
Ketan Murder Case: इंदौर के राजा रघुवंशी मर्डर केस के बाद महाराष्ट्र के पुणे में केतन मर्डर केस ने देशभर को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर हमारा समाज किस दिशा में बढ़ रहा है। लोगों ने केवल अपराध या हत्याकांड की ही चर्चा नहीं की बल्कि, आरोपी महिला के मन और उसकी परिस्थितियों की भी चर्चा की है। लोगों में आक्रोश नजर आया। लेकिन एक बड़ा तबका ऐसा भी था जो सवाल तलाशता नजर आया कि आखिर ऐसा क्यों हुआ होगा? आखिर उसकी क्या मजबूरी रही होगी? ऐसा तो कुछ हुआ होगा कि उसने किसी की हत्या कर दी? कहीं उस पर कोई मानसिक दबाव तो नहीं था? इस तरह के सवाल इस मामले का एक दिलचस्प पहलू बन गए हैं, जो महिला और पुरुष आरोपियों के मामले में अंतर दिखाते हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या महिला अपराधियों को लेकर समाज के सवाल बदल जाते हैं? patrika.com को वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी ने बताया अपराध का मनोविज्ञान...
समाज में महिलाओं को अपराधी मानने में हिचक का एक बड़ा कारण हमारी पारंपरिक सामाजिक मानसिकता है। जिसमें समाज महिलाओं को पोषण देने वाली, संवेदनशील और अहिंसक मानता आया है। इसलिए महिला आरोपी होने पर लोग उसके व्यवहार के पीछे कारण खोजने लगते हैं।''वास्तव में इसे सहानुभूति (Ketan Murder Case Psychology) नहीं कह सकते, बल्कि यह सामाजिक छवि का असर भी है। हालांकि इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि लोग अपराध को सही ठहराते हैं। केतन मर्डर केस हो या फिर इंदौर का राजा रघुवंशी मर्डर, दोनों ही मामले ऐसे रहे जिसमें लोगों में आक्रोश साफ नजर आया। लेकिन बहस करने वालों का एक बड़ा तबका यह जानना चाहता है कि आखिर ये नौबत आई ही क्यों? उसने ऐसा क्यों किया? यही वो सवाल हैं, जो महिला-पुरुष अपराधी के बीच अंतर पैदा करता नजर आता है।
एक न्यायपूर्ण समाज में किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसके लिंग से नहीं, बल्कि उसके कृत्य से, उपलब्ध साक्ष्य और कानून के आधार पर होना चाहिए। असल में यही तो है जेंडर न्यूट्रल होना। जहां न किसी तरह का पूर्वाग्रह होना चाहिए और न ही किसी तरह की रियायत।''-डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी
यानी एक्सपर्ट्स का मानना है कि सहानुभूति एक मानवीय गुण है। लेकिन जब यह न्याय को प्रभावित करे, तो यह चिंता का विषय बन जाता है। हमारे यहां कानून सिर्फ यह देखता है कि अपराध हुआ है, वह यह देखकर सजा या रियायत नहीं देता कि अपराध किसी महिला या फिर पुरुष (Ketan Murder women crime) ने किया है।
''पूरी प्लानिंग या योजनाबद्ध तरीके से किया गया अपराध हमेशा मानसिक बीमारी का परिणाम नहीं होता। ज्यादातर मामलों में व्यक्ति को अपने काम और उसके परिणामों को लेकर सब कुछ पता होता है। इसलिए हर अपराध को किसी मानसिक बीमारी का परिणाम मानना सही नहीं है।''-डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी
बता दें कि सोशल मीडिया पर मानसिक बीमारी की चर्चाएं भी नजर आईं। लेकिन मनोचिकित्सक का कहना है कि अपराध और मानसिक बीमारी (Ketan Murder Case Criminal Psychology) को एक समान नहीं माना जा सकता। क्योंकि कई बार पूरी प्लानिंग के साथ और सोच-समझकर अपराधों को अंजाम दिया जाता है।
''मनोवैज्ञानिक दृष्टि से यह महत्वपूर्ण नहीं है कि प्रेम संबंध था या नहीं, बल्कि यह जानना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के मन में दूसरे मनुष्य को बाधा के रूप में देखने की प्रक्रिया विकसित कैसे होती है? क्योंकि जब व्यक्ति किसी रिश्ते, लक्ष्य या व्यक्तिगत इच्छा की पूर्ति के लिए दूसरे की भावनाओं, उसके अस्तित्व को महत्वहीन समझने लगता है, तब नैतिक निरोधक कमजोर पड़ने लगते हैं। मनोविज्ञान में इसे Objectification और Moral Disengagement कहा जाता है। फिर उसे अपना हर गलत काम (Ketan Murder Case Pune)भी सही लगता है। फिर वह व्यवहार में भी सामान्य दिखता है।''-डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी
ध्यान देना होगा कि यही वो पॉइंट है, अपराध की मानसिक शुरुआत यहीं से होती है। जब व्यक्ति पूरी तरह खुद पर केंद्रित हो जाता है और अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सामने वाले को बड़ी रुकावट या बाधा समझने लगता है। यही वो स्थिति है, जब सामने वाले के प्रति उसके मन में सहानुभूति कम हो जाती है और एक नफरत पनप जाती है, जो उसे नैतिक आचरण से दूर कर देती है और उसके मन में अपराध को सही ठहराने की प्रक्रिया शुरू होने लगती है। परिणाम आपराधिक प्रवृत्ति (Ketan Murder Pune Crime)के रूप में सामने आ जाता है।
''अपराध को रोकने के लिए सबसे पहले अपराध को समझना होगा। यहां अपराध को समझने का मतलब उसे सही ठहराना नहीं है। बल्कि समाज को सुरक्षित बनाने की दिशा में पहल करना और अहम कदम बढ़ाना (Ketan Murder pune maharashtra)है। अब जरूरत है कि परिवार, स्कूल और समाज को भावनात्मक शिक्षा, सहानुभूति और अस्वीकृति को स्वीकार करने जैसे मुद्दों पर स्वस्थ संवाद सिखाने पर ज्यादा ध्यान देना होगा।''-डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी
इंदौर के राजा रघुवंशी मर्डर केस की तरह ही पुणे के केतन मर्डर केस (Ketan Murder case hindi news)की चर्चा भी धीरे-धीरे कम हो जाएगी। लेकिन तब भी समाज के सामने दो अहम सवाल जरूर खड़े रहेंगे, पहला- क्या हम अब भी अपराध को महिला-पुरुष के अलग-अलग रूप से तौलेंगे? और दूसरा, क्या हम ऐसे अपराधों पर केवल गुस्सा करते हैं या फिर उसके पीछे मानसिक कारणों को समझने की कोशिश भी करते हैं? इन सवालों के जवाब ही हैं जो, भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने की दिशा तय कर सकते हैं। न कि कोई कानून या सजा।