
Caffeine addiction : क्या आपकी सुबह की शुरुआत बिना कॉफी के नहीं होती? या फिर काम के तनाव के बीच 3-4 कप कॉफी आपकी आदत बन चुकी है? अगर हां, तो आपके लिए एक राहत भरी खबर है। हाल ही में आई नई हार्ट गाइडलाइन्स और रिसर्च समीक्षा में यह सामने आया है कि दिन में 3 से 5 कप कॉफी पीना ज्यादातर वयस्कों (Adults) के लिए बिल्कुल सुरक्षित है। इतना ही नहीं, सीमित मात्रा में कॉफी का सेवन दिल की बीमारियों के खतरे को कम भी कर सकता है। लेकिन, क्या इसका मतलब यह है कि कैफीन से भरा हर ड्रिंक सेहतमंद है? आइए, वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुनील कुमार जैन के अनुभवों और इस नई स्टडी के आधार पर समझते हैं कि आपकी सेहत के लिए कैफीन का गणित क्या है।
मेडिकल रिसर्च के अनुसार, एक वयस्क के लिए प्रतिदिन 400 मिलीग्राम (mg) तक कैफीन सुरक्षित मानी जाती है। इसका मतलब है कि आप दिन में लगभग 3 से 5 सामान्य कप कॉफी पी सकते हैं। दीर्घकालिक (Long-term) अध्ययनों में देखा गया है कि जो लोग नियमित रूप से और सीमित मात्रा में कॉफी पीते हैं, उनमें:
अक्सर जब रिसर्च की बात होती है, तो उसका संबंध ब्लैक कॉफी (Black Coffee / Espresso) या कम चीनी वाली फिल्टर कॉफी से होता है।
डॉ. सुनील कुमार जैन, डीएम (कार्डियोलॉजी) के अनुसार:
कॉफी दवा नहीं है, लेकिन सीमित मात्रा में यह आपके दिल की दोस्त बन सकती है। ध्यान सिर्फ इस बात का रखना है कि उसमें चीनी और मलाई की जगह कैफीन का सही संतुलन हो। अगर आप दिन में 5 कप कॉफी पी रहे हैं और हर कप में 2 चम्मच चीनी और भारी क्रीम मिला रहे हैं, तो इससे दिल को फायदा होने के बजाय मोटापा और शुगर बढ़ने का खतरा ज्यादा रहेगा।
शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि कॉफी के फायदों को एनर्जी ड्रिंक्स के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। दोनों में कैफीन भले ही हो, लेकिन दोनों का शरीर पर असर बिल्कुल अलग होता है।
अत्यधिक कैफीन और चीनी : एक एनर्जी ड्रिंक में 2 से 3 कप कॉफी के बराबर कैफीन एक साथ हो सकता है। इसके अलावा, इनमें बहुत ज्यादा चीनी (Artificial Sugar) और अन्य उत्तेजक तत्व (जैसे टॉरिन और गुआरना) होते हैं।
दिल की धड़कन का अनियंत्रित होना (Arrhythmia) : एनर्जी ड्रिंक्स का तुरंत सेवन करने से ब्लड प्रेशर अचानक से बढ़ जाता है और हार्ट रेट अनियंत्रित हो सकती है।
हालिया गाइडलाइन्स कहती हैं कि दिन में 5 कप कॉफी दिल के लिए सुरक्षित है। क्या भारतीय लाइफस्टाइल और खान-पान को देखते हुए भी यह सीमा सही है?
यह 'अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन' (American Heart Association) द्वारा 'सर्कुलेशन' (Circulation) पत्रिका के अंक में एक तथ्यात्मक विवरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके अनुसार, कॉफी का उपयोग विभिन्न तरीकों से शरीर के लिए लाभदायक हो सकता है; लेकिन इसका अत्यधिक सेवन करने पर हो सकता है कि उतना लाभ न मिले या यह हानिकारक भी सिद्ध हो। इनके द्वारा जारी किए गए विवरण अत्यंत सटीक होते हैं। कॉफी के संदर्भ में हाल ही में जारी यह विवरण 'रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल्स' (Randomized Controlled Trials) पर आधारित है, जो मेडिकल साइंस में शोध का सर्वाधिक विश्वसनीय तरीका माना जाता है। यह बिल्कुल सही है। भारतीय लोगों का वजन या बीएमआई (BMI) पश्चिमी लोगों की तुलना में थोड़ा कम होता है। इसके अलावा, भारतीय खान-पान में दूध और दुग्ध-उत्पादों का उपयोग अधिक होता है तथा अधिकांश लोग कॉफी दूध के साथ लेते हैं। इसलिए जो शुद्ध (प्योर) कॉफी होती है जैसे फिल्टर कॉफी या एस्प्रेसो उसके जैसा सीधा प्रभाव इसमें देखने को नहीं मिलता। फिर भी, कुल मिलाकर (Overall) इन निष्कर्षों को हम भारतीय जीवन शैली और भारतीय लोगों के संदर्भ में भी लागू कर सकते हैं। प्रतिदिन 3 से 5 कप शुद्ध कॉफी जो कि फिल्टर या एस्प्रेसो हो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है। विशेष रूप से ब्लड प्रेशर, हृदय की धड़कन, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और नींद के चक्र (Sleep Cycle) को संतुलित रखने में यह काफी लाभदायक साबित हो सकती है।
कॉफी में ऐसा क्या होता है जो दिल की बीमारियों, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर के खतरे को कम करता है?
कॉफी के अंदर मुख्य रूप से कैफीन, टरपींस, फ्लेवोनॉयड्स, कई तरह के एंटी-ऑक्सीडेंट्स और लगभग 1000 के आसपास सक्रिय यौगिक (Active Compounds) होते हैं, जो शरीर के अलग-अलग अंगों पर अपना प्रभाव डालते हैं। इसलिए, कॉफी अपने आप में सिर्फ कैफीन नहीं है। इसके भीतर ऐसे कई घटक (Compounds) मौजूद हैं जो कैफीन के हानिकारक प्रभावों को संतुलित (Counter) करते हैं, साथ ही कई ऐसे सकारात्मक कारक भी हैं जो इसके स्वास्थ्यवर्धक लाभों को बढ़ाते हैं।इस प्रकार, कॉफी विभिन्न घटकों का एक ऐसा संयोजन (Combination Mixture) है जो दिल से जुड़ी कई बीमारियों से बचाव में मदद करता है। 'रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल्स' (Randomized Controlled Trials) में भी इसके प्रमाण देखे गए हैं और इससे संबंधित रिसर्च पेपर भी पब्लिश हुआ है।
युवाओं में आजकल जिम से पहले प्री-वर्कआउट या एनर्जी ड्रिंक्स लेने का ट्रेंड है, इससे दिल पर अचानक क्या असर पड़ता है?
ऐसा देखा गया है कि जो लोग वर्कआउट से पहले (Pre-workout) अत्यधिक कैफीन और एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन करते हैं, उनमें हृदय संबंधी बीमारियां और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है, यहां तक कि इसके कारण कुछ मामलों में मृत्यु भी दर्ज की गई है। मेडिकल लिटरेचर में ऐसे कई केस रिपोर्ट्स उपलब्ध हैं। जो लोग प्री-वर्कआउट एनर्जी ड्रिंक्स लेते हैं, उनमें कैफीन की सांद्रता (Concentration) बहुत अधिक होती है। प्राकृतिक कॉफी में कैफीन के साथ-साथ ऐसे कई अन्य घटक होते हैं जैसे फ्लेवोनॉयड्स, टरपींस, केफेस्ट्रोल आदि जो कैफीन के नकारात्मक प्रभावों को संतुलित (Counter) करते हैं और स्वास्थ्यवर्धक लाभ पहुंचाते हैं। लेकिन एनर्जी ड्रिंक्स में ये सुरक्षात्मक घटक अनुपस्थित होते हैं, उनमें केवल उच्च मात्रा में कृत्रिम (Pure) कैफीन होता है, जो दिल के लिए काफी घातक सिद्ध हो सकता है। यह कैफीन अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है, दिल की धड़कन को अनियमित कर सकता है और स्ट्रोक व हार्ट अटैक के खतरे को कई गुना बढ़ा सकता है। इसलिए, किसी भी स्थिति में प्री-वर्कआउट एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन उचित नहीं माना जाता और इनसे पूरी तरह बचना चाहिए।
हम भारत में अक्सर दूध, मलाई और चीनी वाली कॉफी पीते हैं। क्या ऐसी कॉफी पीने से भी दिल को वही फायदे मिलते हैं जो रिसर्च में बताए गए हैं?
हां, कॉफी और इसमें मौजूद विभिन्न यौगिकों (Compounds) से स्वास्थ्य को कई तरह के लाभ जरूर मिलते हैं। लेकिन ये लाभ तब संतुलित (बेअसर) हो जाते हैं जब कॉफी में मलाई/मक्खन जैसी चिकनाई (जिससे कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है) और अत्यधिक चीनी (जो ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ाती है) मिला दी जाती है। इसलिए, कॉफी के अधिकतम स्वास्थ्य लाभ केवल शुद्ध फिल्टर कॉफी या एस्प्रेसो (ब्लैक कॉफी) से ही प्राप्त होते हैं। इस हालिया शोध में भी ब्लैक कॉफी का ही उपयोग किया गया है और इसे ही कॉफी का सबसे स्वास्थ्यवर्धक रूप माना जाता है। कॉफी में 'केफेस्ट्रोल' (Cafestol/Kahweol) नाम का एक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा सकता है। हालांकि, जब हम कॉफी को फिल्टर करते हैं या एस्प्रेसो के रूप में तैयार करते हैं, तो यह तत्व छानने की प्रक्रिया में बाहर निकल जाता है और इसका हानिकारक प्रभाव समाप्त हो जाता है। यही कारण है कि कॉफी बनाने का सबसे बेहतरीन तरीका फिल्टर या एस्प्रेसो विधि को माना जाता है। कैफीन, कॉफी का मुख्य सक्रिय घटक है। यह हमारे सेंट्रल नर्वस सिस्टम और कार्डियोवैस्कुलर (हृदय एवं रक्त वाहिका) सिस्टम दोनों को उत्तेजित (Stimulate) करता है। यदि इसे नियमित रूप से और एक सीमित मात्रा (Controlled Dose) में लिया जाए, तो यह दिल के स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक साबित होता है।
इसके विपरीत, एनर्जी ड्रिंक्स और कैफीन की गोलियों (Tablets) में कृत्रिम (Synthetic) कैफीन का बहुत ही सांद्रित (Concentrated) और शुद्ध रूप उपयोग किया जाता है। इनमें कैफीन के दुष्प्रभावी असर को कम करने वाले प्राकृतिक सुरक्षात्मक घटक मौजूद नहीं होते। इस वजह से ये पूरे शरीर पर कैफीन के नकारात्मक प्रभावों को तेजी से दर्शाते हैं। इसके परिणामस्वरूप अत्यधिक घबराहट (Anxiety), दिल की धड़कन का अनियमित होना, ब्लड प्रेशर बढ़ना और नींद का बाधित होना (Sleep Disturbance) जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
ब्लैक कॉफी (Filter/Espresso) और रेगुलर मिल्क कॉफी में से दिल के लिए कौन सी ज्यादा बेहतर है?
दिल के स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से ब्लैक कॉफी (फिल्टर/एस्प्रेसो) रेगुलर मिल्क कॉफी से कहीं अधिक बेहतर और फायदेमंद है।
प्योर एंटी-ऑक्सीडेंट्स: ब्लैक कॉफी में कैफीन के साथ-साथ टरपींस, फ्लेवोनॉयड्स और कई प्राकृतिक एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो दिल की बीमारियों, स्ट्रोक और ब्लड प्रेशर के खतरे को कम करते हैं।
हानिकारक तत्वों का हटना: एस्प्रेसो या फिल्टर विधि से कॉफी बनाने पर 'केफेस्ट्रोल' (Cafestol) नामक तत्व बाहर निकल जाता है, जो कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने के लिए जाना जाता है।
दूध और चीनी का प्रभाव: रेगुलर मिल्क कॉफी में मलाई/मक्खन की चिकनाई (जिससे सैच्युरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है) और चीनी मिलाई जाती है। यह मिश्रण कॉफी से मिलने वाले प्राकृतिक दिल-संबंधी फायदों को बेअसर (Counter) कर देता है। इसलिए, यदि आप सीमित मात्रा (दिन में 3 से 5 कप) में बिना दूध और चीनी वाली ब्लैक फिल्टर या एस्प्रेसो कॉफी पीते हैं, तो यह आपके हृदय और समग्र स्वास्थ्य के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
कैफीन की ओवरडोज या ज्यादा कॉफी पीने पर शरीर क्या शुरुआती चेतावनी (Warning Signs) देता है?
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