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गुलाबी नहीं कभी सफेद रंग का हुआ करता था जयपुर, जानें 29 ऐतिहासिक दरवाजे और दुनिया के पहले मंदिर की रोचक कहानी

Jaipur Foundation Day: राजस्थान की राजधानी जयपुर का आज स्थापना दिवस है। 18 नवंबर 1727 को जयपुर शहर की स्थापना की कई थी। जानें जयपुर की शाही विरासत और इतिहास-

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Nov 18, 2025
Photo- Patrika

Jaipur Foundation Day: राजस्थान की राजधानी जयपुर का आज स्थापना दिवस है। जयपुर को इसका नाम इसके संस्थापक जयसिंह से मिला है। आज से करीब 3 शताब्दी पहले 18 नवंबर 1727 में महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने प्रसिद्ध वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य के साथ दुनियाभर में गुलाबी नगर के नाम से जाने वाले खूबसूरत जयपुर शहर की स्थापना की थी।

तभी उन्होंने वास्तु शिल्प, ज्योतिष, धर्म, ड्रेनेज, नगर नियोजन सहित भवन निर्माण कला में इसे शताब्दियों की योजना के साथ बनाया था। उनकी योजना आज भी कामयाब है और हमारे सामने जीवन्त है। इन 298 वर्षों में जंतर-मंतर, हवामहल, रामनिवास बाग जैसे निर्माण, रेलगाड़ी, मोटर व्हीकल का आगमन, सड़कों का निर्माण हुआ, जयपुर की कला-संस्कृति, बाजारों, उत्पादों को अपनी पहचान मिली।

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जोहरी बाजार रोड लाइट पर सूर्यमुख प्रतीक चिन्ह के नए और पुराने खंभे। फोटो- रघुवीर सिंह

स्थापना के पहले 100 वर्ष में जयपुर ने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक रूप से कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे। इस अवधि में शहर ने न केवल भव्य महलों और किलों के रूप में अपनी पहचान बनाई, बल्कि उसने विज्ञान, कला और वास्तुकला में भी एक अद्वितीय स्थान अर्जित किया।

इसके बाद सौ वर्षों में जयपुर में कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटीं, जिन्होंने न केवल शहर के प्रशासन, संस्कृति और वास्तुकला को प्रभावित किया, बल्कि इसे भारतीय उपमहाद्वीप के एक प्रमुख शहर के रूप में स्थापित किया। इन 100 वर्षों में जयपुर ने कई महत्वपूर्ण विकास देखे और इस दौरान शहर का भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप और बढ़ता चला गया।

तब से अब तक जयपुर ने कई ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक बदलाव देखे हैं। इस दौरान शहर ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखते हुए आधुनिकता की ओर भी कदम बढ़ाए हैं। जयपुर अब एक स्मार्ट, विकासशील और वैश्विक स्तर पर पहचाना जाने वाला शहर बन चुका है।

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जयपुर में मंदिरों की बड़ी संख्या और पवित्र तीर्थों के कारण इसे छोटी काशी भी कहा जाता है। शहर में सुबह-शाम हर ओर से घंटे-घड़ियालों के साथ जय-जय घोष सुनाई देता है। शहर का सबसे प्रमुख मंदिर गोविंद देव जी का मंदिर है, जहां हर दिन जयपुर समेत देश-विदेश से हजारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।

जयपुर हर किसी को मोहित कर देता है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी जनवरी 2024 में जयपुर की खूबसूरती के कायल हो गए थे। पीएम नरेंद्र मोदी और इमैनुअल मैक्रों जब जयपुर के परकोटा में निकले तो हर किसी ने जय श्रीराम का जयकारा लगाकर उनका स्वागत किया।

पीएम नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों . File Photo- Patrika

जयपुर आने वाले पर्यटकों की यह संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। विश्व धरोहर शहर का दर्जा प्राप्त जयपुर पहला ऐसा सुनियोजित शहर है, जिसकी बसावट की कल्पना बनने से काफी पहले ही कर ली गई थी। वास्तुकला और नवग्रहों के अनुरूप यहां 9 चौकड़ियां बसाई गई थीं।

जयपुर के 29 ऐतिहासिक दरवाजे

गलता गेट. Photo- patrika

जयपुर में कुल 29 ऐतिहासिक दरवाजे बनाए गए हैं, जिनमें से 13 दरवाजे सिटी पैलेस में और 16 दरवाजे परकोटे में बनाए गए थे। 1727 में जयपुर की नींव का मुहूर्त गंगापोल गेट पर लगाया गया था। न्यू गेट सबसे बाद में बनाया गया।

आमेर घाटी गेट. Photo- Patrika

ये हैं जयपुर के प्रमुख 10 दरवाजे

गंगापोल: बास बदनपुरा में स्थित है

त्रिपोलिया गेट. Photo- Patrika

त्रिपोलिया गेट: मूल नाम नृसिंह पोल

अजमेरी गेट. Photo- Patrika

अजमेरी गेट: मूल नाम कृष्ण पोल

जोरावरसिंह गेट. Photo- Patrika

जोरावरसिंह गेट: मूल नाम ध्रुव पोल

सांगानेरी गेट. Photo- Patrika

सांगानेरी गेट: मूल नाम शिव पोल

ब्रह्मपुरी गेट: मूल नाम ब्रह्म पोल

चांदपोल गेट. Photo- Patrika

चांदपोल गेट: मूल नाम चन्द्र पोल

घाटगेट. Photo- Patrika

घाटगेट: मूल नाम राम पोल

सूरजपोल गेट: मूल नाम सूर्य पोल

सिरहड्योढ़ी गेट: मूल नाम अयोध्या पोल

जयपुर में बना दुनिया का पहला कल्कि मंदिर

कहा जाता है कि दुनिया का पहला कल्कि मंदिर जयपुर में बनाया गया था। यह मंदिर सिरहड्योढ़ी बाजार में स्थित है और राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी का है। इसका निर्माण सवाई जयसिंह ने 1732 से 1742 के बीच करवाया।

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इतिहासकार गोविंद शंकर शर्मा के अनुसार, सवाई जयसिंह के समय में लिखे गए ’वचन प्रमाण’ ग्रंथ में कहा गया है कि अष्टदल कमल के मध्य में भगवान कल्कि विराजते हैं।

कल्कि मंदिर. Photo- Patrika

इस मंदिर का उल्लेख श्रीकृष्ण भट्ट द्वारा लिखित संस्कृत महाकाव्य ईश्वर विलास के छठे सर्ग में भी है, जिसमें यह कहा गया है कि सवाई जयसिंह भगवान कल्कि की पूजा करते थे।

रामगंज में बना पहला बरामदा

रामगंज रोड. Photo- Patrika

सबसे पहले रामगंज में बरामदों का निर्माण हुआ था। मेहंदी चौक के सामने इसका नमूना तैयार किया गया था और उसके बाद रामगंज बाजार एवं अन्य बाजारों में बरामदों का निर्माण हुआ। इतिहासकारों के अनुसार, 1872 में जयपुर शहर के बाजारों में टीनशेड लगाए गए थे।

1875 में सवाई रामसिंह ने शहर को गुलाबी रंग में रंगवाया, जबकि इससे पहले जयपुर सफेद रंग का था। 1942 में सवाई मानसिंह द्वितीय और तत्कालीन प्राइम मिनिस्टर सर मिर्जा इस्माइल ने जयपुर को आधुनिक रूप दिया और बरामदों का निर्माण करवाया।

हवामहल: भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट की आकृति

हवामहल. Photo- Patrika

जयपुर के स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण हवामहल है, जिसका निर्माण 1799 में सवाई प्रतापसिंह ने करवाया। हवामहल की संरचना भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट के आकार की है।

इसमें 365 छोटी-छोटी खिड़कियां, शरद मंदिर, रतन मंदिर, विचित्र मंदिर, प्रकाश मंदिर और हवा मंदिर हैं। इसका निर्माण सवाई प्रतापसिंह की श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।

पहाड़ी पर बने नाहरगढ़ किले के भीतर 10 भवन

नाहरगढ़ किला 700 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, जिसे सवाई जयसिंह ने 1734 में बनवाया था। किले के भीतर कुल 10 भवन हैं।

नाहरगढ़ किला. Photo- Patrika

ये भवन सूरज प्रकाश, चांद प्रकाश, कुशल प्रकाश, आनंद प्रकाश, जवाहर प्रकाश, लक्ष्मी प्रकाश, रतन प्रकाश, ललित प्रकाश और बसंत प्रकाश के नाम से प्रसिद्ध हैं। यहां पानी संग्रहण की एक अनूठी व्यवस्था आज भी मौजूद है।

ज्योतिष और संस्कृति का केंद्र है जयपुर

जंतर-मंतर. Photo- Patrika

जयपुर को ज्योतिष और संस्कृति की नगरी के रूप में जाना जाता है। 1728 में ज्योतिष यंत्रालय जंतर-मंतर की नींव रखी गई थी, जो 1734 में बनकर तैयार हुआ।

जंतर-मंतर. Photo- Patrika

जंतर- मंतर में 18 यंत्र हैं, जो आकाशीय घटनाओं की गणना में सहायक हैं।

हाथ से बना सोने का आखिरी सिक्का

सवाई मानसिंह द्वितीय के शासनकाल के 28वें और अंतिम वर्ष 1949 में हाथ से बना सोने का आखिरी सिक्का जारी हुआ था। उस समय इस सिक्के का मूल्य 28 रुपए था।

इस सिक्के पर एक ओर उर्दू में अयोध्या का राजचिह्न कचनार का झाड़ और 28वां वर्ष अंकित था, जबकि दूसरी ओर 1949 ईस्वी अंकित था।

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Updated on:
18 Nov 2025 01:12 pm
Published on:
18 Nov 2025 07:01 am
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