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Iran Death Penalty : इरफान को होगी फांसी, भारत में बीते 10 वर्षों में किन चार लोगों को मिली सजा ए मौत, कौन से देश सबसे आगे?

Death Penalty in Iran : ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई के खिलाफ प्रदर्शन को कुचलने की हरसंभव कोशिश हो रही है। अबतक 644 की मौत हो चुकी है जबकि 10 हजार से ज्यादा लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। एक व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। आइए जानते हैं कि कहां सबसे ज्यादा फांसी दी जाती है।

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Jan 13, 2026
ईरान के इरफान सुल्तानी को फांसी की सजा सुनाई गई है।

Iran death penalty News : ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatullah Al Khomeini) के खिलाफ काफी जोरशोर से प्रदर्शन (Protest in Iran) चल रहा है। सत्ता प्रदर्शन को कुचलने और प्रदर्शनकारियों को सबक सिखाने के लिए हर तरह की सख्ती को अंजाम दे रही है। एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, ईरान में अब तक 644 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 10,416 लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। एक व्यक्ति को फांसी की सजा (Death Execution in Iran) सुनाई जा चुकी है।

खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन का मुख्य चेहरा बन चुके 26 वर्षीय इरफान सुल्तानी (Irfan Sultani to be hanged in Iran) को जल्द ही फांसी दी जा सकती है। एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) की रिपोर्ट के अनुसार ईरान फांसी की सजा देने वाले देशों में सबसे टॉप पर है। आपको जानकर यह अचरज होगा कि भारत में लगभग 6 वर्षों में किसी को फांसी की सजा नहीं सुनाई गई है।

ईरान में साल दर साल बढ़ रहा मृत्युदंड की सजा

Global Death Sentences : एमनेस्टी इंटरनेशनल की मृत्युदंड पर वार्षिक रिपोर्ट में यह कहा गया कि वैश्विक स्तर पर फांसी की सजा का आंकड़ा 2015 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। वर्ष 2024 में 15 देशों में 1,500 से अधिक लोगों को फांसी दी गई। साल 2023 की तुलना में 2024 में 32% अधिक और साल 2015 के बाद से सबसे ज्यादा फांसी की सजा सुनाई गई थी। वर्ष 2024 में मौत की सज़ा देने वाले देशों की संख्या 16 से घटकर 15 हो गई है। ईरान के पड़ोसी देश सऊदी अरब ने 345 और इराक़ ने 63 लोगों को मौत की सजा दी।

ईरान में दी गई सबसे ज्यादा सजा ए मौत

Death Sentences and Executions : वर्ष 2024 में ईरान में कम से कम 972 लोगों को मौत की सजा दी गई। ईरान में काफी संख्या में महिलाओं मौत की सजा दी जाती है। वर्ष 2024 में 30 महिलाओं को फांसी की सजा दी गई थी। साल 2023 में यह संख्या 853 थी। साल 2022 में 12 और 2023 में 25 महिलाओं को फांसी की सजा सुनाई गई। इन महिलाओं में से कुछ लोगों को ड्रग से जुड़े अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था।

Death Sentences and Executions 2024: 'मृत्युदंड और फांसी 2024' रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में 1,518 लोगों को फांसी दी गई। वर्ष 2015 में 1,634 लोगों को फांसी की सजा दी गई थी। फांसी की सबसे अधिक सजा मध्य पूर्व में दी गई। हालांकि, अगले वर्ष यानी 2016 में फांसी देने वाले देशों की संख्या में रिकॉर्ड स्तर पर काफी कमी दर्ज की गई।

चीन दुनिया में सबसे अधिक फांसी देने वाले देशों में शामिल, लेकिन…

एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार ज्ञात आंकड़ों में चीन दुनिया का सबसे अधिक फांसी देने वाला देश है। संस्था का कहना है कि फिलीस्तीन और सीरिया में चल रहे संकटों के चलते चीन, वियतनमान और उत्तर कोरिया में फांसी की सजा कितने लोगों को ​दी गई, इसकी पुष्टि नहीं कर पाने के चलते रिपोर्ट में शामिल नहीं किया जा सका। चीन में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन करके भ्रष्टाचार और मादक पदार्थों की तस्करी के लिए मौत की सजा दी जाती है। संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मौत की सजा को सबसे गंभीर अपराधों तक सीमित रखा जाए। अमेरिका का मानवाधिकार समूह डुई हुआ का कहना है कि चीन में मौत की संख्या में कमी आई है। साल 2002 में यह 12 हजार थी, जो अब घटकर 2,000 रह गई है।

दुनिया में सबसे ज्यादा फांसी ईरान, इराक और सऊदी अरब में

ईरान, इराक और सऊदी अरब में दी जाने वाली फांसी की सजा की संख्या को मिला दिया जाए तो यह आंकड़ा दुनिया में सबसे ज्यादा हो जाएगा। इन तीनों देशों ने मिलकर चौंका देने वाली 1,380 फांसी की सजाएं दीं। वर्ष 2024 में कुल 1518 फांसी की सजा में से 1380 इन तीनों देशों ने मिलकर दी। इराक में 2023 में 16 लोगों को फांसी की सजा दी गई थी जबकि 2024 में लगभग चार गुने की बढ़ोतरी के साथ यह 63 तक पहुंच गई। सऊदी अरब में 2023 में 172 लोगों को फांसी की सजा दी गई थी। वहीं 2024 में बढ़कर यह 345 हो गई। ईरान में फांसी की सजा में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2023 में 853 लोगों को फांसी की सजा दी गई जबकि 2024 में 972 लोगों को सजा ए मौत दी गई। दुनिया में दी गई फांसी की सजा में से ईरान ने अकेले 64% लोगों को सजा ए मौत दी।

महिलाओं की आजादी के सवाल पर भी दी जाती है फांसी

ईरान ने वर्ष 2024 में महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर इस्लामी गणराज्य की सत्ता को चुनौती देने वाले के खिलाफ मृत्युदंड की सजा सुनाई। वर्ष 2023 में दो ऐसी महिलाओं को फांसी की सजा दी गई जिनमें एक मानसिक रूप से विकलांग युवक भी शामिल थी।

भारत में 2020 में दी गई थी 4 लोगों को फांसी

भारत में आखिरी बार फांसी की सजा लगभग 6 साल पहले मार्च 2020 में दी गई थी। दिल्ली में वर्ष 2012 में हुए एक सनसनीखेज सामूहिक बलात्कार और हत्या (निर्भया हत्याकांड) के मामले में चार अपराधियों अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और मुकेश सिंह को फांसी की सजा दी गई थी। इन्हें दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी पर लटकाया गया था। इन चारों को 2023 में एक निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। इससे पहले फांसी की 2015 में दी गई थी। भारत में अभी लगभग 539 कैदी मौत की सजा का इंतजार कर रहे हैं।

मृत्युदंड पर क्या है भारतीय न्याय व्यवस्था का प्रावधान?

भारत में मृत्युदंड के प्रावधान पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जकी उल्लाह खान (Zaki Ullah Khan, Retired judge of Allahabad High Court) ने पत्रिका की सीनियर रिपोर्टर डॉ. मीना कुमारी से बताया कि देश में मौत की सजा का प्रावधान रेयर से रेयरेस्ट मामलों में ही दिया जाता है, लेकिन रेयरेस्ट की परिभाषा अभी तक स्पष्ट नहीं है। इससे इस श्रेणी में दंड देने में व्यक्ति का अपना नजरिया भी शामिल हो जाता है और वो मृत्युदंड तक नहीं पहुंच पाते हैं। रेरेस्ट की परिभाषा तय करने से मृत्युदंड के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन इससे न्याय प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता भी बढ़ेगी।

इन तीन देशों ने 91% सजा ए मौत दी

एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड का मानना है कि मृत्युदंड एक घृणित प्रथा है जिसका आज की दुनिया में कोई स्थान नहीं है। उनका कहना है कि पिछले साल मौतों में हुई तीव्र वृद्धि के लिए ईरान, इराक और सऊदी अरब जिम्मेदार थे, जिन्होंने ज्ञात फांसी की सजाओं में से 91% से अधिक को अंजाम दिया। इन तीनों देशों ने मानवाधिकारों का उल्लंघन किया और मादक पदार्थों से संबंधित और आतंकवाद के आरोपों के लिए निर्दयतापूर्वक लोगों की जान ली।

मध्य पूर्व क्षेत्र में फांसी देने की ये वजहें गिनाई गईं

मध्य पूर्व क्षेत्र के कुछ देशों में मानवाधिकार रक्षकों, असंतुष्टों, प्रदर्शनकारियों, राजनीतिक विरोधियों और जातीय अल्पसंख्यकों को चुप कराने के लिए मृत्युदंड का इस्तेमाल किया गया। वर्ष 2024 में हुई फांसी की सजाओं में से 40% से अधिक गैरकानूनी रूप से मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों के लिए दी गईं।

अधिकारियों को चुनौती देने वालों को मिलता है सबसे क्रूर दंड

एग्नेस कैलामार्ड का यह मानना है कि ईरान और सऊदी अरब में जो लोग अधिकारियों को चुनौती देने का साहस करते हैं, उन्हें सबसे क्रूर दंड का सामना करना पड़ता है।इन देशों में सत्ता के खिलाफ बोलने की हिम्मत करने वालों को चुप कराने के लिए मौत की सजा का इस्तेमाल किया जाता है।

सऊदी अरब में राजनीतिक असहमतियों के लिए फांसी एक औजार

सऊदी अधिकारियों ने 2011 और 2013 के बीच शुरू हुए राजनीतिक असहमति को दबाने और देश के शिया अल्पसंख्यक नागरिकों को दंडित करने के लिए मृत्युदंड का इस्तेमाल एक हथियार के रूप में जारी रखा है। शिया अल्पसंख्यक प्रदर्शनकारियों को "सरकार विरोधी" प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए मौत की सजा दी जाती हैं। निम्र अल-निम्र (Nimr al-Nimr) एक सऊदी शिया मौलवी और कार्यकर्ता थे, जिन्हें 2014 में मौत की सज़ा सुनाई गई और 2016 में फांसी दे दी गई थी। निम्र सऊदी अरब में शिया अधिकारों के लिए मुखर थे। उन्हें अल-कायदा में शामिल होने से संबंधित आतंकवाद से जुड़े अपराधों के लिए फांसी दी गई, जबकि प्रारंभिक अदालती दस्तावेजों में उनके प्रदर्शनों में भाग लेने का उल्लेख था।

DRC में 2023 में मृत्युदंड पर रोक लगा दी गई थी लेकिन…

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में 2023 में मृत्युदंड पर रोक लगा दी गई थी लेकिन मार्च 2024 में इस प्रतिबंध को हटा लिया गया। देश में बढ़ती हिंसा को रोकने के उद्देश्य से सैन्य अदालतों ने थोक के भाव से लोगों को फांसी की सजा सुनानी शुरू की। जनवरी जनवरी 2025 में कुलुना (शहरी डाकू) कहे जाने वाले 100 से ज़्यादा लोगों को फांसी दी गई है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो ने इस फैसले के खिलाफ मानवाधिकार संगठनों ने जमकर आलोचना की।

113 देश पूरी तरह मृत्युदंड के खिलाफ, 145 में फांसी समाप्त

फांसी की सजाओं में वृद्धि के बावजूद सिर्फ 15 देशों में ही इन्हें अंजाम दिया गया। आज की तारीख में 113 देश पूरी तरह से मृत्युदंड के विरोधी हैं और कुल 145 देशों ने कानून या व्यवहार में मृत्युदंड को समाप्त कर दिया है। मलेशिया में मृत्युदंड संबंधी सुधारों के परिणामस्वरूप फांसी की सजा के खतरे से अबतक 1,000 से अधिक लोगों को बचाया जा सका।

जिम्बाब्वे ने 2024 में मृत्युदंड की सजा समाप्त की

वर्ष 2024 में जिम्बाब्वे ने एक विधेयक पर हस्ताक्षर करके सामान्य अपराधों के लिए मृत्युदंड को समाप्त कर दिया। पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा के 10वें प्रस्ताव जिसमें मृत्युदंड के प्रयोग पर रोक लगाने के प्रावधान के पक्ष में दो-तिहाई से अधिक सदस्यों ने मतदान किया।

Updated on:
13 Jan 2026 03:06 pm
Published on:
13 Jan 2026 02:23 pm
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