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Vande Ganga Abhiyan 2026: क्यों लबालब पानी वाले देश में जल बचाने की हम पर आ गई जिम्मेदारी? जल विशेषज्ञ से समझिए बर्बादी की कहानी

Vande Ganga: देश में पानी के संकट से बाहर आने के समाधान पर विचार नहीं किया गया तो हमारी जीडीपी की दर 6 प्रतिशत तक गिर जाएगी। इसके चलते महंगाई बढ़ेगी। बिजली संकट पैदा होगा। पानी के संकट के चलते हमें क्या दुष्प्रभाव झेलना होगा और इससे बाहर आने का रास्ता क्या होगा? इन सभी मुद्दों पर जल विशेषज्ञ डॉ. सुनील चतुर्वेदी से पत्रिका ने विशेष बातचीत की। आप भी विस्तार से पढ़िए।

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Water Crisis Water Conservation

आज से जल के संरक्षण के लिए वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान 2026 शुरू किया गया है। (Photo: Sunil Chaturvedi's FB)

Vande Ganga Abhiyan 2026: भारत में नदियां सिर्फ जलदायिनी ही नहीं हैं। ये नदियां हमारे देश की सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक ताकत को परिभाषित करती हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों की नदियां उन इलाकों की जीवनरेखा हैं। गंगा को सभी नदियों में श्रेष्ठ माना जाता है। यह करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी हुई है। यही वजह है कि राजस्थान सरकार ने आज (Ganga Dashmi) से शुरू होकर 5 जून 2026 (World Environment Day) तक चलने वाले अभियान का नाम वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान (Vande Ganga Jal Sanrakshan Jan Abhiyan 2026) रखा है। इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार और जल स्रोतों को प्रदूषण (water Pollution) से मुक्ति दिलाना है। जल और पर्यावरण के विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अभियान पूरी दुनिया में मनाने की दरकार है।

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