
India Rank in World Trade : दुनिया का व्यापार तेजी से बदल रहा है। वैश्विक बाजार अब एशिया की ओर झुकता दिखाई दे रहा है। चीन आज भी दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक देश बना हुआ है, लेकिन भारत भी धीरे-धीरे अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है। पिछले एक दशक के आंकड़े बताते हैं कि भारत का माल निर्यात लगातार बढ़ा है और अब दुनिया के प्रमुख निर्यातकों की सूची में जगह बना चुका है। लेकिन भारत और चीन के बीच अभी भी बड़ा अंतर है।
विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization) के अनुसार पिछले 10-12 सालों में भारत के व्यापार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। साल 2013-14 में भारत विदेशों में सिर्फ 312 अरब डॉलर का निर्यात करता था और दुनिया के बड़े बाजारों में हमारी पहुंच बहुत कम थी। लेकिन साल 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर करीब 445 अरब डॉलर पहुंच गया है। इसमें 130 अरब डॉलर से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी हुई है। भारत ने मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां, गाड़ियों के पार्ट्स और इंजीनियरिंग के सामान जैसी बेहतरीन चीजें बनाकर दुनिया भर में अपनी काफी बढ़त बनाई है। इसी वजह से दुनिया की बड़ी-बड़ी विदेशी कंपनियां अब भारत को सामान बनाने का एक बड़ा केंद्र मान रही हैं।
आंकड़ों के अनुसार, दुनिया का कुल व्यापार लगभग 26.3 ट्रिलियन डॉलर का है, जिसमें चीन 3.77 ट्रिलियन डॉलर 14.4% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा निर्यातक देश है। इसके बाद अमेरिका 2.18 ट्रिलियन डॉलर दूसरे और जर्मनी 1.76 ट्रिलियन डॉलर तीसरे स्थान पर आते हैं। निर्यातकों की इस सूची में नीदरलैंड, हांगकांग, जापान, इटली, दक्षिण कोरिया, यूएई और फ्रांस जैसे देश भी प्रमुखता से शामिल हैं। भारत 445 अरब डॉलर के निर्यात और 1.7% वैश्विक हिस्सेदारीके साथ दुनिया के टॉप 20 देशों में जगह बनाए हुए है, जहां वह स्पेन के साथ बराबरी पर है।
चीन और भारत के निर्यात एक्सपोर्ट में बहुत बड़ा अंतर है चीन जहां 3.77 ट्रिलियन डॉलर का सामान बाहर भेजता है, वहीं भारत सिर्फ 445 अरब डॉलर पर है। चीन करीब 8.5 गुना आगे है। यही वजह है कि इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और रोजमर्रा के सामानों के मामले में पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर चीन का कब्जा है। लेकिन समय बदल रहा है, दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां सिर्फ चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं और चाइना प्लस वन नीति के तहत दूसरे देशों का रुख कर रही हैं , जिसका सीधा फायदा भारत को मिल रहा है और यहां नई फैक्ट्रियां ,कंपनियां आ रही हैं।
Indian Economy: भारत के पास आज दो सबसे बड़ी ताकतें हैं। पहला बहुत बड़ा बाजार और दूसरा हमारी युवा आबादी। इसके चलते हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मोबाइल बनाने के मामले में भारत ने कमाल की रफ्तार पकड़ी है और दुनिया के बड़े-बड़े ब्रांड्स अब यहीं अपने फोन बना रहे हैं। दवाइयों के निर्माण के मामले में मात्रा के हिसाब से भारत का विश्व में तीसरे स्थान है। इसके अलावा इंजीनियरिंग का सामान, गाड़ियों के पार्ट्स, कपड़े, आईटी सर्विसेज और केमिकल जैसी चीजें विदेशों में एक्सपोर्ट को लगातार बढ़ा रही हैं। सरकार की पीएलआई (PLI) स्कीम कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने पर मिलने वाली छूट ने इस पूरी तरक्की में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उद्योगों को एक नई रफ्तार दी है और भारत का निर्यात काफी तेजी से बढ़ रहा है।
भारत के सामने अभी कुछ चुनौतियां भी हैं। यहां सामान को एक जगह से दूसरी जगह भेजने का खर्च लॉजिस्टिक्स लागत दूसरे देशों के मुकाबले काफी ज्यादा है, इसलिए पोर्ट्स, माल ढुलाई और सप्लाई चेन को और बेहतर बनाने की जरूरत है। इसके अलावा, दुनिया के बाजारों में मुकाबला भी कड़ा होता जा रहा है। उदाहरण के लिए, वियतनाम जैसे छोटे देश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और उनका एक्सपोर्ट 473 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो भारत से भी थोड़ा ज्यादा है। इसका मतलब यह है कि भारत को सिर्फ अपना निर्यात ही नहीं बढ़ाना है, बल्कि दुनिया के बाजार में अपनी हिस्सेदारी भी मजबूत करनी होगी।
वैश्विक व्यापार में एशिया का प्रभाव बहुत तेजी से बढ़ रहा है। एशिया के प्रमुख देशों को देखें, तो वैश्विक निर्यात में चीन 3,772 अरब डॉल के साथ सबसे आगे है। जिसके बाद हांगकांग 754 अरब डॉलर ,जापान 738 अरब डॉलर ,दक्षिण कोरिया 709 अरब डॉलर ,संयुक्त अरब अमीरात 707 अरब डॉलर ,ताइवान 641 अरब डॉलर सिंगापुर 567 अरब डॉलर ,वियतनाम 473 अरब डॉलर और भारत 445 अरब डॉलर के साथ वैश्विक व्यापार में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। इन सभी प्रमुख एशियाई देशों का कुल निर्यात मिलाकर 8,806 अरब डॉलर (8.8 ट्रिलियन डॉलर) हो जाता है, जो पूरी दुनिया के कुल व्यापार का लगभग 33.6% हिस्सा है। यह दुनिया का औद्योगिक और आर्थिक केंद्र अब पूरी तरह से एशिया की तरफ शिफ्ट हो रहा है और भविष्य की ग्लोबल इकोनॉमी को एशियाई देश ही तय करेंगे।
| क्रम | देश | निर्यात (अरब डॉलर) | वैश्विक हिस्सेदारी |
|---|---|---|---|
| 1 | China | 3,772 | 14.4% |
| 2 | United States | 2,185 | 8.3% |
| 3 | Germany | 1,764 | 6.7% |
| 4 | Netherlands | 989 | 3.8% |
| 5 | Hong Kong | 754 | 2.9% |
| 6 | Japan | 738 | 2.8% |
| 7 | Italy | 726 | 2.8% |
| 8 | South Korea | 709 | 2.7% |
| 9 | United Arab Emirates | 707 | 2.7% |
| 10 | France | 683 | 2.6% |
| 11 | Mexico | 665 | 2.5% |
| 12 | Taiwan | 641 | 2.4% |
| 13 | Belgium | 568 | 2.2% |
| 14 | Singapore | 567 | 2.2% |
| 15 | United Kingdom | 556 | 2.1% |
| 16 | Canada | 555 | 2.1% |
| 17 | Switzerland | 554 | 2.1% |
| 18 | Vietnam | 473 | 1.8% |
| 19 | India | 445 | 1.7% |
| 20 | Spain | 445 | 1.7% |
पिछले दस सालों में भारत का निर्यात 312 अरब डॉलर से बढ़कर 445 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। दुनिया के टॉप 20 निर्यातक देशों में शामिल होकर भारत ने ग्लोबल मार्केट में अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है। यह एक बड़ी कामयाबी है, लेकिन चीन जैसे बड़े देशों से मुकाबला करने के लिए हमें अपनी रफ्तार और बढ़ानी होगी। आने वाले समय में निर्यात ही हमारी अर्थव्यवस्था (economy) को सबसे आगे ले जाने और दुनिया भर के व्यापार में भारत सबसे बड़ा जरिया बनेगा।
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात रिकॉर्ड 863 बिलियन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और कृषि जैसे मजबूत सेक्टरों के दम पर यह कामयाबी मिली है। वर्तमान में भारत के मुक्त व्यापार समझौते (FTA) दुनिया के दो-तिहाई से अधिक व्यापार को कवर करते हैं, जिसका पूरा लाभ उठाने की अपील उन्होंने भारतीय निर्यातकों से की है। सरकार ने इस साल 1 ट्रिलियन का और 'विकसित भारत' के विजन के तहत अगले 5 वर्षों (2030 तक) में इस निर्यात को दोगुना कर 2 ट्रिलियन तक पहुंचाने का बड़ा लक्ष्य रखा है।