हैं, जिससे आपका क्रेडिट या सिबिल स्कोर खराब हो चुका है, तो समझिए नौकरी गई हाथ से। खास तौर पर बैंकों की नौकरी में अब सिबिल स्कोर को अनिवार्य कर दिया गया है।
यानी अब बैंकिंग सेक्टर में नौकरी (IBPS Exam CIBIL Score) पाने के लिए केवल लिखित परीक्षा, इंटर्व्यू पास करना ही काफी नहीं रह गया है बल्कि, आपकी निजी वित्तीय स्थिति भी खासतौर पर आपका क्रेडिट या सिबिल स्कोर भी उतना ही अहम माना जा रहा है। जरूर पढ़ें लोन-क्रेडिट या सिबिल स्कोर पर संजना कुमार की खास रिपोर्ट...
इंस्टिट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सलेक्शन (IBPS) के माध्यम से सेलेक्ट हुए 20 कैंडिडेट्स से उनकी नौकरी छीन ली गई, क्योंकि उनका क्रेडिट स्कोर खराब था। इस घटनाक्रम के बाद एक नई बहस शुरू हो गई है। क्या निजी वित्तीय व्यवहार अब सरकारी नौकरी का आधार बनाया जाना सही है?यह सवाल और जवाब पिछले दिनों सुर्खियों में बन आया, जब राज्यसभा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने वित्त मंत्रालय से यह सवाल पूछा, तो इस सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कि राष्ट्रीयकृत बैंकों की भर्ती परीक्षा आयोजित करने वाले IBPS ने 2023-24 (सीआरपी-XIII) की भर्ती प्रक्रिया में यह शर्त रखी थी। इसके तहत, बैंकिंग नौकरियों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का सिबिल स्कोर कम से कम 650 और एक हेल्दी क्रेडिट हिस्ट्री होना अनिवार्य था।
हालांकि, मंत्री ने स्पष्ट किया कि 2024-25 (सीआरपी-XIV) की भर्ती प्रक्रिया से यह शर्त हटा दी गई है। अब उम्मीदवारों को आवेदन के समय यह स्कोर लाना जरूरी नहीं है, लेकिन जॉइनिंग के समय उन्हें एक हेल्दी क्रेडिट हिस्ट्री दिखानी होगी। अगर किसी उम्मीदवार का सिबिल रिकॉर्ड अपडेट नहीं है, तो उसे बैंक से एनओसी लेनी होगी, अन्यथा ऑफर लेटर रद्द भी किया जा सकता है। इस बारे में अंतिम निर्णय संबंधित बैंक के हाथ में होगा।
पहले ICICI बैंक और फिर HDFC बैंक में डिप्टी मैनेजर रह चुके एक युवक ने अपने छोटे भाई के बिजनेस में मदद करने के लिए कई पर्सनल लोन लिए। शुरू में बिजनेस अच्छा चला, लेकिन एक एक्सीडेंट के बाद जैसे सबकुछ बदल गया। बिजनेस में नुकसान हुआ और लोन चुकाना मुश्किल हो गया। नतीजा यह हुआ कि वह कई लोन और क्रेडिट कार्ड की रकम समय पर नहीं चुका पाया।
बाद में इस शख्स ने SBI के सर्कल बेस्ड ऑफिसर (CBO) पद के लिए आवेदन किया। उसने परीक्षा (IBPS Exam CIBIL Score) दी, पास की, इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट भी क्लियर कर लिए। यहां तक कि उसे अपॉइंटमेंट लेटर भी मिल गया। लेकिन जॉइनिंग से पहले जब SBI ने उसकी CIBIL रिपोर्ट देखी, तो कई डिफॉल्ट और वसूली से जुड़ी शिकायतें सामने आ गईं।
SBI ने अपने नियमों के अनुसार, क्लॉज 1(E) का हवाला देते हुए कहा, 'जिन उम्मीदवारों की लोन हिस्ट्री ठीक नहीं है या जो CIBIL स्कोर में खराब रिकॉर्ड रखते हैं, वे बैंक की नौकरी के योग्य नहीं हैं। इस मामले पर बैंक का तर्क था कि बैंक कर्मचारी पब्लिक मनी यानी लोगों के पैसों से जुड़ा काम करते हैं, इसलिए उनका फाइनेंशियल अनुशासन भी मजबूत होना जरूरी है।
इस कैंडिडेट ने मद्रास हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। उसने कहा कि हालात ऐसे बन गए थे कि लोन चुकाना मुश्किल हो गया था, लेकिन उसकी मंशा खराब नहीं थी। उसने ये भी तर्क दिया कि SBI ने एक पत्र में कहा था कि लोन डिफॉल्ट को जॉइनिंग से पहले सुधारने का मौका दिया जा सकता है, इसलिए उसे भी एक अवसर जरूर मिलना चाहिए।
2 जून 2025 को मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले (IBPS Exam CIBIL Score) पर अपना फैसला सुनाया और कहा कि SBI का निर्णय सही है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि बैंक कर्मचारी पब्लिक मनी से डील करते हैं। ऐसे में अगर किसी की अपनी फाइनेंशियल हिस्ट्री ठीक नहीं है, तो उस पर यह जिम्मेदारी देना खतरे से खाली नहीं है। कोर्ट ने कैंडिडेट की याचिका खारिज करते हुए SBI के फैसले को जायज माना और युवक के हाथ से नौकरी निकल गई।
केंद्र सरकार ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंक, बोर्ड द्वारा संचालित संस्थाएं हैं और उन्होंने नए कर्मचारियों में वित्तीय अनुशासन विकसित करने के लिए यह नियम लागू किया है। खासकर, जिम्मेदार वित्तीय व्यवहार उन पदों पर अनिवार्य है, जहां कर्मचारियों को सार्वजनिक धन और लेनदेन को संभालने का काम सौंपा जाता है।
SBI अधिकारी ने एक उदाहरण भी शेयर किया, उन्होंने बताया कि एक कैंडिडेट का प्रोबेशनरी ऑफिसर (IBPS Exam CIBIL Score) के रूप में सिलेक्शन हुआ। अपॉइंटमेंट लेटर हाथ में लिए जब जब वह नौकरी जॉइन करने पहुंचा, तो उसे जॉइनिंग नहीं दी गई, उसे बताया गया कि आपका अपॉइंटमेंट कैंसिल कर दिया गया है। चूंकि उसका सिबिल स्कोर अच्छा नहीं था, वह डिफॉल्टर था और इसलिए वह बैंक में नौकरी करने की योग्यता नहीं रखता है।
यह मामला बताता है कि बैंक अब केवल चयन प्रक्रिया तक ही सीमित नहीं रहे हैं, वे कैंडिडेट्स की अंतिम जॉइनिंग से पहले भी उसके फाइनेंशियल बैकग्राउंड की सख्ती से जांच की जा रही है।
बैंक अधिकारी ने स्टूडेंट्स को सलाह भी दी है, उनका कहना है कि अगर लोन लेना आसान है, तो उसे चुकाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि…
[MBA कर रहे अजय भारती खुद बैंकिंग सैक्टर में जाना चाहते हैं, वे मानते हैं कि इसे तो कॉम्पिटिशन काटने का तरीका कह सकते हैं। जब कोई व्यक्ति एग्जाम देने जाता है, तो उसके माइंड में ये नहीं रहता कि उसका सिबिल स्कोर क्या है? ये तो कैंडिडेट्स पर प्रेशर बनाने जैसा है। अगर कोई डिफॉल्टर है भी तो उसकी परिस्थितियों को समझना ज्यादा जरूरी है। उसकी काबिलियत के आधार पर ही उसे नौकरी दी जानी चाहिए न कि केवल वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर।]IBPS के माध्यम से आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को जॉइनिंग के समय एक हेल्दी क्रेडिट हिस्ट्री बनाए रखना अनिवार्य है। न्यूनतम कट-ऑफ स्कोर क्या होगा? यह हर बैंक अपनी नीति के अनुसार तय करता है। आमतौर पर 650 या उससे अधिक के स्कोर को अच्छा माना जाता है। यह नियम उन उम्मीदवारों पर लागू नहीं होता जिनका कोई बैंक खाता नहीं है या जिनकी पिछली क्रेडिट हिस्ट्री नहीं है। ऐसे कैंडिडेट्स के लिए यह आवेदन की अनिवार्य शर्त नहीं है।
अब जानकारों की माने तो ये केवल बैंकिग सेक्टर या लोन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि UPSC के साथ ही राज्य स्तरीय परीक्षाओं के साथ ही, बिजली-पानी जैसे यूटिलिटी बिलों के भुगतान को भी क्रेडिट स्कोर में जोड़ने पर चर्चा चल रही है। बताते चलें कि कई कंपनियां अपने एम्प्लॉय को अपॉइंटमेंट देने से पहले क्रेडिट स्कोर चैक करने लगी हैं। तो आप भी रहें जागरूक और अलर्ट और ऐसी ही जानकारी देने वाली खबरें पढ़ने के लिए जुड़े रहिए patrika.com के साथ।