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Job Loss : भारत में स्टार्टअप और टेक कंपनियों में छंटनी, किस वजह से लोगों की जा रही नौकरियां?

Job Loss India: स्टार्टअप और टेक कंपनियों में लगातार छंटनी हो रही है। वर्ष 2025-2026 में पूरी दुनिया में करीब 2.5 लाख कर्मचारियों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है। आइए समझते हैं कि क्यों जा रही लोगों की नौकरियां?

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Feb 26, 2026
भारत में स्टार्टअप और टेक कंपनियों में छंटनी का दौर जारी (Photo: AI)

Job Loss India: दुनिया में कंपनियां कॉस्ट कटिंग के मूड में है। इसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा है। कार्यकारी सर्च फर्म लॉन्गहाउस कंसल्टिंग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल जुलाई से अब तक भारतीय स्टार्टअप्स ने करीब 4,800 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी की है। वहीं दुनिया में टेक कंपनियों ने पिछले साल करीब 244,851 लोगों को नौकरी से हटाया। वहीं भारत टेक कंपनियों से छंटनी के मामले में दूसरे पायदान पर रहा। आइए जानते हैं कि दुनिया में किस कंपनी ने कितने कर्मचारियों को 2025 में बाहर का रास्ता दिखाया?। आइए जानते हैं कि छंटनी की वजह क्या है?

रियल-मनी गेमिंग पर प्रतिबंध से लगा जोर का झटका

स्टार्टअप कंपनियों को ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग पर अचानक लगे प्रतिबंध के चलते बहुत जोर का झटका लगा और कई स्टार्टअप्स को रातोंरात बंद होना पड़ा। रियल-मनी गेमिंग स्टार्टअप्स के अलावा, पोर्टर, जेप्टो, क्रुत्रिम, ज़ूपी जैसी कंपनियों ने भी इस अवधि में कर्मचारियों की छंटनी की है। यूनिटी, जस्ट वर्क, स्प्रिंकलर, ओक्टा, सोनोज स्टार्टअप्स कंपनियों ने छंटनी की।

वैसे, स्टार्टअप कंपनियों का सबसे बड़ा 'बूम पीरियड' कोरोना महामारी का दौर यानी 2020 से 2022 के बीच माना जाता है। हालांकि 2021 को ग्लोबल स्टार्टअप इकोसिस्टम का चरम वर्ष माना जाता है।

क्यों 2021 स्टार्टअप्स बूम के लिए सबसे अच्छा रहा?

  • 2021 में दुनिया भर में वेंचर कैपिटल निवेश ने ऐतिहासिक स्तर छुआ। अमेरिका, भारत, यूरोप और एशिया में भारी फंडिंग हुई।
  • 2021 में रिकॉर्ड संख्या में स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न बने। भारत में ही 40+ नए यूनिकॉर्न बने, जो एक साल में सबसे ज्यादा थे।
  • महामारी के दौरान केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरें कम रखीं, जिससे निवेशकों के पास जोखिम लेने के लिए ज्यादा पूंजी थी।
  • कोविड-19 के कारण ई-कॉमर्स, एडटेक, फिनटेक, हेल्थटेक और SaaS में तेज़ ग्रोथ हुई।

टेक कंपनियों में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी

दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियां वर्ष 2025–26 में मिसाल के तौर पर माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), मेटा (Meta) और इंटेल (Intel) लगातार कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं। इन कंपनियों में छंटनी की सबसे बड़ी वजह बिजनेस मॉडल में तेजी से आ रहे बदलाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ओर झुकाव है। टेक कंपनियों से अमेरिका में अकेले 2025-26 में 1,95,630 लोगों की नौकरियां चली गई। वहीं भारत में टेक कंपनियों ने लगभग 20 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया।

टेक कंपनियां ओवर हायरिंग के चलते कर रही छंटनी

टेक कंपनियों में महामारी के दौरान डिजिटल सेवाओं की मांग बढ़ी और कंपनियों ने बड़े पैमाने पर भर्तियां की, लेकिन अब मांग सामान्य हो चुकी है और निवेशकों का फोकस 'ग्रोथ' से हटकर 'प्रॉफिटेबिलिटी' पर आ गया है। ओवर-हायरिंग में सुधार भी छंटनी का बड़ा कारण है। टेक कंपनियां छंटनी सिर्फ लागत कटौती के लिए नहीं कर रही बल्कि टेक इंडस्ट्री में संरचनात्मक बदलाव देखा जा रहा है। कंपनियां एक ओर कम कर्मचारी, ज्यादा तकनीक और स्पष्ट मुनाफे की रणनीति के आधार पर काम कर रही हैं।

AI के सपोर्ट से कंपनियां कम कर रहीं लागत

कंपनियों की छंटनी की दूसरी अहम वजह है- AI और ऑटोमेशन। कई पारंपरिक भूमिकाएं जैसे सपोर्ट, कोडिंग, कंटेंट मॉडरेशन अब AI टूल्स से कम कर्मचारियों के सहयोग से पूरी हो रही हैं। कंपनियां लागत घटाकर रिसर्च, क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा रही हैं।

कंपनियां अपना जोखिम कम करने की कर रही है कोशिश

  • वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी छंटनी की एक बड़ी वजह है। ऊंची ब्याज दरें, धीमी फंडिंग और भू-राजनीतिक तनाव के चलते भी लोगों की नौकरियां जा रही हैं। ऐसे माहौल में कंपनियां 'लीन मॉडल' अपनाकर जोखिम कम करना चाहती हैं।
  • दुनिया के सबसे बड़े सॉफ़्टवेयर निर्माताओं में से एक माइक्रोसॉफ्ट ने करीब 6,000 से 9,000 कर्मचारियों को निकाल दिया।
  • मेटा ने अपनी परफॉर्मेंस-ड्रिवन रीऑर्गनाइजेशन के तहत लगभग 3,600 कर्मचारियों की छंटनी की।
  • सेल्सफोर्स ने 2025 में 1,000+ कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया। वहीं कंपनी कुछ जगहों पर AI संबंधी हायरिंग भी कर रही है।
  • वर्क डे ने 2025 में लगभग 1,750 कर्मचारियों की छंटनी की। कंपनी ने री-स्टक्चरिंग और AI-फोकस्ड भर्तियों के मद्देनजर ऐसा किया।
  • सेमीकंडक्टर कंपनी ने अपनी वर्कफोर्स का बड़ा हिस्सा काटने की घोषणा की थी। कई रिपोर्टों में 21,000 से अधिक कर्मचारियों के संभावित कटौती का जिक्र रहा है।

कम कर्मचारियों के साथ काम कर रही कंपनियां

हालांकि, इसका एक बड़ा कारण स्टार्टअप कंपनियों में पूंजी का चयनात्मक प्रवाह और निवेशकों का मुनाफा कमाने का दबाव भी है। इसका परिणाम यह हुआ कि कंपनियां छोटी टीमों के साथ काम और कर्मचारियों से बहुत ज्यादा काम ले रही है। कंपनियां वही पद भर रही हैं, जिनके बिना उनका काम नहीं चल सकता है।

AI First के चलते कर्मचारियों की हो रही छंटनी

इसके अलावा, कंपनियां तेजी से एआई (AI) पर दांव लगा रही हैं और कई संस्थापक एआई-फर्स्ट स्टार्टअप बना रहे हैं। इस कारण कंपनियों की रणनीति शुरू से ही कम कर्मचारियों के साथ काम करने की है। उदाहरण के तौर पर, होम डेकोर स्टार्टअप लिवस्पेस ने हाल ही में एआई पर फोकस बढ़ाने के चलते 1,000 कर्मचारियों की छंटनी की।

लॉन्गहाउस के सीईओ और संस्थापक अंशुमान दास ने मीडिया से कहा कि कंपनियां शुरुआत से ही खुद को अलग तरीके से डिजाइन कर रही हैं। वे हर विभाग में बड़ी भर्ती नहीं कर रहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार सीमित और वरिष्ठ स्तर की नियुक्तियां कर रही हैं।”

स्टार्टअप्स आईपीओ लॉन्च की तैयारी में कर रहे कॉस्ट कटिंग

उन्होंने यह भी कहा कि कई स्टार्टअप्स आईपीओ की तैयारी में लागत घटा रहे हैं और मुनाफे की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। 2024 और 2025 में बड़ा निवेश मुख्य रूप से क्विक कॉमर्स में गया है। पारंपरिक सॉफ्टवेयर एज़ अ सर्विस (SaaS) सेक्टर में बड़ी फंडिंग नहीं हो पा रही और दूसरी ओर एआई आधारित अर्थव्यवस्था तेजी से उभर रही है।

'हर कर्मचारी को खुद को साबित करना होगा'

ए​क स्टार्टअप कंपनी के कर्मचारी ने नाम नहीं देने की शर्त पर बताया, “स्टार्टअप बूम के दौर में जिन पदों पर जरूरत से ज्यादा भर्ती हुई थी, वहां अब लक्षित सुधार किए जा रहे हैं। हर कर्मचारी को अपनी नियुक्ति खुद ही साबित करना होगा, अन्यथा उस पद पर पुनर्विचार किया जा रहा है। भर्ती अब अधिक चयनात्मक और रणनीतिक हो गई है।”

हालांकि हाल के समय में छंटनी की रफ्तार कुछ धीमी हुई है। एंट्री-लेवल भर्ती में सतर्कता बरती जा रही है, लेकिन 4–10 साल के अनुभव वाले विशेषज्ञों की मांग बढ़ी है। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि ग्रीन-टेक और एआई-फर्स्ट वेंचर्स रोजगार सृजन में आगे रहेंगे। कंपनियां परिचालन को अनुकूल बनाने के लिए कई नौकरियों को टियर-2 शहरों में शिफ्ट कर रही हैं। साथ ही विदेशी स्टार्टअप्स द्वारा रिमोट टेक भूमिकाओं में भी भर्ती बढ़ने की संभावना है।

Published on:
26 Feb 2026 03:20 pm
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