Killer Plants : ये कहानी एक ऐसे आदमी की है जो बचपन से ही खतरनाक किस्म के किलर पौधों के प्रति आकर्षित है। आज इसके पास सैकड़ों किस्म के ऐसे पौधे हैं। पढ़िए आखिर केविन झांग को क्यों किलर पौधों को पालने व रख-रखाव में दिलचस्पी है।
Killer Plants : पौधे भी किलर किस्म के होते हैं। शायद कई लोग इस बात को जानते भी हों। मगर, आपको ये जानकर हैरानी हो सकती है कि एक आदमी को इस तरह के खतरनाक पौधों को रखने का शौक है! केविन झांग ने बहुत कम उम्र में ही समझ लिया था कि बागवानी कमजोर दिल वालों के लिए नहीं होती।
वो बचपन के एक पल को याद करके बताते हैं कि जब उनकी दादी टमाटर के पौधों से मोटे हरे कैटरपिलर (कीड़े) को चॉपस्टिक से उठाकर साबुन वाले पानी में डाल देती थीं। शायद यही कारण था कि जब झांग ने अपने शिकागो स्थित घर के पास एक नर्सरी में पहली बार वीनस फ्लाइट्रैप (Venus Flytrap) देखा, उस पौधे की एक्टिविटी देखकर वो तुरंत मांसाहारी पौधों की दुनिया की ओर आकर्षित होने लगे। ऐसे पौधे जो कीड़ों को पकड़कर खाते हैं। उनको देखकर बढ़िया लगने लगा।
किलर पौधों को पसंद करने पर कहते हैं, “उनकी अनोखी बनावट और हरकत ने मुझे हैरान कर दिया। ये सब देख मैं उसी वक्त इनके (किलर पौधों) के प्यार में पड़ गया।”
किलर पौधों को लेकर झांग प्रयोग करने लगे। उनका इस काम में मन रमने लगा। वो बताते हैं कि कुछ असफल प्रयोगों के बाद, झांग ने हाई स्कूल तक पहुंचते-पहुंचते आखिरकार मांसाहारी पौधों की खेती करना सीख लिया। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्होंने बटरवर्ट्स और संड्यूज जैसे 'किलर' पौधों से भरा करीब 10 गैलन का टैंक बना लिया। वहीं वनस्पति विज्ञान क्लब में उनकी मुलाकात अपनी भावी पत्नी से हुई। इन दोनों की मुलाकात Pitcher plants के टेबल पर हुई थी।
मांसाहारी पौधों को लेकर कहते हैं कि मेडिकल स्कूल के लिए जब दोनों फिलाडेल्फिया पहुंचे, तो साथ में उनका पौधों से भरा एक्वेरियम भी आया। अब झांग का संग्रह और भी बड़ा और विविध था, लेकिन उन्हें अपने पुराने पौधों वाले समुदाय की कमी उनको खल रही थी।
इंटरनेट पर उन्होंने मांसाहारी पौधों के शौकीनों की तलाश की, पर कोई समूह नहीं मिला। तब झांग ने मैरीलैंड के "Carnivorous Plant Nursery" के मालिक माइकल स्जेसे की मदद से खुद का क्लब शुरू किया।
करीब सात साल बाद, झांग द्वारा शुरू किया गया "Mid-Atlantic Carnivorous Plant Society (MACPS)" करीब 80 सक्रिय सदस्य और 1200 ऑनलाइन फॉलोअर्स रखता है। यह ग्रुप किलर पौधों पर सेमिनार, वर्कशॉप, पौधों की नीलामी आदि पर कार्यक्रम आयोजित करने का काम करता है। हाल ही में इस संगठन ने अपना पहला पौधा प्रदर्शन शो भी किया।
झांग बताते हैं, “हमारे क्लब में वैज्ञानिक, अध्यापक और बच्चे तक आते हैं। खासकर, बच्चे इन पौधों से बहुत आकर्षित होते हैं क्योंकि वे हिलते-डुलते हैं, सिर्फ देखने के लिए एक नहीं होते।”
क्लब के उपाध्यक्ष रिक रॉबर्ट्स का अनुभव भी कुछ ऐसा ही रहा। उन्होंने 19 साल की उम्र में पहली बार कैलिफोर्निया के ऑर्किड हाउस में "Pitcher plant" देखा था। वो कहते हैं “मैं मंत्रमुग्ध हो गया। एक पौधा लिया, फिर दूसरा… और देखते ही देखते पूरी ग्रीनहाउस भर गया, मैंने महसूस किया है कि इन पौधों का शौक लग जाए तो छोड़ना मुश्किल है। यह एक जुनून बन जाता है।”।
दुनिया में लगभग 720 प्रजातियों के मांसाहारी पौधे मिलते हैं, जो अंटार्कटिका को छोड़कर हर महाद्वीप पर हैं। ये पौधे पोषक तत्वों की कमी वाले स्थानों में पनपते हैं। जैसे- दलदली मिट्टी या उष्णकटिबंधीय रेतीले स्थान पर। इस कमी को पूरा करने यानी खुद को जिंदा रखने के लिए इन्होंने अनोखी ‘शिकार तकनीक’ विकसित की हैं।
बता दें, झांग लगातार इसके लिए काम कर रहे हैं। साथ ही किलर पौधों के प्रति लोगों का अथाह प्यार भी मिल रहा है। इसके लिए झांग को कई अवॉर्ड्स आदि भी मिल चुके हैं। लोग इनके काम को सराह भी रहे हैं।
(वॉशिंग्टन पोस्ट का यह आलेख पत्रिका.कॉम पर दोनों समूहों के बीच विशेष अनुबंध के तहत पोस्ट किया गया है।)