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Crime: महंगे शौक की कीमत अपराधी बन चुका रहे युवा, गैंगस्टर बना रहे मोहरा

Crime: सोशल मीडिया पर रुतबा दिखाने, जल्दी अमीर बनने और लग्जरी लाइफस्टाइल की चाह युवाओं को अपराध की दुनिया में धकेल रही है। नशा व हथियार तस्करी से लेकर नामी हस्तियों पर हमलों तक में युवा गैंगस्टरों के लिए रेकी और वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। इस बारे में पढ़िए दीपक शर्मा की खास रिपोर्ट।
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Updated: 31 Oct 2026, 11:05 AM IST
Crime World
गैंगस्टर की जाल में फंस रहे युवा (ChatGpt)

महंगे कपड़े, लग्जरी गाड़ियां, महंगे मोबाइल और सोशल मीडिया पर दबदबा। कम समय में ऐसी जिंदगी जीने की चाह कुछ युवाओं को अपराध की दुनिया की ओर धकेल रही है। कोई नशा तस्करों के लिए खेप पहुंचा रहा है, कोई हथियारों की सप्लाई में मदद कर रहा है, तो कोई बड़े अपराधियों के इशारे पर रेकी और हमले जैसी वारदातों में शामिल हो रहा है।

नए लड़कों की अपराध की दुनिया में भर्ती का बदला तरीका

अपराध की दुनिया में नए लड़कों की भर्ती का तरीका भी बदल रहा है। संपर्क के लिए इंटरनेट और संदेश भेजने वाले सीक्रेट ऐप का इस्तेमाल हो रहा है, जबकि पैसों और विदेश में बसाने जैसे प्रलोभन देकर युवाओं को जोखिम भरे आपरा​धिक काम सौंपे जा रहे हैं। हाल ही में श्रीगंगानगर में नशे व हथियारों की बरामदगी में पकड़े गए आरोपियों और मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में कोटा से पकड़े गए आरोपियों की पड़ताल में इसकी फिर पु​ष्टि हुई है।

टाइगर श्रॉफ पर हमले में विदेश सैटल करने का लालच

18 अक्टूबर 2026 को मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग हुई। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को राजस्थान के कोटा में ट्रेन से पकड़ा। पुलिस के अनुसार, कम उम्र के आरोपियों को वारदात के लिए पैसों और विदेश में बसाने का लालच दिया गया था। यहीं नहीं अमरीका में बैठा गैंगस्टर उन्हें सीक्रेट एप के जरिए निर्देश दे रहा था।

हाल ही नशा तस्करी में पकड़े गए युवा

3 अक्टूबर : श्रीगंगानगर पुलिस ने आर्म्स एक्ट के मामले में गिरफ्तार चक महाराजका निवासी गुरविंद्र सिंह (22) की निशानदेही पर उसके घर से दस करोड़ रुपए कीमत की 500 ग्राम आइस ड्रग (मेथामफेटामाइन) बरामद की है। पूछताछ के दौरान पता चला कि गुरविंद्र विदेश में बैठे सहजप्रीत सिंह और चक महाराजका निवासी परमिन्द्र सिंह के संपर्क में था और उनके बताए अनुसार हथियार और मादक पदार्थों की तस्करी करता था।

10 अक्टूबर : हनुमानगढ़ जिले के गांव अयालकी में पुलिस और डीएसटी टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए पचास करोड़ की 10 किलो हेरोइन के साथ दो महिलाएं और दो युवकों को पकड़ा। आरोपियों ने पुलिस को चकमा देने के लिए महिलाओं को साथ रखा था।

12 अक्टूबर : श्रीगंगानगर के रावला क्षेत्र के चक 4 केएनएम गांव में ड्रोन के जरिए तीन पैकेट गिराए गए। सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई कर पैकेट उठाने पहुंचे पंजाब के दो युवकों को पकड़ लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान फिरोजपुर जिले के लखविंदर सिंह और जालंधर जिले के सुखविंदर सिंह के रूप में हुई। पैकेटों से आरडीएक्स, पिस्टल और बड़ी मात्रा में कारतूस बरामद हुए। पुलिस ने इसके पीछे छिपे मुख्य किरदार पंजाब के अलीका निवासी कुलवंत सिंह उर्फ सुक्खा को ढूंढ़ निकाला और पकड़ लिया। सुक्खा पाकिस्तानी तस्कर चाचा अली के संपर्क में था।

नशा-ह​​थियार तस्कर बढ़ा रहे नेटवर्क, कर रहे भर्ती

पाकिस्तानी आतंकी शहजाद भट्टी भारत में नेटवर्क बढ़ा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत शहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित किया। 2-3 जुलाई 2026 के दौरान राजस्थान एटीएस ने विभिन्न जिलों में पाक आतंकी के संदिग्ध संपर्कों की पड़ताल के लिए छापे मारे। करीब 30 लोगों से पूछताछ की गई।

बाड़मेर में युवक गिरफ्तार: जुलाई में बाड़मेर जिले के रामसर थाना क्षेत्र के गागरिया गांव से 20 वर्षीय युवक बशीर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में उसके शहजाद भट्टी के संपर्क में होने की बात सामने आई।

हनुमानगढ़ में भी मामला दर्ज: मार्च 2026 में हनुमानगढ़ टाउन पुलिस ने किशनपुरा निवासी जसवंत उर्फ सोनू के खिलाफ शहजाद भट्टी से संपर्क करने के आरोप में मामला दर्ज किया था।

रेकी से लेकर हथियार पहुंचाने में इस्तेमाल

संगठित अपराध में कमजोर वर्ग के युवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। किसी को संभावित निशाने की गतिविधियों पर नजर रखने, किसी को हथियार या वाहन जुटाने और किसी को वारदात के बाद भागने में मदद करने की जिम्मेदारी दी जाती है। कई बार ऐसे कामों को सामान्य डिलीवरी, यात्रा या परिचित की मदद बताकर उन्हें अनजान रख किया जाता है। गंभीर अपराध में शामिल होने पर गिरफ्तारी, मुकदमे और सजा के साथ पढ़ाई, रोजगार और परिवार पर भी असर पड़ता है। अपराध के बड़े खिलाड़ी अक्सर पर्दे के पीछे रहते हैं, जबकि अपराध के कैरियर बने युवा कानून के शिकंजे में आते हैं।

एक्सपर्ट व्यू : ये समाज की विफलता

समाजशास्त्री डॉ. नेहा प्रधान ने पत्रिका से बातचीत युवाओं का अपराध की दुनिया में जाना केवल कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, समाज की विफलता का संकेत भी है। महंगे शौक, जल्द अमीर बनने की चाह और सोशल मीडिया पर अपराधियों के दिखावे का आकर्षण उन्हें ऐसे रास्ते पर ले जाता है, जहां से लौटना मुश्किल हो सकता है। परिवार को संवाद और निगरानी बढ़ानी होगी, समाज को अपराध से दूरी बनाने वाले युवाओं के लिए शिक्षा व रोजगार के अवसर खोलने होंगे। पुलिस की भूमिका केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। परामर्श, कौशल प्रशिक्षण और पुनर्वास भी जरूरी हैं। अपराध पर सख्ती हो, लेकिन भटके युवाओं की वापसी के दरवाजे बंद न हों।

Updated on:
31 Oct 2026, 11:05 AM IST
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