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Solar Power: ‘धुआं खत्म’ सौर ऊर्जा से मिलेगी सस्ती बिजली, दुनिया भर में बढ़ी सौर किंग बनने की होड़

India Solar Energy: सौर ऊर्जा के क्षेत्र में 2025 में एक बड़ा बदलाव आया है। चीन 42% हिस्सेदारी के साथ पहले और भारत 7% के साथ तीसरे नंबर पर है। जानिए इस नए ग्लोबल पावर गेम की पूरी कहानी।

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Apr 25, 2026
सौर ऊर्जा (AI)

Solar Power: सौर ऊर्जा को लेकर दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आंकड़ों के अनुसार ,साल 2025 में सोलर पावर प्रोडक्शन ने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। चीन अब भी दुनिया का सबसे बड़ा 'सोलर किंग' बना हुआ है, लेकिन भारत भी तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। बिजली की बढ़ती जरूरत और पर्यावरण को लेकर बढ़ती चिंता के बीच दुनिया की बड़ी ताकतें कोयले से दूरी बनाकर सूरज की ताकत पर भरोसा जता रही हैं। किस तरह एक छोटी सी सोलर प्लेट अब पूरी दुनिया की इकोनॉमी और ताकत का नया हथियार बन रही है, आइए जानते हैं।

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सूरज की रोशनी से बदल रही है दुनिया की किस्मत

बिजली के बढ़ते बिल और प्रदूषण से राहत पाने का सबसे मजबूत रास्ता सोलर पावर बन रह है । एम्बर (Ember) के नए आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि दुनिया तेजी से सूरज की ताकत पर भरोसा जता रही है। साल 2025 में दुनिया भर में सोलर पावर से 2,778 टेरावॉट-घंटे (TWh) बिजली तैयार की गई। यह आंकड़ा साल 2024 के मुकाबले करीब 30% ज्यादा है। दुनिया समझ चुकी है कि अगर भविष्य सुरक्षित रखना है, तो सूरज की रोशनी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाना ही होगा।

सोलर पावर की रेस में चीन सबसे आगे

सोलर पावर की रेस में चीन सबसे आगे निकल चुका है और दुनिया में नंबर वन बना हुआ है। एम्बर (Ember) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की कुल सोलर बिजली का 42 फीसदी हिस्सा अकेले चीन बना रहा है। चीन ने सिर्फ सूरज की रोशनी से 1,175 TWh बिजली तैयार की है। यह आंकड़ा अमेरिका और भारत जैसे देशों के कुल जोड़ से भी ज्यादा है। पिछले कुछ सालों में चीन ने बड़े-बड़े सोलर पार्क खड़े किए हैं और दुनिया भर में सोलर पैनल सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश भी वही है। चीन की इस सफलता के पीछे सरकार की भारी सब्सिडी और बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का बड़ा हाथ है। इनर मंगोलिया और शिनजियांग जैसे इलाकों में हजारों एकड़ में फैले सोलर पैनल ऐसे नजर आते हैं, जैसे पैनलों का समंदर बिछा हो।

भारत ने बनाई टॉप-3 में जगह

सौर ऊर्जा के मामले में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। 196 TWh बिजली उत्पादन और 7% हिस्सेदारी के साथ भारत ने जापान और जर्मनी जैसे बड़े देशों को पीछे छोड़ दिया है। देश में 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' और बड़े सोलर प्लांट्स ने तस्वीर बदल दी है। आज गांव-गांव में लोग खेतों और घरों की छतों पर सोलर पैनल लगवा रहे हैं। भारत का लक्ष्य साफ है आने वाले समय में अपनी बिजली की बड़ी जरूरत प्राकृतिक स्रोतों से पूरी करना। इससे देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा और विदेशी तेल व महंगे कोयले पर निर्भरता भी कम होगी।

अमेरिका और यूरोप का क्या है हाल?

अमेरिका 389 TWh बिजली उत्पादन और 14% हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर है। अमेरिका ने तकनीक में काफी निवेश किया है, लेकिन बड़े प्रोजेक्ट्स को जमीन पर उतारने की रफ्तार में वह चीन से पीछे रह गया। वहीं यूरोप में जर्मनी और स्पेन जैसे देश कम जमीन होने के बावजूद तकनीक के दम पर इस लिस्ट में मजबूती से बने हुए हैं। जर्मनी ने 90 TWh और स्पेन ने 63 TWh बिजली पैदा की है। यूरोप देश गैस पर निर्भरता कम करने के लिए सोलर पावर का उपयोग कर रहा है। ब्राजील भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। ब्राजील ने 89 TWh बिजली बनाकर दिखा दिया है कि दक्षिण अमेरिका भी इस हरित क्रांति का हिस्सा बन चुका है। वहां भरपूर धूप ने उसे सोलर पावर का नया ताकतवर देश बना रहा है।

टॉप सोलर पावर देश

देशउत्पादन (TWh में)वैश्विक हिस्सेदारी (%)
चीन (CN)1,17542%
अमेरिका (US)38914%
भारत (IN)1967%
जापान (JP)1014%
जर्मनी (DE)903%
ब्राजील (BR)893%
स्पेन (ES)632%

क्यों बढ़ रही है सोलर पावर की मांग?

  • शुरुआत में सोलर पैनल बहुत महंगे लगते थे, लेकिन अब इनकी मैन्युफैक्चरिंग इतनी बड़े स्तर पर हो रही है कि इनकी कीमत काफी कम हो गई है। आम आदमी के लिए यह बिजली के बिल से स्थायी छुटकारा पाने का सबसे सरल तरीका है।
  • कोयले और गैस से बनने वाली बिजली से भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन होता है, जो ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण है।सोलर पावर पूरी तरह से 'क्लीन एनर्जी' है, जो धरती को बचाने में मदद करती है।
  • जो देश सूरज से बिजली बना रहे हैं, उनकी इकोनॉमी मजबूत हो रही है। उन्हें बिजली उत्पादन के लिए कच्चा माल (जैसे कोयला या गैस) बाहर से नहीं खरीदना पड़ता।

सिर्फ बिजली बनाना काफी नहीं

सोलर बिजली का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती अब भी स्टोरेज की है। दिन में रोशनी की जरूरत कम रहती है, जबकि बिजली की सबसे ज्यादा मांग अक्सर रात में होती है। जिस दिन बिजली को बड़े स्तर पर सस्ते और आसान तरीके से स्टोर करना संभव हो जाएगा, दुनिया कोयला, तेल और गैस पर अपनी निर्भरता काफी हद तक खत्म कर सकती है। बिजली सप्लाई सिस्टम को आधुनिक बनाना भी जरूरी है। बड़ी मात्रा में सोलर बिजली आती है, तो उसे सही तरीके से संभालने के लिए स्मार्ट तकनीक की जरूरत होती है। भारत और चीन जैसे देश इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं।

सौर ऊर्जा ही है नया 'सोना'

2025 के आंकड़ो के अनुसार आने वाले समय में सौर ऊर्जा ही दुनिया की असली ताकत होगी। चीन की बढ़त और भारत का उभरता कद यह बताता है कि ऊर्जा के क्षेत्र में एशिया ही दुनिया का नेतृत्व करेगा। सोलर पावर अब कोई ऑप्शन नहीं रहा, बल्कि जिंदगी का हिस्सा बन गया है। भारत जिस तेजी से अपनी सौर क्षमता बढ़ा रहा है, उससे साफ है कि देश आत्मनिर्भर बनने की राह पर है, और आगे चलकर हम दुनिया को बिजली भी निर्यात कर सकेगा।

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Published on:
25 Apr 2026 11:48 am
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