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Tribal University : जंगल, जमीन और जनजातीय जीवन बनेगा शोध का विषय, किताबों से आगे बढ़ेगा ज्ञान

Tribal University : आंध्र प्रदेश में 641 एकड़ में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय कैंपस तैयार हो रहा है। इसकी स्थापना से आदिवासी समाज के ज्ञान को नई प्रयोगशाला मिलेगी। आदिवासी विश्वविद्यालय की क्या जरूरत है, बारे में जग्गो सिंह धाकड़ बता रहे हैं। पढ़िए खास रिपोर्ट।
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Oct 13, 2026
Tribal University
आंध्र प्रदेश में 641 एकड़ में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय कैंपस बन रहा है। (Photo: CTUAP)

Tribal University : आदिवासी समाज की पीढ़ियों की पुरानी समझ अब विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं और शोध परियोजनाओं तक पहुंचेगी। खेत से लेकर जंगल तक, पारंपरिक औषधीय ज्ञान से लेकर स्वास्थ्य की चुनौतियों को पढ़ाई और शोध का हिस्सा बनाने की तैयारी है। आंध्रप्रदेश के विजयनगरम जिले में 641 एकड़ में बन रहा आंध्र प्रदेश केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर इसी नई सोच की जमीन तैयार कर रहा है। इस परिसर में आदिवासी समाज के ज्ञान को नई प्रयोगशाला मिलेगी।

विजयनगरम में बन रहा है नया कैंपस

यहां किताबों में दर्ज ज्ञान से आगे बढ़कर अब उन सवालों पर शोध होगा, जिनके जवाब आदिवासी समाज पीढ़ियों से अपने अनुभवों में संजोए हुए है। खेती कैसे टिकाऊ बने, पारंपरिक औषधीय ज्ञान को कैसे समझा जाए और सिकल सेल जैसी स्वास्थ्य चुनौतियों से कैसे निपटा जाए। विजयनगरम जिले के कोंडाकरकम गांव में अस्थाई परिसर में संचालित विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर तैयार हो रहा है।

विश्वविद्यालय के निर्माण में 800 करोड़ रुपये खर्च होंगे

इसके पहले चरण का निर्माण जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस चरण में करीब 400 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यहां 500 छात्र और 500 छात्राओं के लिए छात्रावास का निर्माण किया गया है। दो चरणों में 800 करोड़ रुपए खर्च होंगे। विश्वविद्यालय का फोकस उच्च शिक्षा के साथ आदिवासी ज्ञान, संस्कृति, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़े विषयों पर शोध को बढ़ावा देने पर है। आंध्रप्रदेश केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना 2019 में हुई थी। इसका पूर्ण वित्तपोषण केंद्र सरकार की ओर से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से किया जाता है।

देशभर से 600 विद्यार्थी, 48 प्रतिशत छात्राएं

विश्वविद्यालय में फिलहाल देशभर से करीब 600 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें 48 प्रतिशत छात्राएं और 52 प्रतिशत छात्र हैं। विद्यार्थियों का यह अनुपात उच्च शिक्षा में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। विश्वविद्यालय में अलग-अलग क्षेत्रों और राज्यों से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए आ रहे हैं। इससे परिसर में विविध सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को एक साथ सीखने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिल रहा है।

विश्वविद्यालय में छात्राओं की लगभग आधी भागीदारी यह भी संकेत देती है कि अब उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्राएं अपनी रुचि और भविष्य की संभावनाओं के अनुरूप विषयों का चयन कर रही हैं। शिक्षा के माध्यम से वे अपने करियर को नई दिशा देने के साथ आत्मनिर्भर बनने की ओर भी कदम बढ़ा रही हैं। वहीं, छात्र और छात्राएं साथ मिलकर अध्ययन, समूह चर्चा, प्रोजेक्ट और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेते हैं, जिससे उनमें सहयोग, संवाद और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है।

रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेगी

देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में पढ़ाई के साथ अपनी प्रतिभा और कौशल को निखारने का अवसर मिल रहा है। अलग-अलग परिवेश से आने के कारण विद्यार्थियों के विचारों, अनुभवों और दृष्टिकोणों में विविधता रहती है। यह विविधता शैक्षणिक वातावरण को समृद्ध बनाने में मदद करती है। साथ ही, विद्यार्थियों के बीच आपसी समझ, समन्वय और व्यापक दृष्टिकोण विकसित होता है। छात्राओं और छात्रों की भागीदारी के संतुलित अनुपात को देखते हुए विश्वविद्यालय के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं, सुरक्षित परिसर और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। इससे विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ने और भविष्य में रोजगार, शोध तथा अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में बेहतर संभावनाएं तलाशने में सहायता मिल सकती है।

राजस्थान से कर सकते हैं एमओयू: कुलसचिव

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टी. श्रीनिवासन और कुलसचिव प्रो. जितेंद्र मोहन मिश्रा ने पत्रिका से बातचीत में कहा, राजस्थान के बांसवाड़ा में स्थित गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय प्रबंधन चाहे तो MoU करके शोध परियोजनाओं पर संयुक्त रूप से कार्य कर सकते हैं। कुलपति मिश्रा ने कहा, शोध कार्य के लिए पूरे देश में कहीं एमओयू करके कार्य किया जा सकता है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने दिखाई दिशा, उसके बाद पकड़ी रफ्तार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पहले दीक्षांत समारोह में गत 30 जून 2026 को अपने संबोधन में जनजातीय समुदायों की पारंपरिक जानकारी और आधुनिक शिक्षा के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। उन्होंने कहा था कि जनजातीय युवाओं की शिक्षा को उनकी संस्कृति और स्थानीय ज्ञान से जोड़े रखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने वनोपज, हस्तशिल्प, मिलेट, औषधीय पौधों, ईको-टूरिज्म और स्थानीय उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इन क्षेत्रों को जनजातीय समुदायों की आजीविका और क्षेत्रीय विकास से जोड़कर देखा जा सकता है। इसलिए जनजाति आधारित आवश्यकताओं के अनुसार संसाधन विकसित करने पर जोर देना शुरू किया गया।

राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय से यह अपेक्षा भी जताई कि शिक्षा विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित न रखे, बल्कि उनके लिए रोजगार, उद्यमिता और स्थानीय स्तर पर विकास के नए अवसर तैयार करने में भी मददगार बने। पहला दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय की अब तक की विकास यात्रा को सामने लाने के साथ भविष्य की जिम्मेदारियों की ओर भी संकेत करता है। खासतौर पर जनजातीय क्षेत्रों में उच्च शिक्षा को स्थानीय जरूरतों, परंपरागत ज्ञान और रोजगार के अवसरों से जोड़ना विश्वविद्यालय की भूमिका को व्यापक बनाता है। सात वर्ष में अकादमिक विभागों और पाठ्यक्रमों के विस्तार के बाद अब पहला दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया।

Updated on:
13 Oct 2026 11:58 am
Published on:
13 Oct 2026 11:58 am