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Holi 2026: छत्तीसगढ़ में परंपराओं की डोर से बंधी होली, बांस की पिचकारी और सामूहिक नृत्य से जीवंत होती सदियों पुरानी परंपरा

Holi 2026: जहां शहरों में होली का रंग एक-दो दिन में सिमट जाता है, वहीं कबीरधाम जिला के पंडरिया ब्लॉक के वनांचल में बसने वाला बैगा जनजाति समाज तेरह दिनों तक इस पर्व को परंपरा और उल्लास के साथ मनाता है

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Holi 2026: छत्तीसगढ़ में परंपराओं की डोर से बंधी होली, बांस की पिचकारी और सामूहिक नृत्य से जीवंत होती सदियों पुरानी परंपरा

Holi 2026: @यशवंत झारिया। छत्तीसगढ़ में होली सिर्फ रंग-गुलाल लगाकर उत्साह मनाने का त्योहार नहीं है, बल्कि परंपराओं के माध्यम से फागुन के निखरने का त्योहार है। यहां नई-पुरानी पीढिय़ां आधुनिकता के साथ ही पुरानी मान्यताओं की जड़ों की तरह फैली अनेक रीतियों की गवाह हैं। इस आदिवासी राज्य में एक-दो नहीं वरन कई पीढिय़ों से चले आ रहे अनुशासन के भी दर्शन होते हैं। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर अपने आप में ही एक इतिहास लिए हुए क्षेत्र हैं। भले ही पहले संभवत: यहां एकरूपता नहीं दिखी हो, लेकिन आज छत्तीसगढ़ न सिर्फ एक राज्य के तौर पर अपनी परंपराओं को सहेजकर आगे बढ़ रहा हो, बल्कि आपसी आदान-प्रदान और एकता के सूत्र ने राज्य के सभी कोनों को जोड़ दिया है।

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